
कानन पेंडारी में वन्यप्राणी सप्ताह का समापन, विद्यार्थियों से लेकर पर्यटकों और जू कीपर्स तक ने निभाई सहभागिता; प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र..

बिलासपुर। वन्यजीवों की सुरक्षा केवल जंगल और वन विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। इसी संदेश के साथ कानन पेंडारी जूलॉजिकल गार्डन में सात दिनों तक चला वन्यप्राणी सप्ताह 2026 गुरुवार को संपन्न हुआ। 2 से 8 अक्टूबर तक आयोजित इस अभियान में विद्यार्थियों, पर्यटकों, वन विभाग के कर्मचारियों, जू कीपर्स और वन्यजीव सेवकों ने अलग-अलग गतिविधियों में हिस्सा लेकर संरक्षण का संदेश दिया।
कानन पेंडारी जूलॉजिकल गार्डन और जंगल तक फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से आयोजित सप्ताह में जागरूकता, रचनात्मक गतिविधियों, प्रतियोगिताओं और वन्यजीव सेवकों के सम्मान को प्रमुखता दी गई। कार्यक्रम मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) प्रियंका पांडेय और कानन पेंडारी के संचालक गणेश यू.आर. के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
478 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा..
सात दिनों के अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी विद्यार्थियों की भागीदारी रही। अलग-अलग विद्यालयों से कुल 478 छात्र-छात्राओं और 50 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने वन्यप्राणी सप्ताह की गतिविधियों में हिस्सा लिया।
पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, मल्हार से 150 विद्यार्थी और 8 शिक्षक शामिल हुए। जवाहर नवोदय विद्यालय अमरकंटक के 107 विद्यार्थी और 8 शिक्षक तथा जवाहर नवोदय विद्यालय सक्ती के 74 विद्यार्थी और 5 शिक्षक भी अभियान का हिस्सा बने। इसके अलावा स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय सहित अन्य स्कूलों के विद्यार्थियों ने भी विभिन्न कार्यक्रमों में सहभागिता की।
विद्यार्थियों की भागीदारी ने अभियान को केवल जू परिसर तक सीमित नहीं रखा, बल्कि वन्यजीवों और पर्यावरण को लेकर नई पीढ़ी के बीच संवाद का अवसर भी बनाया।
एनक्लोजर के सामने पर्यटकों को दी संरक्षण की जानकारी..
पूरे सप्ताह जंगल तक फाउंडेशन के स्वयंसेवकों ने कानन पेंडारी के अलग-अलग वन्यप्राणी एनक्लोजर के सामने पर्यटकों से संवाद किया। उन्हें वन्यजीवों के व्यवहार, उनके प्राकृतिक आवास, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन में वन्यजीवों की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।


इस दौरान पर्यटकों को यह भी समझाने का प्रयास किया गया कि वन्यजीवों का संरक्षण केवल वन क्षेत्रों की जिम्मेदारी नहीं है। आम लोगों का व्यवहार भी वन्यजीवों और उनके आवास की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
निबंध से चित्रकला तक, बच्चों ने दिखाई रचनात्मकता..
वन्यप्राणी सप्ताह के दौरान विद्यार्थियों के लिए निबंध और चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। निबंध प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। वहीं चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी कल्पनाओं के माध्यम से प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति अपनी संवेदनाएं कागज पर उतारीं।


पर्यटकों के लिए क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। वन्यजीव, जैव विविधता और संरक्षण से जुड़े सवालों के माध्यम से लोगों को मनोरंजक तरीके से महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
वन्यजीव सेवकों को किया सम्मानित..
अभियान के दौरान कानन पेंडारी के जू कीपर्स, वन विभाग के कर्मचारियों और वन्यजीवों की देखभाल में जुटे अन्य कर्मियों का विशेष सम्मान भी किया गया। इन कर्मचारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वन्यजीवों की देखभाल, भोजन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और उनके व्यवहार पर नजर रखने के लिए किस तरह नियमित रूप से काम किया जाता है।

जंगल तक फाउंडेशन के संस्थापक रोशन खामारी ने वन्यजीव सेवकों के समर्पण के लिए उनका आभार जताया। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सेवा और देखभाल में जुटे कर्मचारियों का काम अक्सर लोगों की नजरों से दूर रहता है, लेकिन संरक्षण की पूरी व्यवस्था में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
स्वच्छता से भी जोड़ा संरक्षण का संदेश..
वन्यप्राणी सप्ताह के दौरान कानन पेंडारी परिसर में स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। वन विभाग के कर्मचारियों और जंगल तक फाउंडेशन के स्वयंसेवकों ने मिलकर परिसर को स्वच्छ रखने के साथ पर्यटकों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक किया।
आयोजकों का कहना रहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल पशु-पक्षियों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण भी वन्यजीवों के बेहतर आवास के लिए जरूरी है।
अंतिम दिन विजेताओं को पुरस्कार..
सप्ताह के अंतिम दिन विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों और प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही सात दिनों तक चले जागरूकता अभियान का औपचारिक समापन हुआ।

इस दौरान कानन पेंडारी जूलॉजिकल गार्डन की रेंजर सुखबाई कंवर, डिप्टी रेंजर संतोष कुमार कांत, अधीक्षक प्रकाश कुजूर सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। जंगल तक फाउंडेशन के संस्थापक रोशन खामारी और स्वयंसेवकों ने भी पूरे अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाई।
साझा जिम्मेदारी का संदेश देकर विदा हुआ सप्ताह..
वन्यप्राणी सप्ताह 2026 का आयोजन प्रतियोगिताओं और जागरूकता गतिविधियों से आगे बढ़कर अलग-अलग वर्गों को संरक्षण के एक साझा मंच पर लाने का प्रयास रहा। सात दिनों में विद्यार्थियों ने रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से, पर्यटकों ने जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए और वन्यजीव सेवकों ने अपने काम के माध्यम से संरक्षण की जरूरत को सामने रखा।


सात दिनों के इस अभियान का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल वन विभाग की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी है।







