हिंद एनर्जी कोल वाशरी विस्तार के खिलाफ फूटा जनाक्रोश : पहले प्रदूषण से राहत दो, फिर विस्तार की बात करो – जनसुनवाई में ग्रामीणों का तीखा विरोध, उग्र आंदोलन की चेतावनी..

ग्रामीणों का दावा – तीन साल पहले प्लांट हटाने का निर्देश मिला था, फिर भी अब क्षमता विस्तार की तैयारी..

बिलासपुर। मस्तूरी क्षेत्र के ग्राम कर्रा में प्रस्तावित हिंद एनर्जी एंड कोल बेनिफिकेशन लिमिटेड की कोल वाशरी विस्तार परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध अब बड़े जनआंदोलन का रूप लेने लगा है। जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों, किसानों, महिलाओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में कंपनी के क्षमता विस्तार का विरोध करते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की। लोगों का कहना है कि क्षेत्र पहले से ही प्रदूषण, जल संकट और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहा है, ऐसे में कोल वाशरी का विस्तार पूरे इलाके के लिए गंभीर खतरा साबित होगा।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जनसुनवाई की प्रक्रिया भी पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही। प्रभावित गांवों तक समय पर सूचना नहीं पहुंचाई गई, जिससे बड़ी संख्या में लोग प्रक्रिया से अनभिज्ञ रहे। इसी वजह से लोगों ने इसे ‘गुपचुप जनसुनवाई’ बताते हुए सवाल उठाए हैं।

तीन साल पहले हटाने का निर्देश, अब विस्तार की तैयारी!

ग्रामीणों और पर्यावरण से जुड़े लोगों का दावा है कि लगभग तीन वर्ष पूर्व केंद्रीय पर्यावरण विभाग द्वारा हिंद एनर्जी को इस क्षेत्र से कोल वाशरी हटाने अथवा पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करने संबंधी पत्र जारी किया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि उस निर्देश पर अमल करने के बजाय कंपनी अब अपनी क्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

लोगों का कहना है कि यदि प्लांट को लेकर पहले से पर्यावरणीय आपत्तियां और शिकायतें मौजूद थीं तो उन समस्याओं का समाधान किए बिना विस्तार प्रस्ताव कैसे लाया जा सकता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पुराने निर्देशों और शिकायतों की समीक्षा किए बिना किसी भी प्रकार की नई पर्यावरणीय स्वीकृति न दी जाए।

कोयले की धूल से घुट रही सांसें..

कर्रा, गतौरा, फरहदा, खैरा, लगरा और आसपास के गांवों के निवासियों का आरोप है कि मौजूदा कोल वाशरी से निकलने वाली कोयले की महीन धूल ने जीवन को प्रभावित कर दिया है। घरों, खेतों, पेड़-पौधों और जल स्रोतों पर लगातार काली परत जम रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह सफाई करने के बाद कुछ ही घंटों में फिर से धूल जमा हो जाती है। कई परिवारों का आरोप है कि प्रदूषण के कारण बच्चों और बुजुर्गों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ी हैं।

स्वास्थ्य और पर्यावरण पर बढ़ता खतरा..

स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में सांस संबंधी बीमारियां, एलर्जी, आंखों में जलन और लगातार खांसी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रदूषण का सबसे अधिक असर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। इसके अलावा कोयला धुलाई से निकलने वाले अपशिष्ट और दूषित पानी को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई है। ग्रामीणों का आरोप है कि इससे आसपास के जल स्रोतों और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

भू-जल दोहन और दूषित पानी पर चिंता..

जनसुनवाई में ग्रामीणों ने कंपनी पर बड़े पैमाने पर भूजल दोहन का आरोप लगाया। उनका कहना है कि लगातार पानी निकाले जाने से आसपास के क्षेत्रों में जलस्तर प्रभावित हो रहा है। साथ ही कोयला धुलाई के बाद निकलने वाले दूषित पानी से जल स्रोतों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई गई। कई क्षेत्रों में हैंडपंप और बोरवेल के जलस्तर में गिरावट की शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों ने मांग की कि क्षेत्र के जल स्रोतों और भू-जल की स्थिति की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

खेती पर पड़ रहा असर..

किसानों ने बताया कि खेतों में कोयले की धूल जमने से फसलों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। धान और सब्जियों की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि उत्पादन पर असर पड़ रहा है और आर्थिक नुकसान बढ़ रहा है। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि उत्पादन क्षमता बढ़ाई गई तो प्रदूषण का दायरा और बढ़ेगा, जिसका सीधा असर कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

जे.के. कॉलेज और आसपास के क्षेत्र भी प्रभावित..

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कोयले की धूल का असर आसपास के शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंच रहा है। जे.के. कॉलेज के छात्रों और अभिभावकों ने भी प्रदूषण को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पढ़ाई के माहौल पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

स्वतंत्र जांच की मांग..

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कोल वाशरी विस्तार से पहले मौजूदा प्रदूषण, स्वास्थ्य प्रभाव, भू-जल स्थिति, कृषि नुकसान और पर्यावरणीय प्रभावों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि पूर्व में जारी पर्यावरणीय निर्देशों और शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई।

विस्तार नहीं, समाधान चाहिए..

जनसुनवाई में ग्रामीणों का स्पष्ट संदेश था कि क्षेत्र की मौजूदा समस्याओं का समाधान किए बिना किसी भी प्रकार का विस्तार स्वीकार नहीं किया जाएगा। लोगों ने कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास स्वीकार नहीं किया जा सकता जो गांवों की हवा, पानी, खेती और लोगों के स्वास्थ्य की कीमत पर हो।

बाइट – बी.पी. सिंह प्रदेश प्रवक्ता बीजेपी किसान मोर्चा

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज कर कोल वाशरी विस्तार को मंजूरी दी गई तो क्षेत्र में व्यापक और उग्र जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासन और पर्यावरण विभाग के अगले फैसले पर टिकी हैं।