कर्ज चुकाने शराब दुकान लूटने पहुंचे, लॉकर नहीं टूटा तो मोबाइल और DVR लेकर भागे..

मस्तूरी पुलिस और ACCU की संयुक्त कार्रवाई में तीन आरोपी गिरफ्तार, गैस कटर-ग्राइंडर समेत लूट में इस्तेमाल सामान बरामद; एक आरोपी अब भी फरार..

बिलासपुर। कर्ज के बोझ से दबे तीन युवकों ने जल्द पैसा कमाने के लिए शासकीय शराब दुकान को लूटने की साजिश रची। आरोपियों ने बाकायदा गैस कटर, ग्राइंडर कटर मशीन, छेनी, रस्सी और चाकू का इंतजाम किया। पहले मोपका स्थित शराब दुकान को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन वहां भीड़भाड़ देखकर योजना बदल दी। इसके बाद गतौरा की शासकीय कम्पोजिट मदिरा दुकान पहुंचे और सुरक्षा कर्मियों को चाकू दिखाकर बंधक बनाने के बाद लॉकर काटकर नकदी लूटने का प्रयास किया। लॉकर नहीं टूटा तो आरोपी शराब की कुछ बोतलें, दो मोबाइल फोन और CCTV कैमरे का DVR लेकर फरार हो गए।

मामले में मस्तूरी पुलिस और ACCU बिलासपुर की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों अनिल ध्रुव उर्फ अन्ना (24), पिंटू निषाद (25) और सुशील निर्मलकर (24) को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल और स्कूटी, दो मोबाइल फोन, गैस कटर, ग्राइंडर कटर मशीन, छेनी, धारदार चाकू सहित अन्य सामान बरामद किया गया है। मामले में एक अन्य आरोपी फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है।

रात साढ़े तीन बजे पहुंचे थे नकाबपोश..

पुलिस के अनुसार घटना 3 अगस्त की सुबह करीब 3:30 बजे गतौरा स्थित शासकीय कम्पोजिट मदिरा दुकान में हुई। दुकान में सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात साहिल राय और हरकुंवर पंकज के पास करीब चार नकाबपोश पहुंचे। सभी ने काले कपड़े पहन रखे थे। आरोपियों ने दोनों सुरक्षाकर्मियों को चाकू दिखाकर दुकान की चाबी मांगी। चाबी नहीं होने की बात कहने पर आरोपियों ने हरकुंवर पंकज के सिर, माथे और हाथ पर धारदार हथियार से हमला किया। इसके बाद दोनों सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पैर बांध दिए।

लॉकर काटने में नाकाम रहे आरोपी..

सुरक्षाकर्मियों को काबू करने के बाद आरोपी दुकान का ताला तोड़कर अंदर घुसे। उनका मुख्य निशाना दुकान का लॉकर था। आरोपियों ने ग्राइंडर कटर मशीन और छेनी की मदद से लॉकर तोड़ने की कोशिश की, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी वे लॉकर खोलने में सफल नहीं हो सके। नकदी नहीं मिलने पर आरोपियों ने दुकान में रखी शराब की कुछ बोतलें और दोनों सुरक्षा कर्मियों के मोबाइल फोन उठा लिए।

पुलिस को फुटेज न मिले, इसलिए DVR भी ले गए..

आरोपियों ने वारदात के दौरान CCTV कैमरा और उसका DVR भी अपने कब्जे में ले लिया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पुलिस को CCTV फुटेज से कोई सुराग नहीं मिले, इसलिए उन्होंने DVR को नदी में फेंक दिया। घटना के बाद आरोपी दोपहिया वाहनों से मौके से फरार हो गए।

पहले मोपका में वारदात की थी योजना..

पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने गतौरा से पहले मोपका शराब दुकान को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। चारों आरोपी देवरीखुर्द से सुशील की नीले रंग की स्कूटी और पिंटू की मोटरसाइकिल से निकले थे। बूटा पारा-फरहदा के रास्ते मोपका पहुंचे, लेकिन वहां आसपास अधिक चहल-पहल होने के कारण वारदात को अंजाम नहीं दिया। इसके बाद चिल्हाटी-फरहदा होते हुए गतौरा पहुंचे और वहां वारदात को अंजाम दिया।

कर्ज ने बनाया लूट का प्लान..

पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे कर्ज में दबे हुए थे। कर्ज चुकाने और जल्दी पैसा हासिल करने के उद्देश्य से उन्होंने शराब दुकान में रखी नकदी लूटने की योजना बनाई थी। इसी के तहत लॉकर काटने के लिए पहले से गैस कटर, ग्राइंडर, छेनी, रस्सी और चाकू सहित अन्य सामान जुटाया गया था।

CCTV और तकनीकी साक्ष्यों से पुलिस आरोपियों तक पहुंची..

वारदात के बाद पुलिस ने अज्ञात नकाबपोश आरोपियों की तलाश शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मधुलिका सिंह और SDOP मस्तूरी सुदीप सरकार के मार्गदर्शन में मस्तूरी पुलिस और ACCU की संयुक्त टीम ने घटनास्थल तथा आसपास के CCTV फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। लगातार की गई पतासाजी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम आरोपियों तक पहुंची। इसके बाद अनिल ध्रुव उर्फ अन्ना, पिंटू निषाद और सुशील निर्मलकर को गिरफ्तार किया गया।

एक आरोपी अब भी फरार, अंदरूनी जानकारी की भी जांच..

पुलिस के अनुसार मामले में एक अन्य आरोपी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस फरार आरोपी की भूमिका की भी जांच कर रही है। बताया गया है कि वह पूर्व में CMS Info System कंपनी में काम करता था और शासकीय मदिरा दुकानों से नकद राशि कलेक्शन का कार्य करता था। ऐसे में पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि शराब दुकानों में नकदी की उपलब्धता से संबंधित कोई अंदरूनी जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची।