जंगलों के पुनर्जीवन से लौट रही दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियाँ, यूएसटीआर बना मध्य भारत का नया बर्डिंग हॉटस्पॉट..

गरियाबंद-धमतरी। छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (यूएसटीआर) से वन्यजीव और पक्षी प्रेमियों के लिए बेहद रोमांचक और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। यहां पक्षी जगत से जुड़ी दो ऐसी दुर्लभ घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिन्होंने वैज्ञानिकों और वन अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया है। ये घटनाएं न केवल रिजर्व क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती हैं, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में हुए वन संरक्षण और आवास पुनर्स्थापन कार्यों की बड़ी सफलता भी साबित हो रही हैं।
हॉर्नबिल ने किया फ्रूट बैट का शिकार..
रिजर्व में हॉर्नबिल मॉनिटरिंग कर रही टीम ने एक बेहद दुर्लभ दृश्य रिकॉर्ड किया, जिसमें मालाबार पाइड हॉर्नबिल को फलाहारी चमगादड़ यानी फ्रूट बैट का शिकार करते देखा गया। यह दल बीट गार्ड वीरेंद्र ध्रुव और हॉर्नबिल ट्रैकर देवेंद्र यादव के नेतृत्व में जंगल में निगरानी कर रहा था।

विशेषज्ञों के अनुसार, हॉर्नबिल को सामान्यतः फलों पर निर्भर पक्षी माना जाता है, लेकिन इस तरह का शिकार व्यवहार बहुत कम देखने और दर्ज करने को मिलता है। यह घटना इस प्रजाति की अवसरवादी भोजन प्रवृत्ति और बदलते पर्यावरण के अनुरूप उसकी अनुकूलन क्षमता को दर्शाती है।
भारतीय पिट्टा के प्रजनन के मिले संकेत..
इससे भी अधिक महत्वपूर्ण उपलब्धि तब मिली जब टीम ने भारतीय पिट्टा (पिट्टा ब्रैकीउरा) के एक किशोर यानी जुवेनाइल पक्षी की तस्वीर कैमरे में कैद की। आमतौर पर भारतीय पिट्टा का प्रजनन क्षेत्र हिमालय की तराई और उससे जुड़े इलाकों को माना जाता रहा है। ऐसे में उदंती-सीतानदी क्षेत्र में किशोर पक्षी की मौजूदगी इस बात का मजबूत संकेत मानी जा रही है कि इस प्रजाति ने यहां या आसपास के जंगलों में प्रजनन किया है।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज भारतीय पिट्टा के प्रजनन क्षेत्र में संभावित विस्तार का संकेत हो सकती है। साथ ही मध्य भारत के जंगलों को इस पक्षी के नए संभावित प्रजनन आवास के रूप में भी देखा जा रहा है।
संरक्षण कार्यों का दिखने लगा असर..
वन विभाग के अनुसार, पिछले चार वर्षों में रिजर्व क्षेत्र में बड़े पैमाने पर संरक्षण और पुनर्स्थापन कार्य किए गए हैं। इनमें वन संरक्षण, शिकारी विरोधी अभियान, क्षतिग्रस्त जंगलों का पुनर्जीवन और अतिक्रमण हटाने जैसे कार्य शामिल हैं। इन प्रयासों के कारण पहले प्रभावित और उजड़े हुए वन क्षेत्र अब तेजी से पुनर्जीवित हो रहे हैं।
वन अधिकारियों का कहना है कि बेहतर सुरक्षा और प्राकृतिक आवास में सुधार के कारण कई संवेदनशील वन्यजीव प्रजातियां दोबारा इन जंगलों की ओर लौट रही हैं।
बर्डिंग और वन्यजीव पर्यटन का नया केंद्र बन रहा यूएसटीआर..
रायपुर से करीब 130 किलोमीटर दूर स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व अब तेजी से मध्य भारत के प्रमुख बर्डिंग और वन्यजीव पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना रहा है। यहां पर्यटकों को भारतीय विशाल गिलहरी और दुर्लभ भारतीय विशाल उड़न गिलहरी के नियमित दर्शन हो रहे हैं।
इसके अलावा रिजर्व में मालाबार पाइड हॉर्नबिल, भारतीय पिट्टा, ब्राउन फिश आउल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल, कई प्रजातियों के कठफोड़वा, बार्बेट, मिनिवेट तथा अनेक स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी इसे पक्षी प्रेमियों के लिए बेहद खास बनाती है।
प्रकृति को मौका मिला तो लौट आई जिंदगी..
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की यह नई उपलब्धि एक बार फिर साबित करती है कि यदि जंगलों को संरक्षण और पुनर्जीवन का अवसर दिया जाए तो वन्यजीव तेजी से सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं। रिजर्व की यह पुनरुत्थान गाथा अब पूरे मध्य भारत में संरक्षण की मिसाल बनती जा रही है।
छत्तीसगढ़ वन विभाग / उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व







