करोड़ों की सरकारी इमारत में जगह-जगह बड़ी दरारें, ग्रामीणों ने की जांच और कार्रवाई की मांग..

बिलासपुर। बिलासपुर जिले के पचपेड़ी तहसील क्षेत्र में निर्माणाधीन नए तहसील कार्यालय भवन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड (गृह निर्माण मंडल) की देखरेख में बन रहे इस सरकारी भवन में हैंडओवर से पहले ही दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। भवन अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं हुआ है, लेकिन उसकी स्थिति देखकर स्थानीय लोगों में निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।

स्थानीय नागरिकों और ग्रामीणों का आरोप है कि भवन निर्माण में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई है। उनका कहना है कि निर्माण के दौरान घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिसके कारण फिनिशिंग चरण में ही दीवारें दरकने लगी हैं। कई स्थानों पर दीवारों और प्लास्टर में स्पष्ट दरारें देखी जा सकती हैं, जिससे भवन की मजबूती पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
पहली बारिश से पहले ही सामने आई खामियां..
ग्रामीणों का कहना है कि भवन ने अभी तक पहली बारिश का सामना भी नहीं किया है, लेकिन उससे पहले ही दरारें उभर आना निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही का संकेत है। लोगों का सवाल है कि जब भवन निर्माण के दौरान ही ऐसी स्थिति है, तो आने वाले वर्षों में इसमें कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों और यहां आने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।

निर्माण क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की दरारें कई कारणों से उत्पन्न हो सकती हैं, जिनमें निम्न गुणवत्ता की सामग्री, सीमेंट-कंक्रीट का गलत अनुपात, पर्याप्त क्योरिंग (तराई) नहीं होना अथवा निर्माण तकनीक में त्रुटियां शामिल हैं। ऐसे में तकनीकी परीक्षण के बिना भवन की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन संभव नहीं है।
निगरानी व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल..
भवन निर्माण कार्य की निगरानी की जिम्मेदारी हाउसिंग बोर्ड के तकनीकी अधिकारियों पर होती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर अधिकारियों की नियमित मौजूदगी नहीं रहती और कार्य की गुणवत्ता पर प्रभावी निगरानी नहीं की गई। यही वजह है कि निर्माण के दौरान सामने आई खामियों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य की नियमित जांच होती, तो दीवारों में आई दरारों जैसी समस्या शुरुआती स्तर पर ही पकड़ में आ जाती और आवश्यक सुधार कराया जा सकता था।
जांच की मांग तेज..
मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र के नागरिकों ने निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि भवन की गुणवत्ता की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराई जानी चाहिए और यदि निर्माण में लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
लोगों का यह भी कहना है कि सरकारी धन से बनने वाली सार्वजनिक इमारतों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसे भवन वर्षों तक आम जनता की सेवा के लिए बनाए जाते हैं, इसलिए उनकी मजबूती और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
जनता की नजर अब प्रशासनिक कार्रवाई पर..
निर्माणाधीन तहसील भवन में सामने आई खामियों के बाद अब लोगों की नजर जिला प्रशासन और हाउसिंग बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हुई है। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए भवन की तकनीकी जांच कराई जाएगी और दोषियों पर आवश्यक कार्रवाई होगी, ताकि भविष्य में इस तरह की शिकायतों की पुनरावृत्ति न हो सके।
यदि समय रहते गुणवत्ता संबंधी सवालों का समाधान नहीं किया गया, तो यह भवन सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बड़ा प्रश्न बन सकता है।







