वन्यजीव अपराध पर शिकंजा कसने मैदानी अमले को कानून का प्रशिक्षण..

मौके की कार्रवाई से लेकर कोर्ट में मजबूत प्रकरण पेश करने तक की बारीकियां समझी, वाइल्ड लाइफ एक्ट के प्रावधानों की दी जानकारी..

बिलासपुर, 26 सितंबर 2026। वन्यजीव अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के साथ अब वन विभाग ने ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया को भी मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी उद्देश्य से शनिवार को वन चेतना केंद्र, बिलासपुर में वन विभाग के अधिकारियों और मैदानी अमले के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें वन्यजीव अपराध की पहचान से लेकर साक्ष्य जुटाने, दस्तावेज तैयार करने और न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत करने तक की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम मुख्य वन संरक्षक, बिलासपुर वृत्त मनोज पाण्डेय एवं वन्यजीव मुख्य वन संरक्षक प्रियंका पाण्डेय के मार्गदर्शन में तथा वनमंडलाधिकारी, कटघोरा जितेन्द्र उपाध्याय की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। इसमें बिलासपुर वृत्त के समस्त वनमंडलाधिकारी, सहायक वन संरक्षक, वन क्षेत्रपाल सहित मैदानी वन अमले ने भाग लिया।

कार्रवाई ऐसी हो, जो कोर्ट में भी मजबूत रहे..

प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू वन्यजीव अपराध के मामलों में कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्य संकलन रहा। अधिकारियों और कर्मचारियों को बताया गया कि किसी अपराध के सामने आने पर केवल आरोपी तक पहुंचना या वन्यजीव अथवा सामग्री की जब्ती करना ही पर्याप्त नहीं है। मौके से जुटाए गए साक्ष्यों का सही तरीके से संरक्षण, दस्तावेजीकरण और नियमानुसार प्रकरण तैयार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

मैदानी अमले को मौके की कार्रवाई, जब्ती, पंचनामा, साक्ष्य सुरक्षित रखने, दस्तावेज तैयार करने तथा प्रकरण को न्यायालयीन स्तर तक ले जाने में बरती जाने वाली सावधानियों की व्यावहारिक जानकारी दी गई। उद्देश्य यह रहा कि वन्यजीव अपराध के मामलों में कार्रवाई के दौरान कानूनी प्रक्रिया की किसी कमी के कारण प्रकरण कमजोर न पड़े।

अधिवक्ताओं ने समझाए कानूनी पहलू..

प्रशिक्षण के दौरान अधिवक्ता यश कुमार सोनी एवं राजेन मिश्रा ने वन्यजीव अपराधों से संबंधित कानूनी प्रावधानों और न्यायालयीन प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकरण में साक्ष्य की विश्वसनीयता, दस्तावेजों की शुद्धता और निर्धारित प्रक्रिया का पालन महत्वपूर्ण होता है। अधिकारियों को प्रकरण तैयार करने और न्यायालयीन कार्रवाई से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी भी दी गई।

क्या कहता है वाइल्ड लाइफ एक्ट?

भारत में वन्यजीवों के संरक्षण और वन्यजीव अपराधों पर नियंत्रण के लिए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 प्रमुख कानून है। इसमें वन्यजीवों के शिकार पर रोक, संरक्षित प्रजातियों से संबंधित अपराधों पर कार्रवाई तथा वन्यजीवों और उनके अंगों के अवैध व्यापार को नियंत्रित करने के प्रावधान हैं।

अधिनियम की धारा 9 के तहत निर्धारित अपवादों को छोड़कर वन्यजीवों के शिकार पर प्रतिबंध है। धारा 39 में अपराध से संबंधित वन्यजीवों, उनके अंगों, मांस और ट्रॉफी आदि को सरकारी संपत्ति से संबंधित प्रावधानों के तहत रखा गया है। वहीं धारा 50 अधिकृत अधिकारियों को निर्धारित परिस्थितियों में तलाशी, जांच, जब्ती और गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई की शक्तियां देती है। अधिनियम की धारा 51 में उल्लंघन के लिए दंड का प्रावधान है।

गंभीर प्रकृति के कुछ वन्यजीव अपराधों, विशेषकर अनुसूची-I में शामिल वन्यजीवों से संबंधित अपराधों तथा संरक्षित क्षेत्रों में शिकार के मामलों में कानून में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है।

वन्यजीव अपराध रोकने में WCCB की भूमिका भी महत्वपूर्ण..

प्रशिक्षण में वन्यजीव अपराधों से निपटने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) वन्यजीव अपराधों से संबंधित सूचनाओं के संकलन, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय तथा वन्यजीव अपराधों से निपटने की क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मैदानी अमले को कानून की व्यावहारिक समझ देने पर जोर..

अधिकारियों को बताया गया कि वन्यजीव अपराध की जांच में शुरुआती स्तर पर की गई कार्रवाई आगे के पूरे प्रकरण की दिशा तय कर सकती है। इसलिए मौके से साक्ष्य जुटाने से लेकर उसे सुरक्षित रखने, आवश्यक दस्तावेज तैयार करने और न्यायालय में प्रस्तुत करने तक हर चरण में निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है।

इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण में मैदानी अमले को कानून की केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय उसके व्यावहारिक उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। इससे वन्यजीव अपराधों के मामलों में कार्रवाई करने वाले कर्मचारियों को मौके पर सही निर्णय लेने और प्रकरण को नियमानुसार आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

अपराध नियंत्रण के साथ आवास सुधार पर भी चर्चा..

प्रशिक्षण केवल वन्यजीव अपराध तक सीमित नहीं रहा। इसमें वन्यजीव आवास सुधार (Habitat Improvement) पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और बेहतर आवास उपलब्ध कराने, संरक्षण गतिविधियों को प्रभावी बनाने तथा मैदानी स्तर पर वन्यजीवों के अनुकूल परिस्थितियां विकसित करने की जरूरत बताई गई।

कार्रवाई से न्यायालय तक मजबूत होगी कड़ी..

वन विभाग के अनुसार प्रशिक्षण का उद्देश्य मैदानी अमले की कानूनी समझ, कार्य-कौशल और वन्यजीव अपराधों से निपटने की क्षमता को मजबूत करना है। विभाग का फोकस अब कार्रवाई के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने पर भी है कि अपराध से जुड़े मामलों में साक्ष्य और दस्तावेज नियमानुसार तैयार हों तथा प्रकरण न्यायालयीन प्रक्रिया में मजबूती से आगे बढ़ सके।

वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से यह प्रशिक्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए मैदानी निगरानी, त्वरित कार्रवाई, सही साक्ष्य संकलन और मजबूत कानूनी प्रक्रिया इन सभी कड़ियों का मजबूत होना जरूरी है।