हर पौधा बने भविष्य की उम्मीद, वनमंडल बिलासपुर ने जगाई पर्यावरण चेतना..वन महोत्सव-2026 में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और नागरिकों ने लिया हरित एवं समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प..

हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प : उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा – ‘पौधे लगाना ही नहीं, उन्हें बचाना भी हमारी जिम्मेदारी’..
बिलासपुर, 29 जुलाई 2026। वन महोत्सव-2026 के तहत पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय परिसर बुधवार को हरियाली, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का सशक्त संदेश देने वाला केंद्र बना। वनमंडल बिलासपुर द्वारा आयोजित वृक्षारोपण एवं जनजागरूकता कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर पौधारोपण किया और प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने के साथ-साथ उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।

अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना भी प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वन हमारी प्राकृतिक धरोहर होने के साथ-साथ जल, जलवायु, जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार हैं। यदि समाज का हर व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो हरित और समृद्ध छत्तीसगढ़ का सपना जल्द साकार हो सकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वन संरक्षण, जल संरक्षण और जैव विविधता के संवर्धन के लिए लगातार कार्य कर रही है। इन प्रयासों को जनसहभागिता के माध्यम से और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी जिम्मेदारी न मानकर सामाजिक अभियान बनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और प्रकृति वंदना से हुई। इसके बाद उपमुख्यमंत्री सहित सभी अतिथियों ने विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। पूरे परिसर में विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक पौधारोपण कर हरियाली बढ़ाने का संकल्प लिया।
वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) नीरज ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि वन महोत्सव केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि पौधारोपण तभी सफल होगा, जब प्रत्येक व्यक्ति लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल की जिम्मेदारी भी निभाए। उन्होंने नागरिकों से वन विभाग के संरक्षण अभियानों में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
मुख्य वन संरक्षक मनोज पांडे ने कहा कि तेजी से बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य में जैव विविधता का संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से वृक्षारोपण, वन संरक्षण और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बनाए रखना आज की सबसे बड़ी चुनौती है।

विश्वविद्यालय के कुलपति वी.के. सारस्वत ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूक और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से हर वर्ष कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक ने कहा कि वृक्षारोपण को केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन का स्वरूप देना होगा। उन्होंने कहा कि यदि हर परिवार एक पौधा अपनाकर उसकी देखभाल करे तो आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र का पर्यावरण बेहतर हो सकता है। वहीं मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया ने भी पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी को सबसे प्रभावी माध्यम बताया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, महापौर पूजा विधानी, कलेक्टर संजय अग्रवाल, मुख्य वन संरक्षक मनोज पांडे, कुलपति वी.के. सारस्वत, वनमंडलाधिकारी नीरज सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, शिक्षक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली और यह संकल्प दोहराया कि वे अधिक से अधिक वृक्ष लगाएंगे, उनके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएंगे तथा समाज में प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य करेंगे। वन महोत्सव के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि हरित भविष्य का निर्माण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है।







