
मंत्री केदार कश्यप की पत्नी से जुड़ी कंपनी को कचना की जमीन के बदले सड्डू में 23,327 वर्गफीट प्लॉट देने का आरोप; डॉ. राकेश गुप्ता ने मुख्य सचिव से जांच की मांग की, RDA ने कहा- 10 अक्टूबर तक दावे-आपत्तियां आमंत्रित..

रायपुर। राजधानी रायपुर की लाभांडी-कचना-सड्डू नगर विकास योजना में भूखंडों के पुनर्गठन और प्रस्तावित आवंटन को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस चिकित्सा विभाग के संयोजक डॉ. राकेश गुप्ता ने आरोप लगाया है कि वन मंत्री केदार कश्यप की पत्नी से जुड़ी राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड को कचना स्थित जमीन के बदले सड्डू में करीब 23 हजार वर्ग फीट का ऐसा भूखंड प्रस्तावित किया गया है, जिसकी भविष्य में कीमत करीब 20 करोड़ रुपये तक होने का अनुमान है।
डॉ. गुप्ता ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए पूरे मामले में अनियमितता की आशंका जताई है और छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव से शिकायत कर नगर विकास योजना की प्रक्रिया की जांच कराने तथा योजना को निरस्त करने की मांग की है। दूसरी ओर, रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने आरोपों पर सफाई देते हुए स्पष्ट किया है कि अंतिम भूखंड आवंटन अभी प्रस्तावित है। संबंधित भू-स्वामियों से 30 दिन के भीतर दावे और आपत्तियां मांगी गई हैं, जिनकी अंतिम तिथि 10 अक्टूबर 2026 है।
23,327 वर्ग फीट के प्रस्तावित प्लॉट पर विवाद..
डॉ. गुप्ता के मुताबिक, राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड को सड्डू में प्रस्तावित प्लॉट नंबर 25 दिया जा रहा है। इसका क्षेत्रफल करीब 2,168 वर्गमीटर यानी 23,327 वर्गफीट बताया गया है। शिकायत में दावा किया गया है कि यह भूखंड प्रस्तावित 150 फीट चौड़ी MR-43 सड़क के आसपास स्थित है।

डॉ. गुप्ता ने भविष्य में सड़क बनने के बाद क्षेत्र में जमीन की कीमत करीब 10 हजार रुपये प्रति वर्गफीट तक पहुंचने का अनुमान लगाया है। इसी आधार पर उन्होंने प्रस्तावित भूखंड की संभावित कीमत करीब 20 करोड़ रुपये बताई है। हालांकि, यह कीमत उनका अनुमान है और RDA की ओर से इस भूखंड का 20 करोड़ रुपये का कोई आधिकारिक मूल्यांकन बताए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।
कचना की जमीन के बदले सड्डू में भूखंड देने पर सवाल..
शिकायत का मुख्य आधार कचना और सड्डू के बीच प्रस्तावित भूखंड की स्थिति को लेकर है। डॉ. गुप्ता का दावा है कि राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड की मूल जमीन कचना क्षेत्र में है, जबकि उसके बदले प्रस्तावित भूखंड सड्डू में करीब एक किलोमीटर दूर दिया जा रहा है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 50 के प्रावधानों का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि पुनर्गठन के बाद भू-स्वामी को अंतिम भूखंड किस स्थान पर दिया जाना चाहिए और क्या मूल जमीन से अलग क्षेत्र में भूखंड देने की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप है। हालांकि, इस कानूनी प्रावधान की अंतिम व्याख्या और प्रस्तावित आवंटन की वैधता का निर्धारण संबंधित प्राधिकरण की जांच और आगे की वैधानिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगा।
मंत्री जी की पत्नी की कंपनी का भी जिक्र..
डॉ. गुप्ता ने अपनी शिकायत में राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड का उल्लेख करते हुए दावा किया है कि कंपनी में मंत्री केदार कश्यप की पत्नी निदेशक हैं। शिकायतकर्ता ने इसके लिए 2023 के चुनावी शपथपत्र का भी हवाला दिया है। इसी कंपनी की कचना स्थित जमीन को नगर विकास योजना में शामिल किए जाने और उसके बदले सड्डू में प्रस्तावित भूखंड दिए जाने को लेकर डॉ. गुप्ता ने सवाल उठाए हैं।
दूसरे भू-स्वामियों के आवंटन पर भी उठाए सवाल..
मामला केवल एक प्रस्तावित भूखंड तक सीमित नहीं है। शिकायतकर्ता ने नगर विकास योजना में अन्य भू-स्वामियों को प्रस्तावित भूखंडों के स्थान को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
डॉ. गुप्ता का आरोप है कि प्रमुख सड़क के आसपास स्थित जमीन के कुछ भू-स्वामियों को अपेक्षाकृत अंदरूनी क्षेत्रों में भूखंड दिए गए हैं, जबकि प्रभावशाली लोगों से जुड़े भू-स्वामियों को बेहतर लोकेशन वाले भूखंड मिलने की बात कही जा रही है। उन्होंने पूरी योजना में भूखंडों के पुनर्गठन, मूल जमीन और अंतिम भूखंड के स्थान तथा अपनाए गए मानकों की जांच की मांग की है।
RDA ने कहा – अभी सिर्फ प्रस्ताव, अंतिम फैसला बाकी..
विवाद बढ़ने के बाद RDA ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि लाभांडी-कचना-सड्डू नगर विकास योजना में दर्शाए गए अंतिम भूखंड अभी प्रस्तावित हैं। छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 50 (3) के तहत संबंधित पक्षों से दावा और आपत्ति आमंत्रित की गई है।

