वन्यजीवों की जान बचाने से लेकर गांवों की सड़क तक, वन मंत्री के बड़े फैसले..

अंबिकापुर के संजय पार्क में खुलेगा अत्याधुनिक वन्यजीव उपचार केंद्र, 18 सड़कों के उन्नयन की अनुशंसा; गोमर्डा अभयारण्य में बसेंगे 50 काले हिरण..

विशेष पिछड़ी जनजातियों की बस्तियों तक पहुंचेगी बेहतर सड़क सुविधा, छत्तीसगढ़ की पहली राजकीय तितली बनेगी ‘ऑरेंज ओकलीफ’; जंगल सफारी के प्रबंधन में वनतारा से तकनीकी सहयोग की तैयारी..

बिलासपुर/नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों के संरक्षण के साथ जंगलों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों की सुविधाएं बढ़ाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए वन विभाग ने कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। सरगुजा संभाग में घायल वन्यजीवों के इलाज के लिए अत्याधुनिक ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (टीटीसी) खोलने, संरक्षित वन क्षेत्रों के भीतर स्थित 18 ग्रामीण सड़कों के उन्नयन, गोमर्डा अभयारण्य में 50 काले हिरणों को स्थानांतरित करने और ‘ऑरेंज ओकलीफ’ को प्रदेश की पहली राजकीय तितली घोषित करने की दिशा में पहल की गई है।

वन मंत्री की अध्यक्षता में 10 अक्टूबर को नवा रायपुर स्थित उनके निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की पहली बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा कर विभिन्न स्तरों पर मंजूरी, सैद्धांतिक सहमति और अनुशंसा की गई। बैठक में वन्यजीव संरक्षण के साथ ग्रामीण विकास, विशेष पिछड़ी जनजातियों की बुनियादी जरूरतों और जंगल सफारी के बेहतर प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी गई।

घायल वन्यजीवों को अब अंबिकापुर में मिल सकेगा बेहतर उपचार..

सरगुजा संभाग में हाथियों सहित अन्य वन्यजीवों के घायल होने या मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के दौरान समय पर उपचार उपलब्ध कराना वन विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती है। ऐसे मामलों में घायल वन्यजीवों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने, प्राथमिक उपचार देने और कुछ समय तक उनकी देखरेख करने की व्यवस्था मजबूत करने के लिए अंबिकापुर के संजय पार्क में अत्याधुनिक वन्यजीव ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

इस केंद्र का उद्देश्य घायल वन्यजीवों को समय पर रेस्क्यू कर उपचार उपलब्ध कराना और उनकी स्थिति के अनुसार आगे की देखभाल सुनिश्चित करना है। इससे सरगुजा संभाग में वन्यजीवों के बचाव और उपचार की व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। खासकर उन परिस्थितियों में यह केंद्र उपयोगी साबित हो सकता है, जब दुर्घटना या संघर्ष के बाद वन्यजीवों को तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है।

18 सड़कों से दूरस्थ गांवों को मिलेगी राहत..

बैठक में संरक्षित वन क्षेत्रों के भीतर स्थित 18 ग्रामीण सड़कों के उन्नयन के प्रस्तावों को भारत सरकार के पास भेजने की अनुशंसा की गई। इनमें भोरमदेव अभयारण्य की तीन, इंद्रावती टाइगर रिजर्व की 14 और जशपुर जिले के बादलखोल अभयारण्य की एक सड़क शामिल है। ये प्रस्ताव प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़े हैं।

इन सड़कों के उन्नयन से वन क्षेत्रों के भीतर और आसपास बसे गांवों के लोगों को आवागमन में राहत मिल सकती है। विशेष रूप से बैगा और अन्य विशेष पिछड़ी जनजातियों की बस्तियों तक शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाएं पहुंचाना आसान होगा। बारिश के मौसम में खराब रास्तों के कारण होने वाली परेशानियों को कम करने में भी बेहतर सड़कें मददगार हो सकती हैं।

हालांकि, इन सड़कों के उन्नयन के प्रस्तावों को भारत सरकार के पास भेजने की अनुशंसा की गई है। इनके अंतिम स्वीकृति और निर्माण की प्रक्रिया आगे के निर्णयों पर निर्भर करेगी।

गोमर्डा में बसेंगे 50 काले हिरण..

