वन विभाग ने शुरू किया डिजिटल प्रशिक्षण अभियान, बिलासपुर वन वृत्त के अधिकारियों-कर्मचारियों को ऑनलाइन एप्लीकेशन की दी जानकारी..

बिलासपुर। वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और वन संरक्षण की कार्रवाई को अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में वन विभाग ने डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने की पहल शुरू की है। इसी क्रम में सोमवार को वनचेतना केंद्र सकरी में वन अपराध प्रकरणों की ऑनलाइन एप्लीकेशन के उपयोग को लेकर एक दिवसीय वृत्त स्तरीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में बिलासपुर वन वृत्त के विभिन्न वनमंडलों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।

यह प्रशिक्षण प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख छत्तीसगढ़ जलवायु परिवर्तन विभाग अरुण कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार आयोजित किया गया। कार्यक्रम मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर वृत्त मनोज कुमार पाण्डेय एवं वनमंडलाधिकारी बिलासपुर नीरज के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य वन अपराध से जुड़े मामलों के ऑनलाइन अभिलेखीकरण, कार्रवाई की प्रक्रिया और प्रकरणों के निराकरण में डिजिटल एप्लीकेशन का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करना रहा।
अपराध की हर कार्रवाई होगी ऑनलाइन दर्ज..
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को बताया गया कि वन अपराध से जुड़े प्रकरणों में अलग-अलग चरणों पर किस तरह ऑनलाइन एंट्री की जानी है। प्रकरण दर्ज करने से लेकर उससे जुड़ी कार्रवाई और आगे के निराकरण तक आवश्यक जानकारी को व्यवस्थित तरीके से डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज करने की प्रक्रिया समझाई गई। इससे वन अपराध के मामलों की निगरानी आसान होने के साथ रिकॉर्ड को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने में भी मदद मिलेगी।
वन विभाग के मैदानी अमले ने लिया प्रशिक्षण..
कार्यशाला में बिलासपुर वन वृत्त के वनमंडलाधिकारी, उप वनमंडलाधिकारी, परिक्षेत्राधिकारी, परिक्षेत्र सहायक तथा संबंधित कार्यालयों के लिपिकीय कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल हुए। यानी वन अपराधों से सीधे जुड़े मैदानी अधिकारियों से लेकर कार्यालयीन अमले तक को ऑनलाइन व्यवस्था की जानकारी दी गई, ताकि एक ही प्रक्रिया के तहत प्रकरणों का रिकॉर्ड तैयार किया जा सके।
विशेषज्ञों ने समझाई ऑनलाइन एप्लीकेशन की प्रक्रिया..
प्रशिक्षण में प्रधान मुख्य वन संरक्षक रायपुर के वन प्रबंधन सूचना प्रणाली वनमंडल से सहायक वन संरक्षक पुष्पेन्द्र साहू और राज्य स्तरीय फॉरेस्ट स्ट्राइक फोर्स के प्रभारी संदीप सिंह ने ऑनलाइन एप्लीकेशन के विभिन्न चरणों में की जाने वाली एंट्री की विस्तार से जानकारी दी। प्रतिभागियों को एप्लीकेशन के व्यावहारिक उपयोग और प्रकरणों से संबंधित जानकारी सही तरीके से दर्ज करने की प्रक्रिया समझाई गई।
वन अपराधों के निराकरण में डिजिटल सिस्टम की अहम भूमिका..
कार्यशाला में मुख्य वन संरक्षक मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा कि वन अपराधों के प्रभावी निराकरण में ऑनलाइन एप्लीकेशन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। डिजिटल रिकॉर्ड से प्रकरणों की जानकारी व्यवस्थित रहेगी और अधिकारियों को मामलों की प्रगति की निगरानी करने में सुविधा होगी। उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों से ऑनलाइन व्यवस्था का गंभीरता से पालन करने और वन संरक्षण के कार्यों में तकनीक का अधिकतम उपयोग करने पर जोर दिया।
रिकॉर्ड में लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश..
कार्यक्रम में उपस्थित वनमंडलाधिकारी और उप वनमंडलाधिकारियों ने भी वन अपराधों से संबंधित प्रकरणों के ऑनलाइन अभिलेखीकरण की उपयोगिता बताई। उन्होंने अधिकारियों-कर्मचारियों को निर्देशित किया कि प्रकरणों की ऑनलाइन एंट्री में निर्धारित प्रक्रिया और विभागीय निर्देशों का सही ढंग से पालन किया जाए। वन विभाग का मानना है कि कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से वन अपराधों की निगरानी और उनके निराकरण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी।
वन संरक्षण के लिए तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल..

वन विभाग की इस पहल को वन अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जंगलों में अवैध कटाई, वन्यजीव अपराध और अन्य वन अपराधों से जुड़े मामलों में समय पर कार्रवाई के साथ उनका व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से विभागीय निगरानी को मजबूती मिलेगी। बिलासपुर वन वृत्त में आयोजित यह प्रशिक्षण इसी डिजिटल व्यवस्था को मैदानी स्तर तक प्रभावी रूप से लागू करने की कवायद का हिस्सा है।







