3 हजार फीट ऊंचाई पर पानी में मस्ती करते दिखे गजराज : उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के ट्रैप कैमरे में कैद हुआ मनमोहक नजारा, वन विभाग के जल संरक्षण प्रयासों की दिखी बड़ी सफलता..

गरियाबंद – धमतरी। छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद खूबसूरत और सुकून देने वाली खबर सामने आई है। रिजर्व के घने जंगलों में हाथियों का एक झुंड भीषण गर्मी के बीच पानी में अठखेलियां करता कैमरे में कैद हुआ है। ट्रैप कैमरे में रिकॉर्ड यह दृश्य अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों का दिल जीत रहा है।

वीडियो में हाथियों का पूरा परिवार, जिसमें छोटे शावक भी शामिल हैं, लगभग 3 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित एक प्राकृतिक जलस्रोत में पानी पीते और आनंदपूर्वक स्नान करते नजर आ रहा है। जंगल की हरियाली और प्राकृतिक वातावरण के बीच गजराजों की मस्ती ने इस दृश्य को और भी खास बना दिया है।

गर्मी में वन्यजीवों के लिए जीवनरेखा बने जलस्रोत..

भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच वन्यजीवों को पानी की कमी से बचाने के लिए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व द्वारा दुर्गम पहाड़ी इलाकों में कृत्रिम और पारंपरिक जलस्रोत विकसित किए गए हैं। वन विभाग ने लगभग 3 हजार फीट ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था की है।

इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि हाथियों समेत कई वन्यजीव अब इन जलस्रोतों का उपयोग कर रहे हैं। ट्रैप कैमरे में कैद हाथियों का यह दृश्य वन विभाग के जल संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन कार्यों की सफलता की कहानी बयां कर रहा है।

पानी में खेलते नजर आए हाथी और शावक.. देखें वीडियो..

कैमरे में रिकॉर्ड फुटेज में हाथियों का झुंड धीरे-धीरे जलस्रोत के पास पहुंचता दिखाई देता है। इसके बाद सभी हाथी पानी में उतरकर घंटों तक मस्ती करते नजर आते हैं। कोई अपनी सूंड से पानी उछालता दिखाई देता है तो कोई अपने बच्चों और साथियों के साथ खेलता हुआ दिखता है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, भीषण गर्मी के दौरान हाथी अक्सर पानी वाले क्षेत्रों की ओर जाते हैं, लेकिन इस तरह का सहज और प्राकृतिक व्यवहार कैमरे में कैद होना बेहद दुर्लभ और महत्वपूर्ण माना जाता है।

‘झिरिया’ बन रही जंगलों की नई जीवनधारा..

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने जल संकट से निपटने के लिए जंगलों में ‘झिरिया’ विकसित करने का बड़ा अभियान चलाया है। झिरिया दरअसल रेतीली सतह को खोदकर तैयार किया गया पारंपरिक जलस्रोत होता है, जिसमें भूमिगत जल प्रवाह के जरिए पानी जमा होता है।

जलवायु परिवर्तन और संभावित ‘सुपर एल-नीनो’ जैसी परिस्थितियों को देखते हुए रिजर्व क्षेत्र में अब तक 800 से अधिक झिरियाओं का निर्माण किया जा चुका है। इसके साथ ही वर्षभर पानी उपलब्ध कराने के लिए 34 सौर ऊर्जा संचालित पम्प भी लगाए गए हैं।

वन विभाग का मानना है कि ये छोटे-छोटे जलस्रोत अब वन्यजीवों के लिए जीवनरेखा साबित हो रहे हैं।

सुपर एल-नीनो की चुनौती से निपटने की तैयारी..

मौसम वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि आने वाले समय में ‘सुपर एल-नीनो’ या ‘गॉडज़िला एल-नीनो’ जैसी स्थिति बन सकती है, जिससे भीषण गर्मी, सूखा और जल संकट बढ़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में वन्यजीव पानी और भोजन की तलाश में गांवों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है।

इसी खतरे को देखते हुए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने जल संरक्षण और संघर्ष न्यूनीकरण के लिए विशेष रणनीति तैयार की है। रिजर्व में जलस्रोतों की लगातार निगरानी की जा रही है तथा हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैप कैमरे और फील्ड स्टाफ की मदद ली जा रही है।

100 से अधिक गांवों की सुरक्षा से भी जुड़ा है अभियान..

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व केवल हाथी, बाघ, तेंदुआ और वन भैंसा जैसे वन्यजीवों का ही घर नहीं है, बल्कि इसके आसपास और भीतर 100 से अधिक गांव भी बसे हुए हैं। ऐसे में वन विभाग वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा और जल उपलब्धता को भी प्राथमिकता दे रहा है।

वन विभाग का कहना है कि जंगलों के भीतर पर्याप्त पानी और चारा उपलब्ध रहने से वन्यजीव गांवों की ओर कम आते हैं, जिससे संघर्ष की घटनाएं भी घटती हैं।

जलस्रोतों की सुरक्षा के लिए सख्त निगरानी..

इन महत्वपूर्ण जलस्रोतों की सुरक्षा के लिए रिजर्व क्षेत्र में गश्त और निगरानी भी बढ़ा दी गई है। हाल ही में वन अमले ने ओडिशा के कटफाड़, कुसुमखुंटा और खिपरीमाल गांवों के सात लोगों को झिरियाओं में जहरीला पदार्थ डालने के प्रयास में पकड़ा था। अधिकारियों के अनुसार यदि यह घटना सफल हो जाती, तो हाथियों सहित कई वन्यजीवों की जान खतरे में पड़ सकती थी।

सोशल मीडिया पर छाया वीडियो..

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने हाथियों का यह वीडियो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया। वीडियो सामने आते ही लोगों ने इसे खूब पसंद किया। कई लोगों ने इसे प्रकृति का अद्भुत और मन को सुकून देने वाला दृश्य बताया।

वन्यजीव संरक्षण की मिसाल बन रहा उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व..

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैप कैमरों में हाथियों की नियमित मौजूदगी और उनका सहज व्यवहार यह साबित करता है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का वातावरण वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और अनुकूल बनता जा रहा है। गर्मी के इस कठिन दौर में पानी से भरी हर झिरिया अब केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि जंगल के जीवों के लिए जीवनरेखा बन चुकी है।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की यह पहल अब मध्य भारत में वन्यजीव संरक्षण और जल प्रबंधन का एक सफल मॉडल बनकर उभर रही है।