गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व में गूंजेगी बाघिन की दहाड़, शिकार की कमी बताकर NTCA ने उदंती में शिफ्टिंग रोकी..

रायपुर। मध्यप्रदेश के कान्हा और बांधवगढ़ नेशनल पार्क से छत्तीसगढ़ में बाघों को एयर लिफ्ट करके लाने की प्रस्तावित योजना में तकनीकी कारणों से थोड़ा बदलाव किया गया है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने फिलहाल उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में नए बाघों को बसाने की प्रक्रिया को रोक दिया है।

प्राधिकरण की ओर से इसकी मुख्य वजह वहां बाघों के लिए शिकार की कमी को बताया गया है। इस रोक के बाद अब वन विभाग की पूरी टीम का ध्यान गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व की ओर केंद्रित हो गया है, जहां सबसे पहले मध्यप्रदेश से एक बाघिन को शिफ्ट किया जाएगा।

NTCA द्वारा हाल ही में कराए गए सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के जंगलों में नए बाघों के जीवन यापन के लिए चीतल और सांभर जैसे शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या पर्याप्त नहीं है।प्राधिकरण का मानना है कि मजबूत प्राकृतिक फूड चेन के बिना वहां बाघों को छोड़ना जोखिम भरा कदम होगा।

वन विभाग ने NTCA को भेजे जंगली सुअरों के वीडियो..

इस रोक के बाद वन विभाग ने NTCA के सवालों का जवाब देते हुए उदंती-सीता नदी टाइगर रिजर्व के जंगलों में घूमते जंगली सुअरों के झुंड के कई वीडियो दिल्ली भेजे हैं। विभाग की ओर से यह तर्क दिया गया है कि इलाके में जंगली सूअर काफी तादाद में मौजूद हैं और वे हमेशा से बाघों का प्रमुख शिकार रहे हैं। अपने दावे की पुष्टि के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) को भी बाघों द्वारा जंगली सुअरों का शिकार किए जाने के वीडियो फुटेज प्रमाण के रूप में सौंपे गए हैं।

गुरु घासीदास-तमोर पिंगला में ढाई एकड़ का बाड़ा तैयार..

जब तक उदंती के प्रस्ताव को अनुमति नहीं मिल जाती, तब तक बाघों की शिफ्टिंग का पूरा फोकस गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व पर ही रहेगा। इस क्षेत्र में पहले से ही नर बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई है। कुनबा बढ़ाने के मकसद से ही मध्यप्रदेश से एक बाघिन लाने की तैयारी की जा रही है। तमोर पिंगला के घने जंगलों में करीब ढाई एकड़ के दायरे में एक विशेष बाड़ा लगभग बनकर तैयार है। इससे बाघिन को लाने और उसकी शुरुआती निगरानी में कोई तकनीकी दिक्कत नहीं आएगी। दूसरी तरफ उदंती-सीतानदी में भी बाघों के लिए बाड़े का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। हरी झंडी मिलते ही वहां भी नर और मादा बाघ का जोड़ा लाया जाएगा। प्रदेश में वर्तमान में बाघों की संख्या 35 से 40 के बीच होने का अनुमान है।

हेलिकॉप्टर से होगी हवाई एंट्री,15 दिन एनक्लोजर में रहेंगे..

एयर लिफ्ट की प्रक्रिया को लेकर विभाग ने पूरी रूपरेखा तय कर ली है। कान्हा या बांधवगढ़ में चयनित बाघ को सबसे पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में ट्रंकुलाइज किया जाएगा। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद बाघ को एक विशेष स्टील ट्रांसपोर्ट क्रेट में रखकर हेलिकॉप्टर के जरिए छत्तीसगढ़ लाया जाएगा।

यहां बाघ को लाते ही तुरंत खुले जंगल में नहीं छोड़ा जाएगा। उसे 15 दिनों तक विशेष एनक्लोजर में रखा जाएगा। इस अवधि में नए जंगल के वातावरण से उसके तालमेल, उसके व्यवहार और स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग होगी। इसके बाद विशेषज्ञों की अनुमति मिलने पर ही बाघ को सुरक्षित रूप से खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।