डीपीआई के 5 पत्र भी रद्दी की टोकरी में : 34 शिक्षक अब भी बने हैं ‘बाबू’, प्रभारी डीईओ को चहेतों के नाम तक नहीं पता..

बिलासपुर।जिले के शिक्षा विभाग में अटैचमेंट का खेल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। शिक्षकों को स्कूलों में पढ़ाने के बजाय कलेक्टोरेट और डीईओ दफ्तरों में बाबूगिरी रास आ रही है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के पांच पत्रों के बाद भी 34 शिक्षक और कर्मचारी विभिन्न विभागों में मजे से अटैच हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि अटैचमेंट खत्म करने की जिम्मेदारी जिस प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) अजय कौशिक पर है, उन्हें इन 34 शिक्षकों के नाम तक नहीं पता हैं।

अधिकारियों का गोलमोल जवाब..

प्रभारी डीईओ ने खुद माना है कि 34 लोग अब भी अटैच हैं, लेकिन जब नाम पूछे गए तो वे बगलें झांकने लगे। उनका जवाब था कि उन्हें नामों की जानकारी नहीं है, अभी केवल संख्यात्मक जानकारी मंगाई गई है। उनका यह भी तर्क है कि ये सभी केवल उनके कार्यालय के नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग ब्लॉकों में भी बैठे हैं। अब तक किश्तों में केवल 53 शिक्षक-कर्मचारियों को ही रिलीव किया गया है। 15 को पहले हटाया गया और प्रभार लेने के बाद कौशिक ने 38 को रिलीव किया, लेकिन शेष 34 को बचाने के लिए विभाग में पूरी ताकत झोंक दी गई है।

स्कूल खाली, दफ्तरों में शिक्षकों की भीड़..

जिले के कई स्कूल ऐसे हैं जहां शिक्षकों की कमी बनी हुई है। वहीं मस्तूरी, बिल्हा सहित अन्य ब्लॉकों के दर्जनों शिक्षकों को उनकी मूल शालाओं से हटाकर डीईओ कार्यालय, तहसील दफ्तर, जिला निर्वाचन शाखा और विधायकों के निज सहायक कार्यालयों में अटैच कर दिया गया है। सुशासन तिहार जैसे आयोजनों में भी इन्हीं शिक्षकों से डेटा एंट्री और गैर-शैक्षणिक काम कराए गए। सख्त निर्देशों के बावजूद अफसरों पर इन कर्मचारियों को बचाने के आरोप लग रहे हैं।

डीपीआई के पत्रों को दिखाया ठेंगा..

अटैचमेंट खत्म करने के लिए डीपीआई लगातार निर्देश दे रहा है। 12 जून, 17 जून, 25 जून और 7 जुलाई को लगातार पत्र जारी किए गए। जब कोई असर नहीं दिखा तो 12 जुलाई को फिर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्राचार किया गया। बार-बार पत्रों और संचालनालय से फोन आने के बाद तत्कालीन सहायक संचालक वर्षा शर्मा ने केवल 15 कर्मचारियों को रिलीव किया था। इसके बाद डीईओ न होने का बहाना बनाकर फाइल रोक दी गई। नौ दिन बाद अजय कौशिक प्रभारी डीईओ बने, 38 लोगों को हटाया गया, पर उसके बाद कार्रवाई फिर ठंडे बस्ते में चली गई।

छात्रावासों के बहाने नया पैंतरा..

शिक्षा और आदिवासी विभाग के छात्रावासों के साथ-साथ विधायकों के दफ्तरों में जमे शिक्षकों को रिलीव न करने के लिए अफसरों तक तगड़ी एप्रोच लगाई जा रही है। विभागीय स्थिति यह है कि जिस डीपीआई ने अटैचमेंट खत्म करने के लिए लगातार पांच पत्र भेजे, उसी संचालनालय को प्रभारी डीईओ अजय कौशिक ने उल्टा एक पत्र लिख दिया है। इसमें हवाला दिया गया है कि छात्रावासों में अटैच कर्मचारियों को तत्काल रिलीव करने में दिक्कतें आ रही हैं। कुल मिलाकर आदेशों को दरकिनार कर मूल पदस्थापना पर न जाने का यह पूरा खेल बदस्तूर जारी है।