छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला : पत्नी अब किसी भी जिले में ले सकेगी भरण-पोषण, अधिकार क्षेत्र को लेकर पतियों को राहत नहीं..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भरण-पोषण (मेंटेनेंस) से जुड़े मामलों में एक बड़ी कानूनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने साफ कर दिया है कि पत्नी वर्तमान में जिस जिले में रह रही है, वह वहीं की फैमिली कोर्ट में अपने और बच्चों के भरण-पोषण का दावा पेश कर सकती है। सिर्फ इस आधार पर कोर्ट का क्षेत्राधिकार चुनौती नहीं दी जा सकती कि पत्नी का स्थायी पता या विवाह का स्थान अलग जिला है।

न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ के एक डॉक्टर द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी है। मामला डॉक्टर की पत्नी और दो नाबालिग बेटियों द्वारा बिलासपुर फैमिली कोर्ट में दायर भरण-पोषण याचिका से जुड़ा था।

क्या है पूरा मामला..

डॉक्टर और महिला की शादी 16 मई 2019 को हुई थी। महिला ने आरोप लगाया कि शादी के बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और पति के अपनी भाभी से अवैध संबंध हैं। इस मामले में पत्नी ने दिसंबर 2022 में सारंगढ़ थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी। इसके बाद पत्नी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 के तहत बिलासपुर फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण की अर्जी लगाई।

डॉक्टर ने कोर्ट में उठाए थे सवाल..

डॉक्टर ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उसकी पत्नी मूल रूप से सारंगढ़ की रहने वाली है और शादी भी वहीं हुई थी। ऐसे में बिलासपुर फैमिली कोर्ट को सुनवाई का अधिकार नहीं है। डॉक्टर ने तर्क दिया कि वह खुद शारीरिक रूप से अक्षम (पोलियो से पीड़ित) है और पत्नी उसे परेशान करने के लिए जानबूझकर बिलासपुर में केस चला रही है।

पत्नी के पक्ष में आए दस्तावेज..

सुनवाई के दौरान पत्नी ने कोर्ट को बताया कि वह वर्तमान में बिलासपुर के लगरा क्षेत्र में किराए के मकान में रह रही है। इसके समर्थन में उसने पते के वैध दस्तावेज भी कोर्ट में पेश किए। पत्नी ने स्पष्ट किया कि उसने कोई भी फर्जी दस्तावेज नहीं लगाए हैं।

हाईकोर्ट ने क्या कहा..

हाईकोर्ट ने साक्ष्यों को देखते हुए कहा कि यदि महिला वर्तमान में बिलासपुर में निवासरत है और उसके पास इसके पुख्ता प्रमाण हैं, तो उसे कानूनी रूप से अपना दावा वहीं पेश करने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने डॉक्टर की आपत्तियों को खारिज करते हुए बिलासपुर फैमिली कोर्ट की कार्यवाही को पूरी तरह वैध माना। इस निर्णय से अब उन पतियों को बड़ा झटका लगा है जो अक्सर केस के स्थान को आधार बनाकर कोर्ट की कार्यवाही को लंबा खींचते थे।