शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग तेज, शिकायतों के बाद कार्रवाई के संकेत – अंकित गौरहा की मुहिम रंग लाई..

तीन महीने से लगातार उठ रही आवाज अब असरदार, पदोन्नति और नियुक्ति प्रक्रियाओं पर उठे सवाल..

बिलासपुर। जिला शिक्षा विभाग में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ पिछले तीन महीनों से लगातार आवाज उठाने वाले कांग्रेस नेता अंकित गौरहा की मुहिम अब असर दिखाने लगी है। लगातार शिकायतों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर की गई पहल के बाद अब विभाग में बड़े स्तर पर बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। साथ ही, संयुक्त संचालक शिक्षा भी जांच के दायरे में आते नजर आ रहे हैं।

लगातार शिकायतों से प्रशासन हरकत में..

अंकित गौरहा ने पदोन्नति, युक्तिकरण, अनुकंपा नियुक्ति और अन्य प्रक्रियाओं में गड़बड़ी को लेकर मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, कलेक्टर और विभागीय अधिकारियों को 20 से अधिक शिकायतें भेजी थीं। इन शिकायतों में नियमों की अनदेखी और भ्रष्टाचार के ठोस प्रमाण प्रस्तुत किए गए थे।

इन लगातार प्रयासों के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है और कार्रवाई के संकेत स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।

नई शिकायत से फिर बढ़ी हलचल..

हाल ही में गौरहा ने संयुक्त संचालक शिक्षा, बिलासपुर को एक और विस्तृत शिकायत सौंपी है। इसमें जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और कर्मचारी सुनील यादव की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

शिकायत में आरोप है कि पदोन्नति आदेशों में गड़बड़ी की गई, वरिष्ठता सूची की अनदेखी हुई और न्यायालय के निर्देशों के बावजूद नियमों को दरकिनार कर निर्णय लिए गए। चयन प्रक्रिया में पक्षपात के भी आरोप सामने आए हैं।

गुरुजनों के सम्मान की लड़ाई..

अंकित गौरहा का कहना है कि यह मुद्दा केवल राजनीति का नहीं, बल्कि शिक्षकों के सम्मान और उनके अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा व्यवस्था पारदर्शी नहीं होगी, तब तक छात्रों का भविष्य भी सुरक्षित नहीं हो सकता।

कार्रवाई के संकेत, बढ़ता दबाव..

लगातार शिकायतों के बाद विभाग में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी पर संभावित कार्रवाई और संयुक्त संचालक पर बढ़ता दबाव यह दर्शाता है कि मामला अब उच्च स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है।

लड़ाई व्यवस्था सुधार की..

गौरहा ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति या विभाग के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए है। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षकों को उनका हक और सम्मान नहीं मिलेगा, यह लड़ाई जारी रहेगी।