GPM रेल हादसा : धक-धक करने लगी सांसें जब पटरियों पर दौड़ती मालगाड़ी अचानक बंटी दो टुकड़ों में, लोको पायलट की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा !

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर-कटनी रेल सेक्शन पर रविवार की शाम उस वक्त भारी हड़कंप मच गया, जब पटरियों पर तेज रफ्तार से दौड़ती एक भारी-भरकम मालगाड़ी अचानक बीच से ही दो हिस्सों में बंट गई। यह दिल दहला देने वाला मंजर इतना खौफनाक था कि अगर समय रहते स्थिति पर तुरंत काबू नहीं पाया जाता, तो एक बहुत बड़ा और विनाशकारी रेल हादसा हो सकता था। लेकिन, मौके पर मौजूद लोको पायलट की सूझबूझ, सतर्कता और त्वरित एक्शन ने रेलवे महकमे की साख और एक बड़ी अनहोनी दोनों को बचा लिया।

बीच सफर में कैसे हुआ यह डरावना हादसा ?

मिली जानकारी के मुताबिक, यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना पेंड्रारोड और वेंकटनगर रेलवे स्टेशनों के बीच घटित हुई। कोयले से पूरी तरह लदी एक मालगाड़ी अपने गंतव्य की ओर तेज गति से आगे बढ़ रही थी। तभी अचानक अत्यधिक दबाव या तकनीकी खामी के चलते ट्रेन के डिब्बों को आपस में जोड़ने वाली भारी-भरकम ‘कपलिंग’ जोर के झटके के साथ टूट गई।

कपलिंग के टूटते ही इंजन अपने साथ आगे के करीब 25 डिब्बों को खींचते हुए तेजी से आगे निकल गया, जबकि पीछे के दर्जनों भारी डिब्बे पटरियों पर बिना इंजन के ही छूट गए। ट्रेन के इस तरह बीच सफर में दो अलग-अलग हिस्सों में बंटने की खबर मिलते ही रेलवे कंट्रोल रूम में तुरंत सायरन बज उठे और विभागीय अधिकारियों के पसीने छूट गए।

इमरजेंसी ब्रेक और लोको पायलट का कमाल..

जैसे ही मुस्तैद लोको पायलट को ट्रेन के एयर प्रेशर में अचानक आए इस भारी बदलाव और कपलिंग टूटने का अहसास हुआ, उसने एक सेकंड की भी देरी नहीं की। अपनी तत्परता और ट्रेनिंग का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए पायलट ने तुरंत ‘इमरजेंसी ब्रेक’ लगा दिए। ब्रेक लगते ही इंजन और उसके साथ जुड़े आगे के डिब्बों को कुछ ही दूरी पर सुरक्षित तरीके से रोक लिया गया। इससे डिरेलमेंट (पटरी से उतरने) या पीछे छूटे डिब्बों से किसी अन्य ट्रेन के टकराने का भयंकर खतरा टल गया।

दौड़े अधिकारी, युद्धस्तर पर हुआ सुधार कार्य..

घटना की सूचना फ्लैश होते ही रेलवे के आला अधिकारी, इंजीनियरिंग और तकनीकी टीम आनन-फानन में घटनास्थल की ओर दौड़े। मौके पर पहुंचकर तकनीकी दल ने तुरंत मोर्चा संभाला। कड़ी मशक्कत के बाद टूटी हुई कपलिंग को दुरुस्त किया गया और पीछे छूटे हुए डिब्बों को वापस इंजन के साथ सुरक्षित तरीके से जोड़ा गया।

गनीमत यह रही कि इस गंभीर घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि या रेलवे संपत्ति का बड़ा नुकसान नहीं हुआ। रेलवे प्रशासन ने इस गंभीर तकनीकी चूक और घटना के असल कारणों की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। डिब्बों को जोड़े जाने के बाद बिलासपुर-कटनी रूट पर रेल परिचालन पूरी तरह से सुरक्षित और सामान्य कर दिया गया है।