छत्तीसगढ़ के 42 नर्सिंग कॉलेजों पर INC की गाज,मानकों की अनदेखी ने बढ़ाई छात्रों की चिंता..

छत्तीसगढ़ में रायपुर के 15 और बिलासपुर के 7 संस्थान सूची से बाहर; अब दूसरे राज्यों में पंजीयन और नौकरी को लेकर सवाल..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थानों में निर्धारित मानकों के पालन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) ने प्रदेश के 42 नर्सिंग संस्थानों में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों की मान्यता/मान्यता सूची से स्थिति वापस लेने की कार्रवाई की है। यह कार्रवाई INC Act, 1947 की धारा 14 के तहत की गई है। परिषद की वेबसाइट पर ऐसे संस्थानों की अलग सूची उपलब्ध है, जिनकी मान्यता वापस ली गई है और जिनसे संबंधित योग्यता रखने वालों के पंजीयन को लेकर राज्य-सीमित प्रावधान लागू होते हैं।

इस कार्रवाई की सबसे बड़ी चिंता उन विद्यार्थियों को लेकर है, जो इन संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं या यहां से पाठ्यक्रम पूरा कर चुके हैं। INC के अनुसार मान्यता वापस लिए गए संस्थानों से प्राप्त योग्यता रखने वाला व्यक्ति उस राज्य में ही पंजीयन के लिए पात्र होगा, जहां से उसने योग्यता हासिल की है। ऐसे में दूसरे राज्यों में पंजीयन और रोजगार की संभावनाओं को लेकर विद्यार्थियों के सामने गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

रायपुर सबसे ज्यादा प्रभावित, बिलासपुर भी पीछे नहीं..

प्रदेश में जिन संस्थानों पर कार्रवाई की बात सामने आई है, उनमें रायपुर के 15, बिलासपुर के 7, दुर्ग के 6 और राजनांदगांव के 5 कॉलेज बताए जा रहे हैं। इसके अलावा सरगुजा, बलरामपुर, बस्तर, गरियाबंद, महासमुंद, रायगढ़ और सूरजपुर जिले के संस्थान भी प्रभावित सूची में शामिल हैं।

एक साथ बड़ी संख्या में संस्थानों पर कार्रवाई से नर्सिंग शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों और कॉलेज संचालकों में हलचल है। खासकर वे विद्यार्थी असमंजस में हैं, जिन्होंने प्रवेश लेते समय संस्थान की मान्यता और भविष्य में मिलने वाली डिग्री की वैधता को अपनी प्राथमिकता माना था।

डिग्री से ज्यादा अब पंजीयन का सवाल..

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल कॉलेज की मान्यता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य का पंजीयन है। नर्सिंग क्षेत्र में पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद संबंधित नर्सिंग काउंसिल में पंजीयन रोजगार और पेशेवर कामकाज के लिए महत्वपूर्ण होता है।

INC की वेबसाइट पर स्पष्ट किया गया है कि मान्यता वापस लिए गए संस्थानों से मान्य योग्यता रखने वाला व्यक्ति केवल उसी राज्य में पंजीयन का हकदार होगा, जहां से उसने योग्यता प्राप्त की है। यही प्रावधान विद्यार्थियों की चिंता का मुख्य कारण बना हुआ है।

हालांकि प्रत्येक संस्थान और प्रत्येक पाठ्यक्रम की स्थिति अलग-अलग हो सकती है। इसलिए विद्यार्थियों को अपने कॉलेज, पाठ्यक्रम, प्रवेश वर्ष और संबंधित राज्य नर्सिंग काउंसिल की स्थिति की आधिकारिक जानकारी अवश्य जांचनी चाहिए।

भवन का सत्यापित नक्शा भी बना बड़ी वजह..

पूरे मामले में कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर और दस्तावेजों का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने निजी नर्सिंग कॉलेजों से भवन का सत्यापित नक्शा और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा था। आरोप है कि कई संस्थानों ने निर्धारित समय में जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए।

नर्सिंग संस्थानों के लिए केवल कक्षाएं संचालित करना ही पर्याप्त नहीं है। भवन, पर्याप्त शिक्षण स्थान, प्रयोगशालाएं, फैकल्टी, अस्पताल से संबद्धता और अन्य जरूरी सुविधाएं भी मानकों के अनुरूप होना आवश्यक है। INC की मौजूदा व्यवस्था में संस्थानों की suitability यानी मानकों के अनुरूप होने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है और 2026-27 के लिए suitability renewal की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है।

किराए के छोटे भवनों में कॉलेज चलाने के आरोप..

