बस्तर में 1 साल से बिना गाड़ियों के काम कर रहे PWD के 35 SDO : 250 KM दूर निजी गाड़ियों से जा रहे अफसर ; पुल-सड़कों की मॉनिटरिंग और बिल अटके..

जगदलपुर। बस्तर संभाग के सात जिलों में लोक निर्माण विभाग (PWD) का जमीनी तंत्र पिछले एक साल से संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहा है। संभाग भर में PWD की अलग-अलग शाखाओं के करीब 35 अनुविभागीय अधिकारी (SDO) बिना सरकारी चार पहिया वाहनों के काम करने को मजबूर हैं।

अधिकारियों को 250 किलोमीटर से भी अधिक दूर स्थित निर्माण स्थलों का निरीक्षण अपने निजी साधनों से करना पड़ रहा है। इसका सीधा असर बस्तर के अंदरूनी इलाकों में चल रहे सड़कों, पुल-पुलियों और सरकारी भवनों के निर्माण कार्य की गुणवत्ता और रफ्तार पर पड़ रहा है।

जानिए क्या है पूरा मामला?

PWD के राष्ट्रीय राजमार्ग (NH), सेतु निर्माण (Bridge Construction) और ई एंड एम (E&M) शाखा से जुड़े SDO के पास बस्तर के दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में चल रहे विकास कार्यों की मॉनिटरिंग का जिम्मा है।

35 अफसर प्रभावित : संभाग के 7 जिलों में तैनात PWD के 35 से अधिक SDO बिना सरकारी गाड़ी के हैं।

1 साल से स्थिति खराब : बीते एक साल से विभाग की ओर से नए वाहन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

250 KM का दायरा : कई अफसरों के पास 200 से 250 किलोमीटर के विशाल और बेहद कठिन भौगोलिक दायरे की जिम्मेदारी है।

फील्ड विजिट अटकी : निजी गाड़ियों से दौड़ रहे अफसर..

बस्तर का बड़ा हिस्सा पथरीला, जंगलों से घिरा और भौगोलिक दृष्टि से बेहद कठिन है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की जांच के लिए अफसरों को लगातार साइट विजिट करनी होती है। सरकारी वाहन नहीं होने के कारण SDO को या तो निजी गाड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है या फिर अपनी यात्राएं टालनी पड़ रही हैं। लंबी दूरी और दुर्गम रास्तों पर लगातार निजी वाहनों से सफर करना अधिकारियों के लिए आर्थिक और शारीरिक दोनों रूप से भारी पड़ रहा है। नतीजतन, नियमित फील्ड विजिट की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है।

3 बड़े असर : मूल्यांकन रुका, बिल अटके और गुणवत्ता पर सवाल..

साइट मूल्यांकन में देरी : समय पर अधिकारियों के न पहुँच पाने से निर्माण कार्यों की प्रगति का सही समय पर तकनीकी मूल्यांकन नहीं हो पा रहा है।

भुगतान और स्वीकृति प्रभावित : साइट विजिट न होने से टेक्निकल अप्रूवल, बिलों का परीक्षण और ठेकेदारों का भुगतान अटक गया है, जिससे ठेकेदार भी काम की रफ्तार धीमी कर रहे हैं।

गुणवत्ता से समझौता : दूरस्थ इलाकों में नियमित मॉनिटरिंग न होने से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के पालन पर संकट खड़ा हो गया है।

संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा का बड़ा खतरा..

बस्तर संभाग के कई अंदरूनी और संवेदनशील इलाकों में बिना तय सुरक्षा प्रोटोकॉल और बिना सरकारी वाहन के जाना अफसरों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

नियमों के मुताबिक, संवेदनशील क्षेत्रों में आधिकारिक वाहनों और सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही आवाजाही की अनुमति होती है। सरकारी चार पहिया वाहन उपलब्ध होने से अफसरों को न केवल दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचने में आसानी होगी, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी सहूलियत मिलेगी।

विभाग का पक्ष : गाड़ियाँ खरीदी जाएँगी, तब मिलेंगी..

मामले को लेकर लोक निर्माण विभाग, जगदलपुर जोन के मुख्य अभियंता समयलाल ने बताया कि विभाग की ओर से नए वाहनों की खरीदी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वाहन खरीदे जाने के बाद आवश्यकता और प्राथमिकता के आधार पर SDO को उपलब्ध कराए जाएँगे।

मुख्य अभियंता ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारियों को फील्ड भ्रमण और निरीक्षण के दौरान नियमानुसार टीए (TA) और डीए (DA) का भुगतान किया जा रहा है।