भूपेश बघेल का मास्टरस्ट्रोक’ : टीएस बाबा से बनाई दूरी, राहुल के ‘Gen-Z’ फॉर्मूले पर फोकस कर खेला बड़ा सियासी दांव..

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष (PCC Chief) की कुर्सी को लेकर मची खींचतान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक बेहद सधा हुआ सियासी दांव चला है।प्रदेश कांग्रेस की गुटबाजी वाली पिच पर खेलने के बजाय बघेल ने खुद को ‘हाईकमान के अनुशासित सिपाही’ और राहुल गांधी की ‘यूथ पॉलिटिक्स’ के पैरोकार के रूप में पेश किया है। सियासी नजरिए से देखें तो बघेल अब राज्य की उलझी हुई अंदरूनी राजनीति (खासकर सिंहदेव गुट से विवाद) से खुद को ऊपर उठाकर राष्ट्रीय मुद्दों पर बैटिंग कर रहे हैं।

बाबा को इग्नोर कर हाईकमान के पाले में डाली गेंद..

राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा बघेल की उस ‘इग्नोरेंस स्ट्रैटेजी’ की है, जिसके तहत उन्होंने पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव के बयानों पर प्रतिक्रिया देने से साफ इनकार कर दिया। सियासत में ‘नो कमेंट’ भी एक बहुत बड़ा स्टेटमेंट होता है। बघेल यह संदेश देना चाहते हैं कि वे अब किसी भी गुटीय बयानबाजी का हिस्सा नहीं हैं।

मौजूदा पीसीसी चीफ दीपक बैज के साढ़े तीन साल के नेतृत्व की तारीफ कर बघेल ने उन्हें अपना ‘साइलेंट सपोर्ट’ तो दिया, लेकिन कुर्सी किसे मिलेगी, यह सवाल दिल्ली दरबार (हाईकमान) पर छोड़ दिया। उनका यह कहना कि “मैं इन सब मामलों में अपनी बुद्धि नहीं लगाता”, साफ बताता है कि वे आलाकमान की नजरों में किसी भी विवाद का कारण नहीं बनना चाहते।

स्टेट पॉलिटिक्स से इतर राहुल के ‘Gen-Z’ विजन पर फोकस..

इस प्रेसवार्ता का सबसे अलग एंगल यह था कि बघेल ने अपना पूरा फोकस राहुल गांधी की विचारधारा को आगे बढ़ाने पर रखा। केंद्र सरकार पर ‘अघोषित आपातकाल’, मीडिया पर दबाव और आर्थिक संकट का आरोप लगाते हुए बघेल ने नई पीढ़ी यानी ‘Gen-Z’ को लोकतंत्र का सबसे बड़ा रक्षक बताया।

यह कोई सामान्य बयान नहीं है। यह राहुल गांधी के उस विजन से खुद को जोड़ने की रणनीति है, जिसमें 90 के दशक के बाद जन्मे युवाओं को संगठन की कमान सौंपने की तैयारी है। बघेल यह साबित कर रहे हैं कि उनकी सोच सिर्फ राज्य की चौहद्दी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे पार्टी के राष्ट्रीय विजन के साथ कदमताल कर रहे हैं।

साय सरकार पर ‘बिजली संकट’ का वार..

एक तरफ बघेल नेशनल मुद्दों पर केंद्र को घेर रहे हैं, तो दूसरी तरफ विपक्ष के तौर पर राज्य की विष्णुदेव साय सरकार की दुखती रग पर भी उन्होंने हाथ रख दिया है।

पेट्रोल-डीजल की महंगाई के साथ-साथ प्रदेश में मंडराते ‘बिजली संकट’ की आहट का जिक्र कर उन्होंने आम जनता के सीधे सरोकार का मुद्दा उठाया है। उनका यह बयान राज्य सरकार के लिए एक अलर्ट है कि कांग्रेस अब बुनियादी सुविधाओं पर सरकार को घेरने की तैयारी कर चुकी है।

सियासी मायने..

भूपेश बघेल का यह नया रुख बताता है कि वे अब ‘लोकल विवादों’ से दूर रहकर ‘नेशनल विजन’ और ‘जनता के मुद्दों’ के सहारे अपनी राजनीतिक जमीन को और पुख्ता कर रहे हैं। टीएस सिंहदेव से दूरी और युवाओं (Gen-Z) पर भरोसा – यही बघेल का नया पॉलिटिकल टूलकिट है।