नर्सिंग शिक्षा को लेकर लंबे समय से यह शिकायत उठती रही है कि कुछ निजी संस्थान पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर के बिना ही पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं। कहीं सीमित कमरों में कॉलेज चलाने तो कहीं प्रयोगशाला और अन्य आवश्यक सुविधाओं के अभाव की शिकायतें सामने आती रही हैं।

नर्सिंग कॉलेज में विद्यार्थियों को केवल कक्षा में पढ़ाई कराने से काम नहीं चलता। उन्हें प्रयोगशाला में प्रशिक्षण, अस्पताल में व्यावहारिक अनुभव और पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षकों की आवश्यकता होती है। यदि संस्थान इन बुनियादी सुविधाओं के बिना संचालित होते हैं तो इसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता और अंततः मरीजों की देखभाल पर पड़ सकता है।

हर साल निरीक्षण और suitability जरूरी..

INC की व्यवस्था के तहत नर्सिंग संस्थानों की मानकों के अनुरूप स्थिति सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण और suitability प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। परिषद ने 2026 में संस्थानों के निरीक्षण, संचार और surprise inspection को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

निरीक्षण में केवल भवन नहीं, बल्कि फैकल्टी, लैब, अस्पताल की संबद्धता और अन्य आवश्यक सुविधाओं को भी देखा जाता है। नए कॉलेज की स्थापना, सीट बढ़ाने और पाठ्यक्रम के विस्तार जैसे मामलों में भी संस्थान की निर्धारित मानकों के अनुरूप स्थिति महत्वपूर्ण होती है।

प्रदेश में बड़ी संख्या में नर्सिंग संस्थान..

INC की उपलब्ध वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2024 तक छत्तीसगढ़ में ANM और GNM समेत बड़ी संख्या में नर्सिंग संस्थान संचालित थे। रिपोर्ट में प्रदेश में 49 GNM संस्थानों के साथ 1,640 सीटों का उल्लेख है।

ऐसे में 42 संस्थानों पर कार्रवाई का मामला केवल कॉलेज संचालकों तक सीमित नहीं है। इसका असर हजारों विद्यार्थियों और नर्सिंग शिक्षा की पूरी व्यवस्था पर पड़ सकता है। यही वजह है कि अब राज्य में संचालित सभी नर्सिंग संस्थानों की मान्यता, suitability, भवन और शैक्षणिक सुविधाओं की स्थिति को लेकर पारदर्शी जानकारी सामने आना जरूरी हो गया है।

छात्रों को राहत के लिए स्थिति स्पष्ट करना जरूरी..

इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल उन विद्यार्थियों का है, जिन्होंने इन कॉलेजों में प्रवेश लिया है। विद्यार्थियों और अभिभावकों को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि संबंधित कॉलेज में कौन सा पाठ्यक्रम प्रभावित है, कार्रवाई किस शैक्षणिक सत्र के लिए लागू है और वर्तमान विद्यार्थियों के पंजीयन तथा परीक्षा की स्थिति क्या होगी।साथ ही संबंधित विभाग और राज्य नर्सिंग काउंसिल को भी प्रभावित विद्यार्थियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की जरूरत है, ताकि मान्यता संबंधी विवाद का खामियाजा विद्यार्थियों को न भुगतना पड़े।

अब निगाहें राज्य सरकार और नर्सिंग काउंसिल पर..

INC की कार्रवाई ने प्रदेश की नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि किसी संस्थान ने वास्तव में भवन, फैकल्टी, लैब या अन्य जरूरी मानकों का पालन नहीं किया है तो कार्रवाई जरूरी है, लेकिन साथ ही विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

अब जरूरत इस बात की है कि राज्य स्तर पर सभी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता, suitability, भवन, फैकल्टी, लैब और अस्पताल संबद्धता की स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जाए। इससे विद्यार्थियों को प्रवेश लेने से पहले सही जानकारी मिल सकेगी और नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों पर समय रहते कार्रवाई भी संभव होगी।

INC की आधिकारिक सूची में मान्यता वापस लिए गए संस्थानों के संबंध में राज्य-सीमित पंजीयन का प्रावधान स्पष्ट रूप से दर्ज है। इसलिए 42 संस्थानों के मामले में संबंधित कॉलेज और पाठ्यक्रम की स्थिति की आधिकारिक सूची से पुष्टि करना सबसे महत्वपूर्ण होगा।