

गरियाबंद/धमतरी।छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की प्राकृतिक वादियों में ‘प्रोजेक्ट मुक्ति’ के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय गहन मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (MHM) प्रशिक्षण कार्यक्रम का पहला दिन उत्साह, जागरूकता और प्रेरणा के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों से आई 35 जनजातीय महिला नेतृत्वकर्ताओं ने भाग लिया, जिन्हें ‘पीरियड सखियाँ’ के रूप में तैयार किया जा रहा है।

प्रशिक्षण में कमार (PVTG), गोंड, भुंजिया, बिंझवार, मुरिया, धुर्वा और उरांव समुदायों की महिलाएँ शामिल हुईं। इन महिलाओं का उद्देश्य अपने-अपने गांवों में जाकर मासिक धर्म स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिलाओं के अधिकारों को लेकर जागरूकता फैलाना है।
कार्यक्रम का आयोजन ऐसे क्षेत्रों को ध्यान में रखकर किया गया है, जहाँ आज भी स्वास्थ्य सुविधाएँ सीमित हैं, कई गांव घने जंगलों के बीच बसे हुए हैं और मासिक धर्म जैसे विषयों पर खुलकर बात करना सामाजिक रूप से कठिन माना जाता है। जागरूकता और संसाधनों की कमी के कारण ग्रामीण एवं जनजातीय महिलाओं को कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह पहल महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
मिथकों को तोड़ने और जागरूकता बढ़ाने पर जोर..
प्रशिक्षण के पहले दिन विशेषज्ञों ने मासिक धर्म से जुड़े मिथकों, गलत धारणाओं और सामाजिक वर्जनाओं पर खुलकर चर्चा की। महिलाओं को सुरक्षित एवं स्वच्छ मासिक धर्म प्रबंधन, संक्रमण से बचाव, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य तथा महिलाओं की गरिमा और स्वास्थ्य अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि दूरस्थ आदिवासी इलाकों में स्थायी बदलाव तब ही संभव है, जब स्थानीय महिलाएँ स्वयं नेतृत्व की भूमिका निभाएँ। इसी उद्देश्य से ‘पीरियड सखी’ मॉडल तैयार किया गया है, ताकि समुदाय की महिलाएँ ही स्वास्थ्य शिक्षिका और जागरूकता दूत बनकर अन्य महिलाओ एवं किशोरियो तक सही जानकारी पहुँचा सके।
जनजातीय महिलाओं में दिखा उत्साह..
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए और कई सामाजिक मुद्दों पर खुलकर चर्चा की। प्रतिभागियों ने कहा कि पहले वे मासिक धर्म से जुड़े विषयों पर बात करने में संकोच महसूस करती थी, लेकिन अब वे अपने गांवों में जाकर अन्य महिलाओं और किशोरियों को जागरूक करने के लिए आत्मविश्वास महसूस कर रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम जनजातीय क्षेत्रों में महिलाओं के स्वास्थ्य सुधारने के साथ-साथ सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कई संस्थाओं का सहयोग..
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम USTR एवं जिला प्रशासन गरियाबंद और धमतरी के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के संचालन में अस्तित्व वेलनेस, अर्थ ब्रिगेड फाउंडेशन, NGO खोज तथा जन जागृति की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
स्वास्थ्य समानता की ओर मजबूत पहल..
‘प्रोजेक्ट मुक्ति’ केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि वंचित जनजातीय समुदायों में मासिक धर्म स्वास्थ्य समानता, जागरूकता और महिलाओं की गरिमा सुनिश्चित करने की दिशा में चलाया जा रहा एक सामाजिक अभियान बनता जा रहा है। जंगलों और दूरस्थ गांवों से निकली ये ‘पीरियड सखियाँ’अब अपने समुदायों में बदलाव की नई मिसाल बनेंगी। 🌿



