गांव-गांव पहुंच रहा सर्पदंश से बचाव का संदेश : उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने चलाया जन-जागरूकता अभियान, ग्रामीणों और विद्यार्थियों को दी जीवनरक्षक जानकारी..

गरियाबंद – धमतरी। मानसून और गर्मी के मौसम में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में 20 जून को वन विभाग की ओर से ग्राम आमामोरा, ओढ़ और आमलोर में सर्पदंश से बचाव एवं उपचार संबंधी विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व वन परिक्षेत्र अधिकारी कुल्हाड़ीघाट दिनेश चौधरी ने किया।

इस अभियान में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, युवा और स्कूली छात्र-छात्राएं शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान लोगों को सर्पदंश से बचने के आसान उपाय, प्राथमिक उपचार और समय पर चिकित्सा सहायता के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

लोगों को बताए गए बचाव के आसान उपाय..

वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों को बताया कि बरसात और गर्मी के मौसम में सांपों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, इसलिए घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखना बेहद जरूरी है। लोगों को सलाह दी गई कि घरों में बेकार सामान और लकड़ियों का ढेर न लगाएं, रात में टॉर्च का उपयोग करें और जमीन पर सोने के बजाय खाट का उपयोग करें।

इसके अलावा खेतों, झाड़ियों और जंगल क्षेत्रों में जाते समय सतर्क रहने तथा ऊंचे जूते पहनने की भी सलाह दी गई ताकि सर्पदंश के खतरे को कम किया जा सके।

सर्पदंश होने पर क्या करें, क्या नहीं..

कार्यक्रम में ग्रामीणों को यह भी समझाया गया कि सर्पदंश होने पर घबराना नहीं चाहिए। मरीज को शांत रखना और प्रभावित अंग को अधिक हिलने-डुलने से बचाना जरूरी होता है। वन अधिकारियों ने कहा कि मरीज को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना चाहिए, जहां डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटी वेनम लगाया जा सके।

ग्रामीणों को झाड़-फूंक, चीरा लगाने, विष चूसने जैसी गलत और खतरनाक धारणाओं से बचने की सलाह भी दी गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि समय पर सही इलाज मिलने से अधिकांश मामलों में जान बचाई जा सकती है।

विषैले और अविषैले सांपों की दी जानकारी..

कार्यक्रम के दौरान विशेष पोस्टरों और चित्रों के माध्यम से ग्रामीणों को विषैले और अविषैले सर्पों की पहचान भी कराई गई। वन विभाग की टीम ने बताया कि जागरूकता और सही जानकारी से अनावश्यक डर कम होता है और दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।

108 एम्बुलेंस सेवा की जानकारी भी दी..

ग्रामीणों को आपातकालीन स्थिति में 108 एम्बुलेंस सेवा और स्वास्थ्य विभाग से तुरंत संपर्क करने की प्रक्रिया भी समझाई गई। वन विभाग ने लोगों से अपील की कि किसी भी सर्पदंश की स्थिति में बिना समय गंवाए चिकित्सकीय सहायता लें।

सोलर टॉर्च और लैम्प वितरण का भी मिला लाभ..

वन विभाग ने बताया कि पिछले वर्षों में पहाड़ी और दूरस्थ गांवों – ताराझर, आमामोरा, ओढ़, भालूडिग्गी, मठाल, कुकरार, हथोडाडीह और कठवा सहित कई गांवों में सोलर टॉर्च और सोलर लैम्प का वितरण किया गया है। इससे ग्रामीणों को रात के समय सुरक्षित आवागमन में मदद मिल रही है और सर्पदंश की घटनाओं में कमी लाने में भी सहायता मिली है।

सतर्कता और सही इलाज से बच सकती है जान..

वन परिक्षेत्र अधिकारी दिनेश चौधरी ने कहा कि मानसून और गर्मी के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष सतर्कता जरूरी है। उन्होंने कहा कि सही जानकारी, जागरूकता और समय पर उपचार से सर्पदंश से होने वाली जनहानि को काफी हद तक रोका जा सकता है।

कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, महिला समूह, युवा, ग्रामीण और बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थी उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने इस अभियान को बेहद उपयोगी और जनहितकारी बताते हुए वन विभाग की सराहना की।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, गरियाबंद
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन