सिर्फ सफाई नही, तुरतुरिया को संवारने की पहल ; गांधी जयंती पर वन विभाग ने बच्चों-ग्रामीणों के साथ उठाया स्वच्छता का बीड़ा..

तुरतुरिया को स्वच्छ और सुंदर बनाने जुटा वन विभाग, बच्चों और ग्रामीणों ने भी संभाली जिम्मेदारी..

गांधी जयंती पर सेवा संकल्प अभियान के तहत वाल्मीकि आश्रम परिसर में चला स्वच्छता अभियान, धार्मिक और पर्यटन स्थल को स्वच्छ रखने का दिया संदेश..

बलौदाबाजार। महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर जिले के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल तुरतुरिया को स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल बनाए रखने की दिशा में पहल की गई। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत वन परिक्षेत्र बल्दाकछार के तुरतुरिया स्थित वाल्मीकि आश्रम परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान में वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ स्थानीय ग्रामीणों, स्कूल के बच्चों और तुरतुरिया प्रबंधन समिति के सदस्यों ने भी हिस्सा लिया।

अभियान का उद्देश्य केवल परिसर की सफाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक और पर्यटन स्थलों को साफ-सुथरा रखने के प्रति लोगों में जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी रहा। सामूहिक श्रम के जरिए परिसर की सफाई की गई और लोगों को स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

अधिकारियों से लेकर बच्चों तक सभी ने निभाई भागीदारी..

स्वच्छता अभियान में वनमंडलाधिकारी बलौदाबाजार पंकज कमल, अधीक्षक बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य कृष्णानु चंद्राकर, उप वनमंडलाधिकारी बलौदाबाजार निश्चल चंद्र शुक्ला, वन परिक्षेत्राधिकारी कोठारी जीवनलाल साहू और वन परिक्षेत्राधिकारी बल्दाकछार राहुल उपाध्याय सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। इसके अलावा तुरतुरिया प्रबंधन समिति के सदस्यों, स्कूली बच्चों और स्थानीय ग्रामीणों ने भी अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी ने मिलकर आश्रम परिसर और आसपास के क्षेत्र की सफाई की।

पर्यटन के साथ स्वच्छता का संदेश..

तुरतुरिया धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। ऐसे स्थानों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में परिसर की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण सीधे तौर पर पर्यटन व्यवस्था से भी जुड़ा विषय है।

वन विभाग की इस पहल के जरिए लोगों को यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि धार्मिक और पर्यटन स्थलों की सुंदरता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। स्थानीय लोगों और यहां आने वाले पर्यटकों की भागीदारी भी जरूरी है। साफ-सफाई बनाए रखने और कचरा निर्धारित स्थान पर डालने जैसी छोटी-छोटी आदतें ऐसे स्थलों को लंबे समय तक स्वच्छ रखने में मदद कर सकती हैं।

सामूहिक प्रयास से बदलेगा परिसर का स्वरूप..

अभियान में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वच्छता को नियमित व्यवहार का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। स्थानीय लोगों और बच्चों की भागीदारी को इस दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया कि आने वाली पीढ़ी पर्यावरण और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता के प्रति अधिक जिम्मेदार बने।

वन विभाग के अनुसार, इस तरह की पहल का उद्देश्य प्रकृति, संस्कृति और पर्यटन के बीच बेहतर तालमेल बनाना है, ताकि तुरतुरिया जैसे स्थलों का प्राकृतिक और धार्मिक महत्व बरकरार रखते हुए उन्हें स्वच्छ एवं सुंदर बनाया जा सके।

स्वच्छ परिसर, स्वस्थ पर्यावरण और सुंदर तुरतुरिया के संदेश के साथ आयोजित यह अभियान लोगों को अपने आसपास के धार्मिक, पर्यटन और प्राकृतिक स्थलों की स्वच्छता के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता नजर आया।