रायपुर। प्रदेश के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) द्वारा बनाई गई योजना खटाई में पड़ गई है। इसके तहत जिला अस्पताल और सीएचसी के विशेषज्ञ डॉक्टरों को बिना पीएससी परीक्षा और इंटरव्यू के मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी बनाने की तैयारी थी। देशभर के मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी दूर करने के लिए यह कवायद शुरू की गई थी, जिसका फिलहाल कुछ पता नहीं है।

योजना के अनुसार, 220 से अधिक बिस्तर वाले सरकारी अस्पतालों को टीचिंग अस्पताल माना जाना था। इन अस्पतालों में पदस्थ एमडी-एमएस या डीएनबी डिग्रीधारी विशेषज्ञ डॉक्टरों को छात्रों को पढ़ाने का अवसर दिया जाना था। नियम के तहत 10 साल का अनुभव रखने वाले डॉक्टर एसोसिएट प्रोफेसर और 2 साल के अनुभव वाले विशेषज्ञ असिस्टेंट प्रोफेसर बनाए जाते।
प्रमोशन वाले पदों पर भर्ती से विवाद..
इस नई कवायद के तहत प्रमोशन के पदों पर नियुक्ति का विरोध भी हो रहा था। असल में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर प्रमोशन के पद माने जाते हैं। नियमानुसार 5 साल बाद असिस्टेंट प्रोफेसर को एसोसिएट तथा 3 साल एसोसिएट रहने के बाद प्रोफेसर बनाया जाता है। प्रदेश में समय पर प्रमोशन नहीं होने के कारण डॉक्टरों में पहले से नाराजगी है। ऐसे में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति से विवाद की स्थिति निर्मित हुई, जबकि असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति में ऐसा कोई विवाद नहीं था। रिटायर्ड डीएमई के अनुसार, फैकल्टी बनाने की योजना अच्छी थी लेकिन इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए था कि प्रमोशन के पद प्रभावित न हों।
1290 से ज्यादा पद खाली..
वर्तमान में प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में कुल पदों में से 48 फीसदी यानी 1290 से ज्यादा पद खाली हैं। हाल ही में 5 नए सरकारी कॉलेज खुलने से खाली पदों की संख्या और बढ़ गई है। कॉलेजों में स्वीकृत और रिक्त पदों की स्थिति इस प्रकार है :
प्रोफेसर के 241 पदों में 117 रिक्त हैं (48.5 प्रतिशत खाली)।
एसोसिएट प्रोफेसर के 399 पदों में 196 पद खाली हैं (49.1 प्रतिशत खाली)।
असिस्टेंट प्रोफेसर के 644 स्वीकृत पदों में से 332 पद रिक्त पड़े हैं (51.6 प्रतिशत खाली)।
सीनियर रेसीडेंट के 518 में से 375, जूनियर रेसीडेंट के 502 में से 209 तथा डेमोंस्ट्रेटर के 302 में से 51 पद खाली हैं।
वर्तमान भर्ती प्रक्रिया..
प्रदेश में अभी नियमित मेडिकल टीचर की नियुक्ति पीएससी के माध्यम से की जाती है। डॉक्टरों की कमी के चलते नियमित फैकल्टी के लिए सीजीपीएससी केवल इंटरव्यू के जरिए असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती करता है, इसमें लिखित परीक्षा नहीं होती। सभी डॉक्टरों के पास मान्यता प्राप्त विवि से डिग्री होती है।
इसके अलावा संविदा डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए कॉलेजों में वॉक-इन-इंटरव्यू डीन के माध्यम से होता है। राज्य शासन ने नए 5 कॉलेजों में संविदा डॉक्टरों की नियुक्ति इसी प्रकार की है।प्रशासनिक स्तर पर पिछले माह रायपुर से 18 एसोसिएट प्रोफेसरों का तबादला भी किया गया, जिनमें से दो को अभी रिलीव नहीं किया गया है।






