पदोन्नति से अनुकंपा नियुक्ति तक उठे सवाल, शिक्षा विभाग की फाइलों की जांच की मांग..

संयुक्त संचालक से मुलाकात कर अंकित गौरहा ने मांगी पूर्व शिकायतों पर कार्रवाई की जानकारी, मूल नस्तियों को सुरक्षित रखने की भी मांग..

बिलासपुर। जिला शिक्षा विभाग में पदोन्नति, पदस्थापना, अनुकंपा नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति, अटैचमेंट और युक्तियुक्तकरण से जुड़े मामलों को लेकर उठ रहे सवाल अब एक बार फिर चर्चा में हैं। फरवरी से मई 2026 के बीच सामने आईं विभिन्न शिकायतों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। इन शिकायतों पर अब तक हुई कार्रवाई और जांच की स्थिति को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अंकित गौरहा ने शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब मांगा है। उन्होंने संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग बिलासपुर से व्यक्तिगत मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए विस्तृत पत्र सौंपा है।

गौरहा ने कहा है कि यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप गलत हैं तो विभागीय जांच के माध्यम से उनकी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि जांच में प्रथम दृष्टया अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि मामले की जांच केवल पत्राचार तक सीमित न रहे, बल्कि संबंधित मूल दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

अनुकंपा नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति से शुरू हुआ मामला..

शिकायतों के अनुसार 9 फरवरी 2026 को अनुकंपा नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार को लेकर शिकायत की गई थी। इसके बाद 20 मार्च को एक अन्य शिकायत में कथित फर्जी अनुकंपा नियुक्ति, अटैचमेंट, युक्तियुक्तकरण, कोटा से जुड़े वित्तीय मामलों तथा पदोन्नति और प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए।

इसके बाद 4 मई 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जारी पदोन्नति और पदस्थापना आदेशों को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई गईं। शिकायत में लोक शिक्षण संचालनालय और न्यायालयीन आदेशों के संदर्भ में जारी आदेशों तथा उनके पालन की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है। कुछ पदोन्नति और पदस्थापना मामलों में कथित विसंगतियों की ओर भी विभाग का ध्यान आकर्षित कराया गया है।

अब मूल नस्तियों की जांच पर जोर..

अंकित गौरहा ने संयुक्त संचालक को दिए पत्र में संबंधित मामलों की मूल नस्तियां, नोटशीट, आदेश, वरिष्ठता सूची, पदोन्नति एवं पदस्थापना से जुड़े अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही न्यायालयीन आदेशों के पालन से संबंधित दस्तावेजों को भी जांच के दायरे में रखने की मांग की गई है।

उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि जांच पूरी होने तक संबंधित मूल अभिलेखों को सुरक्षित रखा जाए, ताकि उनमें किसी प्रकार का बदलाव, संशोधन अथवा नस्ती से छेड़छाड़ की आशंका न रहे। गौरहा का कहना है कि दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों में कितनी वास्तविकता है।

स्वतंत्र अधिकारी से जांच कराने की मांग..

मामले में गौरहा ने जांच की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि शिकायतों की जांच किसी स्वतंत्र वरिष्ठ अधिकारी अथवा स्वतंत्र जांच दल से कराई जाए। उनका तर्क है कि जिन अधिकारियों की भूमिका को लेकर शिकायतें सामने आई हैं, उन्हीं के स्तर पर जांच होने की स्थिति में निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।

पुरानी शिकायतों पर कार्रवाई की जानकारी भी मांगी..

गौरहा ने संयुक्त संचालक से पूर्व में प्रस्तुत शिकायतों पर अब तक की गई कार्रवाई की लिखित जानकारी भी मांगी है। उन्होंने जानना चाहा है कि शिकायतों पर विभागीय स्तर पर क्या जांच हुई, किस अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई और यदि जांच पूरी हो चुकी है तो उसका निष्कर्ष क्या रहा।

उन्होंने कहा कि शिकायतों को केवल पत्राचार तक सीमित रखने के बजाय तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के बाद यह बात सामने आनी चाहिए और यदि अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई होनी चाहिए।

अब विभाग की कार्रवाई पर टिकी नजर..

संयुक्त संचालक से मुलाकात और विस्तृत पत्र सौंपे जाने के बाद अब इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर नजर है। लगातार सामने आई शिकायतों के बाद विभाग मूल अभिलेखों की जांच कराता है या मामले को सामान्य पत्राचार तक सीमित रखता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल अंकित गौरहा ने पदोन्नति से लेकर अनुकंपा नियुक्ति और पदस्थापना तक के मामलों में दस्तावेज आधारित निष्पक्ष जांच की मांग रखकर शिक्षा विभाग के सामने जवाबदेही का सवाल खड़ा कर दिया है।