जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : 20 साल बाद अमित जोगी दोषी करार 3 हफ्ते में सरेंडर का आदेश..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में बिलासपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की स्पेशल डिवीजन बेंच ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उन्हें तीन हफ्ते के अंदर पुलिस के सामने सरेंडर करने का सख्त आदेश दिया है। इस फैसले के बाद अमित जोगी पर कानूनी दबाव काफी बढ़ गया है।

इससे पहले निचली अदालत ने साल 2007 में सबूतों की कमी बताकर अमित जोगी को बाइज्जत बरी कर दिया था। राम अवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। उन्होंने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही यह मामला बिलासपुर हाईकोर्ट में दोबारा खोला गया और अंतिम सुनवाई तय की गई।

इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी और कोर्ट में 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की थी। बुधवार को अंतिम सुनवाई में सतीश जग्गी सीबीआई राज्य सरकार और अमित जोगी के वकील मौजूद थे। अमित जोगी के वकील ने फाइल पढ़ने के लिए समय मांगा था। लेकिन हाईकोर्ट ने समय देने से साफ इनकार कर दिया और सीबीआई को तुरंत फाइल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

सतीश जग्गी के वकील बीपी शर्मा ने दलील दी कि यह हत्या तत्कालीन राज्य सरकार की साजिश थी। उनका आरोप था कि सीबीआई जांच शुरू होने से पहले ही प्रभाव का इस्तेमाल कर अहम सबूत मिटा दिए गए थे। इसलिए इस केस में सबूतों के साथ षड्यंत्र का पर्दाफाश होना जरूरी है।

रामावतार जग्गी कारोबारी थे और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। शुक्ल के साथ वह भी एनसीपी में चले गए थे जहां उन्हें प्रदेश कोषाध्यक्ष बनाया गया था। 4 जून 2003 को जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना से पूरे प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया था।

पुलिस जांच पर सवाल उठने के बाद केस सीबीआई को सौंपा गया।सीबीआई ने 31 लोगों को आरोपी बनाया जिनमें से दो सरकारी गवाह बन गए। बाकी 28 लोगों को कोर्ट ने पहले ही उम्रकैद की सजा सुना दी थी। इनमें पुलिस विभाग के दो तत्कालीन सीएसपी और एक थाना प्रभारी शामिल हैं। इनके अलावा रायपुर मेयर एजाज ढेबर के भाई याहया ढेबर और शूटर चिमन सिंह को भी सजा हुई है।

हाईकोर्ट ने दो साल पहले भी इन 28 दोषियों की अपील खारिज कर दी थी। अब 20 साल बाद अमित जोगी को भी दोषी ठहराए जाने से सीबीआई की जांच सही साबित हुई है। कानूनी हलकों में अब सबकी नजर इस बात पर है कि अमित जोगी तीन हफ्ते में सरेंडर करते हैं या आगे कोई कानूनी विकल्प अपनाते हैं।

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बाईट- सतीश जग्गी,रामावतार जग्गी के पुत्र