जनसुनवाई में इम्पोर्टेड समर्थक, फर्जी दस्तखत और पाक – साफ नेताजी का वायरल मैनेजमेंट !

बिलासपुर (मस्तूरी)।अगर आपको किसी बड़े प्रोजेक्ट के लिए गांव वालों का समर्थन नहीं मिल रहा है, तो फिक्र मत कीजिए! आजकल जनसमर्थन भी बाहर से मंगवाया जा सकता है। कम से कम बिलासपुर के मस्तूरी स्थित ग्राम कुकुर्दीकला में रेत घाट के लिए हुई जनसुनवाई को देखकर तो यही लगता है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने तो यहां स्थानीय लोगों की राय जानने के लिए जनसुनवाई बुलाई थी, लेकिन मौके पर ऐसा चमत्कार हुआ कि समर्थन देने के लिए दूसरे गांव से किराए की भीड़ जुटा ली गई और इस पूरे मैनेजमेंट के डायरेक्टर की भूमिका में नजर आ रहे हैं वो सफेदपोश नेताजी, जो कुछ दिन पहले प्रेस क्लब में बैठकर खुद को गंगाजल से धुला हुआ बता रहे थे। एक के बाद एक वायरल होते वीडियो ने अब इस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया को ही मजाक बनाकर रख दिया है।

रेत का लालच और हाईजैक हुआ लोकतंत्र.. देखें वॉयरल वीडियो..

कुकुर्दीकला में 11 हेक्टेयर क्षेत्र में 99,000 घनमीटर सालाना क्षमता वाले रेत खनन के लिए 30 अप्रैल को जनसुनवाई (पर्यावरणीय स्वीकृति) रखी गई थी। नियम कहता है कि जिस गांव की रेत निकाली जा रही है, वहां के पर्यावरण और लोगों की राय ली जाए। लेकिन वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि बाकायदा कुर्सियों पर बैठी महिलाओं को उठा उठाकर, उनके हाथों में पर्चा थमाकर जबरन समर्थन करवा रहे हैं।

इम्पोर्टेड समर्थक : गांव कुकुर्दीकला का, महिलाएं सोनसरी की!

इस जनसुनवाई में जो सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया, उसने अधिकारियों की आंखें भी खोल दी होंगी (अगर वे देखना चाहें तो)। समर्थन का ग्राफ बढ़ाने के लिए जो महिलाएं वहां बैठी थीं, वे कुकुर्दीकला की थीं ही नहीं। उन्हें पास के गांव सोनसरी से लाया गया था, ताकि भीड़ दिखाई जा सके और दूसरों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर किए जा सकें।

केस 1 (बिना पढ़े दस्तखत की मशीन) : देखें वॉयरल वीडियो..

सोनसरी से लाई गईं बुजुर्ग महिला दुकलहीन ने बड़ी मासूमियत से इस फर्जीवाड़े की पोल खोल दी। उन्होंने कहा हमें एक पर्चा दिया गया है और बस साइन करने को कहा गया है। हमें कुछ नहीं पता कि इसमें क्या लिखा है और क्यों साइन कराया जा रहा है। कहा गया है तो हम कर रहे हैं।

केस 2 (फर्जी हस्ताक्षर का टास्क) : देखें वॉयरल वीडियो..

दूसरी महिला शोभा यादव ने तो पूरा सिंडिकेट ही समझा दिया। उन्होंने बताया कि वे सोनसरी की महिला समूह से जुड़ी हैं और उन्हें बाकायदा यह टास्क दिया गया था कि वे महिलाओं को समर्थन पत्र बांटें और उनसे दस्तखत करवाकर समर्थन दिलाएं।

साफ सुथरे नेताजी का ट्रैफिक पुलिस वाला अवतार.. देखें वॉयरल वीडियो..

इस पूरी फिल्म के सबसे दिलचस्प किरदार हैं भाजपा नेता चंद्र प्रकाश सूर्या। कुछ ही दिन पहले इन्होंने प्रेस वार्ता बुलाकर बड़े ही मासूम अंदाज में कहा था कि उनका इस रेत घाट की जनसुनवाई से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है। लेकिन वायरल वीडियो में नेताजी मौके पर डटे हुए हैं और हाथ के इशारों से ऐसे समर्थन दिलवा रहे हैं, जैसे कोई ट्रैफिक पुलिस चौराहे पर गाड़ियां पास करवा रही हो।

देखें वॉयरल वीडियो..

गौरतलब है कि इससे ठीक पहले इन्ही भाजपा नेता का पैसे के लेन देन का एक और कथित वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। उस वीडियो के बाद इस नए इशारेबाजी वाले वीडियो ने नेताजी के दावों की हवा निकाल दी है।

CCTV फुटेज से खुलेगा पूरा राज?

अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन सिर्फ मूकदर्शक बना रहेगा? जनसुनवाई स्थल पर लगे CCTV कैमरों में यह पूरा खेल रिकॉर्ड हुआ है। अगर इन फुटेज की ईमानदारी से जांच की जाए, तो पता चल जाएगा कि प्रशासन की नाक के नीचे कैसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का गला घोंटा गया।