RDA के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 तक दावे-आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। इसके बाद संबंधित प्रक्रिया के तहत इनका परीक्षण किया जाएगा और आगे निर्णय लिया जाएगा।
प्राधिकरण का कहना है कि योजना तैयार करते समय भू-स्वामियों के हितों के साथ सड़क, हरित क्षेत्र, सामाजिक अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखा गया है। RDA ने यह भी कहा है कि योजना के तहत किसी भू-स्वामी को भूमिहीन नहीं किया गया है और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अंतिम भूखंडों का प्रावधान किया गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा –

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मामले को लेकर सरकार और मंत्री केदार कश्यप पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रस्तावित भूखंड को लेकर जवाबदेही तय करने और मामले की जांच की मांग करते हुए मंत्री के इस्तीफे की बात कही।
आरोपों पर मंत्री का पक्ष सामने नहीं आया..
मामले में लगाए गए आरोपों को लेकर मंत्री केदार कश्यप से भी पक्ष लेने का प्रयास किया गया। खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई थी। ऐसे में प्रस्तावित भूखंड, कंपनी की भूमि और पुनर्गठन की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अब नजर 10 अक्टूबर की दावा-आपत्ति प्रक्रिया पर..
फिलहाल पूरे विवाद का केंद्र यह है कि क्या कचना की मूल जमीन के बदले सड्डू में प्रस्तावित 23,327 वर्गफीट भूखंड नियमों के अनुरूप है और क्या अलग-अलग भू-स्वामियों को भूखंड देने में समान मानदंड अपनाए गए हैं?

RDA की दावा-आपत्ति प्रक्रिया इस विवाद में महत्वपूर्ण होगी। यदि शिकायतकर्ता या अन्य प्रभावित भू-स्वामी आपत्ति दर्ज कराते हैं तो उनके दावों का परीक्षण संबंधित प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। इसके बाद ही प्रस्तावित भूखंडों के अंतिम स्वरूप और आवंटन की स्थिति स्पष्ट होगी।
डिस्क्लेमर : यह खबर शिकायतकर्ता डॉ. राकेश गुप्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और RDA के आधिकारिक स्पष्टीकरण पर आधारित है। प्रस्तावित भूखंड का आवंटन अभी अंतिम नही हुआ है और 10 अक्टूबर 2026 तक दावा-आपत्ति की प्रक्रिया जारी है। जमीन की कीमत, नियमों के उल्लंघन और कथित अनियमितताओं से जुड़े दावों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच एवं वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।







