दुर्ग के निजी कॉलेज से निकला था प्रश्नपत्र, WhatsApp ग्रुप के जरिए छात्रों तक पहुंचा ; रायपुर समेत पांच जिलों में पुलिस की छापेमारी..

रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में पेपर लीक का कनेक्शन दुर्ग के एक निजी कॉलेज से सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में निजी कॉलेज के एक प्रोफेसर समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि प्रश्नपत्र कॉलेज से बाहर निकलने के बाद WhatsApp के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाया गया। मामले की जांच अभी जारी है और पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
परीक्षा से सवा घंटे पहले WhatsApp पर वायरल हुआ था पेपर..

दरअसल, 20 अगस्त को सुबह 10 बजे बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी की परीक्षा आयोजित होनी थी। परीक्षा शुरू होने से करीब एक घंटे पहले, सुबह 8.45 बजे ही प्रश्नपत्र छात्रों के WhatsApp ग्रुप में वायरल हो गया। इसकी जानकारी विश्वविद्यालय के डीन कार्यालय तक भी पहुंची, जहां ईमेल के माध्यम से प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायत मिली थी।

मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया। वायरल प्रश्नपत्र की जांच कराई गई तो उसके करीब 70 प्रतिशत सवाल परीक्षा में आए वास्तविक प्रश्नपत्र से मिलते-जुलते पाए गए। इसके बाद परीक्षा की गोपनीयता और पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
तकनीकी जांच से खुला पेपर लीक का राज..
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। मोबाइल फोन, WhatsApp चैट और प्रश्नपत्र के प्रसार से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल की गई। जांच के दौरान रायपुर, दुर्ग, कवर्धा, राजनांदगांव और बिलासपुर में अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की गई।
पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, पेपर लीक की कड़ी दुर्ग के एक निजी कॉलेज तक पहुंच गई। जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्र कॉलेज से बाहर निकला और इसके बाद WhatsApp ग्रुप के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाया गया। इसी आधार पर पुलिस ने निजी कॉलेज के एक प्रोफेसर सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया है।
16 से ज्यादा लोगों से पूछताछ..
पुलिस इस मामले में अब तक 16 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों से भी पेपर के स्रोत, उसे बाहर भेजने और WhatsApp के जरिए छात्रों तक पहुंचाने वाले लोगों के संबंध में पूछताछ की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि मामले में कुछ और लोग भी जुड़े हो सकते हैं। ऐसे में जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है।
छात्रों के प्रदर्शन के बाद रद्द करनी पड़ी परीक्षा..
पेपर लीक की जानकारी सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के छात्रों में आक्रोश फैल गया था। छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन करते हुए परीक्षा रद्द करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। बढ़ते विरोध को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एंटोमोलॉजी की परीक्षा तत्काल रद्द कर दी।
विश्वविद्यालय ने मामले की आंतरिक जांच के लिए चार सदस्यीय जांच समिति भी गठित की है। समिति से परीक्षा प्रक्रिया, प्रश्नपत्र की सुरक्षा और लीक की संभावित कड़ियों की जांच की जा रही है।
अब पूरे नेटवर्क की तलाश..
पेपर लीक मामले में पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रश्नपत्र कॉलेज से बाहर निकलने के बाद किन-किन लोगों तक पहुंचा और इसे छात्रों के WhatsApp ग्रुप में किसने वायरल किया। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ उनके मोबाइल और डिजिटल संपर्कों की भी जांच कर रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश के बाद प्रशासन और पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। अधिकारियों का फोकस केवल छह आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि पेपर लीक के पीछे पूरे नेटवर्क का पता लगाने पर है। पुलिस को उम्मीद है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।







