नई पीढ़ी को आपातकाल का सच जानना जरूरी, लोकतंत्र की रक्षा के लिए जागरूकता आवश्यक..

बिलासपुर। देश में लगाए गए आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया। भाजपा नेताओं ने कहा कि 25 जून 1975 को सत्ता बचाने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं, संविधान और नागरिक स्वतंत्रताओं को कमजोर किया गया था। पार्टी ने कहा कि आपातकाल की घटनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है, ताकि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के प्रति समाज जागरूक रह सके।
बिलासपुर में भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सलाह पर देश में आपातकाल लागू किया गया था। उन्होंने कहा कि इसके बाद लगभग 21 महीनों तक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर व्यापक असर पड़ा, चुनाव स्थगित हुए और नागरिक अधिकारों पर कई प्रकार के प्रतिबंध लगाए गए।
लोकतंत्र की आवाज को दबाने का आरोप..
प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने आरोप लगाया कि उस दौर में सरकार के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति को स्थान मिलना चाहिए, लेकिन आपातकाल के दौरान विरोध को अपराध की तरह देखा गया।उन्होंने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने भी आपातकाल का विरोध करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया था। भाजपा नेताओं का दावा है कि उस समय सत्ता के विरुद्ध उठ रही जनभावनाओं को दबाने के लिए कठोर कदम उठाए गए।
हजारों नेताओं और कार्यकर्ताओं की हुई गिरफ्तारी..
पत्रकार वार्ता में भाजपा नेताओं ने कहा कि आपातकाल के दौरान अनेक राजनीतिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल भेजा गया। भाजपा ने दावा किया कि उस दौर में अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नांडिस, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान और शरद यादव सहित हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया था। भाजपा नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले अनेक कार्यकर्ताओं ने जेलों में कठिन परिस्थितियों का सामना किया और उनका योगदान लोकतांत्रिक इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मीडिया पर सेंसरशिप का मुद्दा उठाया..

प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि आपातकाल के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रतिबंध लगाए गए। समाचार पत्रों और मीडिया संस्थानों पर सेंसरशिप लागू की गई तथा प्रकाशित होने वाली सामग्री पर सरकारी नियंत्रण बढ़ा दिया गया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र पत्रकारिता पर दबाव लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय था। भाजपा नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और आपातकाल के दौरान इस व्यवस्था को प्रभावित किया गया था।
भाजपा ग्रामीण ने भी की प्रेस वार्ता..
इधर भाजपा बिलासपुर ग्रामीण इकाई द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने कहा कि आपातकाल केवल राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की परीक्षा का दौर था। उन्होंने कहा कि उस समय विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेलों में बंद किया गया और लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित किया गया।

मुकेश शर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से आपातकाल से जुड़े तथ्यों और घटनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है ताकि लोकतंत्र के महत्व को समझा जा सके।
लोकतंत्र की रक्षा का संदेश..
भाजपा नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और संवर्धन के लिए समाज को जागरूक रहना होगा।
आपातकाल : एक नजर में..
25 जून 1975 को देश में राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया गया।
यह अवधि 21 मार्च 1977 तक चली।
इस दौरान कई मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए।
विपक्षी नेताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां हुईं।
मीडिया पर सेंसरशिप लागू की गई।
आपातकाल समाप्त होने के बाद हुए आम चुनाव में सत्ता परिवर्तन हुआ।
प्रेस वार्ता में रहे प्रमुख नेता..
भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में प्रेमप्रकाश पाण्डेय, दीपक सिंह, सोमेश तिवारी, गुलशन ऋषि, अजीत सिंह भोगल, के.के. शर्मा और दुर्गेश पाण्डेय मौजूद रहे। वहीं भाजपा ग्रामीण की प्रेस वार्ता में मुकेश शर्मा, डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी, राजा पाण्डेय, जनक देवांगन, प्रणव शर्मा, पवन कश्यप, मोनू रत्नाकर श्रीवास, शैलू गोरख और कमल पटेल सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे।
भाजपा नेताओं का कहना है कि आपातकाल का इतिहास लोकतंत्र की रक्षा के प्रति समाज को सजग रहने की सीख देता है और आने वाली पीढ़ियों को इस दौर की जानकारी मिलनी चाहिए।







