भारत में पाया जाने वाला मद्रास ट्रीश्रू अपनी अनोखी बनावट और खास जीवनशैली के कारण लोगों को करता है आकर्षित, पेड़ों के नाम से जुड़ा होने के बावजूद पूरी तरह वृक्षवासी नहीं..

गरियाबंद। जंगलों और प्राकृतिक इलाकों में कई ऐसे जीव पाए जाते हैं, जिन्हें पहली नजर में देखकर उनकी सही पहचान करना मुश्किल हो जाता है। ऐसा ही एक अनोखा छोटा स्तनधारी जीव है मद्रास ट्रीश्रू (Madras Treeshrew), जिसे इंडियन ट्रीश्रू (Anathana ellioti) के नाम से भी जाना जाता है। देखने में यह कुछ-कुछ गिलहरी और चूहे के मिश्रण जैसा नजर आता है, लेकिन वास्तव में यह न तो गिलहरी है और न ही चूहा। अपनी अलग शारीरिक बनावट और जैविक विशेषताओं के कारण यह वन्यजीवों की दुनिया में एक खास स्थान रखता है।
लंबा और नुकीला थूथन बनाता है अलग पहचान..
ट्रीश्रू का शरीर छोटा और फुर्तीला होता है। इसकी सबसे खास पहचान इसका अपेक्षाकृत लंबा और नुकीला थूथन है। यही वजह है कि पहली नजर में इसे आम चूहे या किसी छोटी गिलहरी से अलग पहचानना मुश्किल हो सकता है। इसकी चाल-ढाल और सक्रियता भी इसे दूसरे छोटे स्तनधारी जीवों से अलग बनाती है।
नाम में ‘ट्री’, फिर भी केवल पेड़ों पर निर्भर नहीं..
मद्रास ट्रीश्रू के नाम में भले ही ‘ट्री’ जुड़ा हो, लेकिन यह पूरी तरह पेड़ों पर रहने वाला जीव नहीं है। यह जमीन और पेड़ों दोनों पर सक्रिय रह सकता है। प्राकृतिक वातावरण में यह झाड़ियों, पेड़ों और जमीन के आसपास अपना समय बिताता है और भोजन की तलाश में लगातार सक्रिय रहता है।
असली श्रू भी नहीं है यह जीव..
ट्रीश्रू के नाम को लेकर एक दिलचस्प तथ्य यह है कि यह वास्तविक ‘श्रू’ यानी छछूंदर भी नहीं है। वैज्ञानिक वर्गीकरण में इसे स्कैंडेंटिया (Scandentia) नामक अलग समूह में रखा जाता है। इसकी जैविक विशेषताओं के कारण इसे प्राइमेट्स यानी बंदर और मनुष्य के विकासक्रम से जुड़े जीवों के अपेक्षाकृत निकट माना जाता है।
कीड़े-मकोड़े से लेकर फल और बीज तक खाता है..
मद्रास ट्रीश्रू सर्वाहारी जीव है। इसके भोजन में छोटे कीड़े-मकोड़े, तितलियां, फल और बीज शामिल होते हैं। भोजन की उपलब्धता के अनुसार इसकी आहार आदतों में बदलाव भी देखा जा सकता है। इस तरह यह प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र में छोटे जीवों और वनस्पतियों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभाता है।
दिन में रहता है ज्यादा सक्रिय..
यह मुख्य रूप से दिन के समय सक्रिय रहने वाला जीव है। अपनी तेज गति और फुर्ती के कारण इसे खुले में देख पाना आसान नहीं होता। खतरा महसूस होने पर यह तेजी से इधर-उधर निकल जाता है। जंगल और प्राकृतिक क्षेत्रों में इसकी मौजूदगी जैव विविधता की समृद्धि का भी संकेत मानी जाती है।
प्रकृति की अनोखी विविधता का उदाहरण..

मद्रास ट्रीश्रू भले ही आकार में छोटा हो, लेकिन इसकी पहचान और जैविक विशेषताएं इसे बेहद खास बनाती हैं। गिलहरी जैसा दिखने वाला यह जीव न तो गिलहरी है, न चूहा और न ही असली श्रू। इसकी अनोखी बनावट, भोजन की विविधता और अलग वैज्ञानिक वर्गीकरण इसे भारत के रोचक वन्यजीवों में शामिल करता है। जंगलों और प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के साथ ऐसे छोटे और कम चर्चित जीवों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि जैव विविधता की असली खूबसूरती इन्हीं अनोखी प्रजातियों से बनती है।







