

रायपुर । जाली नोटों का गोरखधंधा अब ज्यादा दिन नहीं चलेगा। बैंकिंग सुरक्षा को और अधिक अभेद्य बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। अब जाली करेंसी की पहचान केवल ऑटोमेटिक मशीनों के भरोसे नहीं रहेगी, बल्कि बैंक के काउंटर पर बैठने वाले फ्रंटलाइन कर्मचारी इतने स्मार्ट होंगे कि वे सिर्फ छूकर और देखकर ही संदिग्ध नोटों को तुरंत डिटेक्ट कर लेंगे।

इसी उद्देश्य से जगदलपुर के सहकारी केंद्रीय बैंक में ‘क्लीन नोट पॉलिसी’ के तहत एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण ट्रेनिंग प्रोग्राम में बस्तर संभाग के सभी सातों जिलों के ब्रांच मैनेजर्स और कैशियरों ने हिस्सा लिया।
नोट खुद बताएंगे अपनी सच्चाई..
ट्रेनिंग के दौरान कर्मचारियों को असली नोटों के उन खास सुरक्षा फीचर्स की बारीकियां सिखाई गईं, जिन्हें जालसाज आसानी से कॉपी नहीं कर सकते। कर्मचारियों को निम्नलिखित फीचर्स की पहचान करना सिखाया गया।
वॉटरमार्क (Watermark) : प्रकाश के सामने रखने पर उभरने वाली स्पष्ट छवि।
सिक्योरिटी थ्रेड (Security Thread) : नोट के बीच में मौजूद सुरक्षा धागा, जो असली नोट की प्रमुख पहचान है।
माइक्रो लेटरिंग (Micro Lettering) : नोट पर उकेरे गए बेहद छोटे अक्षर, जिन्हें सामान्य नजरों से पकड़ना मुश्किल होता है।
कलर चेंजिंग इंक (Color Changing Ink) : रोशनी के अलग-अलग एंगल से रंग बदलने वाली विशेष स्याही।
इन फीचर्स की सही जानकारी होने से बैंक कर्मी बिना किसी मशीन की मदद के ही काउंटर पर असली और नकली नोट का फर्क सेकंडों में बता सकेंगे।
अंदरूनी अंचलों में फेक करेंसी नेटवर्क पर लगेगी लगाम..
अक्सर बस्तर के अंदरूनी इलाकों में तकनीकी खामियों या मशीनों की अनुपलब्धता के कारण नकली नोट आसानी से बाजार में खपा दिए जाते हैं। इस ट्रेनिंग से ग्रामीण और सुदूर अंचलों में सक्रिय बैंकिंग धोखाधड़ी और फर्जी करेंसी के संगठित नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है।
क्लीन नोट पॉलिसी और काउंटर विजिलेंस पर फोकस..
आरबीआई के क्षेत्रीय कार्यालय के प्रबंधक मंगेश मेश्राम ने इस पहल पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बैंकों में क्लीन नोट पॉलिसी और काउंटर विजिलेंस पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि कर्मचारियों को यह भी समझाया गया है कि ज्यादा गंदे, कटे-फटे या पेन से लिखे हुए अनुपयोगी नोटों को ग्राहकों से कैसे हैंडल करना है। इन नोटों को किस तय प्रक्रिया के तहत करेंसी चेस्ट में जमा करना है और किन विशेष व जटिल परिस्थितियों में इन्हें सीधे आरबीआई हेड ऑफिस रिफंड के लिए भेजा जाना है, इसकी विस्तृत गाइडलाइन भी सभी बैंक कर्मियों को दी गई है।