वन्यजीव संरक्षण के तहत गोमर्डा अभयारण्य में 50 काले हिरणों को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। बारनवापारा अभयारण्य में काले हिरणों के संरक्षण के अनुभव के बाद अब गोमर्डा में भी इस दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।

काले हिरणों को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित करने का उद्देश्य उनके संरक्षण को बढ़ावा देना और उपयुक्त प्राकृतिक आवास में उनकी आबादी विकसित करना है। इस प्रक्रिया में वन्यजीवों की सुरक्षा, नए क्षेत्र की अनुकूलता और निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन महत्वपूर्ण होगा। प्रस्ताव के क्रियान्वयन से गोमर्डा अभयारण्य में वन्यजीव विविधता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

‘ऑरेंज ओकलीफ’ को राजकीय तितली बनाने की तैयारी..

छत्तीसगढ़ को अपनी पहली राजकीय तितली मिलने का रास्ता भी खुलता दिखाई दे रहा है। जनभागीदारी के तहत सार्वजनिक मतदान में सामने आए ‘ऑरेंज ओकलीफ’ को राज्य की पहली राजकीय तितली घोषित करने के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति दी गई है। इसके लिए प्रस्ताव का परीक्षण कर आगे की कार्यवाही करने की मंजूरी दी गई।

राजकीय तितली की पहचान से प्रदेश की जैव विविधता के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने और तितलियों के प्राकृतिक आवासों के संरक्षण को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। हालांकि, औपचारिक घोषणा और संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसे छत्तीसगढ़ की राजकीय तितली का दर्जा मिलेगा।

जंगल सफारी के प्रबंधन में वनतारा से सहयोग..

नवा रायपुर स्थित जंगल सफारी के आधुनिक प्रबंधन और वन्यजीवों की बेहतर देखभाल के लिए गुजरात की ग्रीन जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहेबिलिटेशन सेंटर, जिसे ‘वनतारा’ के नाम से जाना जाता है, के साथ तकनीकी सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है।

इस पहल के जरिए वन्यजीवों की देखरेख, प्रबंधन और संबंधित तकनीकी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में सहयोग मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित समझौते के तहत सहयोग का वास्तविक दायरा और उसकी शर्तें आगे की प्रक्रिया में तय होंगी।

फसल नुकसान के मुआवजे की दरों पर फिर होगा विचार..

हाथियों और अन्य वन्यजीवों के कारण किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई का मुद्दा भी बैठक में उठा। वर्तमान में वर्ष 2016 की पुरानी दरों के स्थान पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिलावार और फसलवार निर्धारित बीमित राशि को आधार बनाकर मुआवजे की दरों को समय के साथ अद्यतन करने के प्रस्ताव पर आगे विचार करने का निर्णय लिया गया।

यदि इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाता है, तो अलग-अलग जिलों और फसलों के अनुसार मुआवजे की व्यवस्था में बदलाव हो सकता है। इससे वन्यजीवों के कारण फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को राहत देने की व्यवस्था अधिक व्यावहारिक बनाने की संभावना है। फिलहाल इस संबंध में अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

हाथी प्रभावित गांवों में पक्के मकानों की योजना पर चर्चा..

हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में ग्रामीणों के कच्चे मकानों को पक्का बनाने के लिए विशेष मुख्यमंत्री आवास योजना शुरू करने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया। इस पर चर्चा के बाद मामले को उच्चस्तरीय बैठक में विचार के लिए भेजने के निर्देश दिए गए।

हाथी प्रभावित गांवों में ग्रामीणों की सुरक्षा और आवास की स्थिति लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय रही है। ऐसे क्षेत्रों में बेहतर आवास उपलब्ध कराने की पहल से लोगों को राहत मिल सकती है। हालांकि, योजना की स्वीकृति, पात्रता और क्रियान्वयन को लेकर अभी आगे का निर्णय होना बाकी है।

संरक्षण और जनसुविधाओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश..

छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की पहली बैठक में लिए गए निर्णयों से स्पष्ट है कि वन विभाग का जोर केवल वन्यजीवों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। संरक्षित क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों की बुनियादी सुविधाएं बेहतर बनाने, विशेष पिछड़ी जनजातियों की बस्तियों तक सड़क पहुंचाने, किसानों को फसल नुकसान से राहत देने और वन्यजीवों के उपचार की व्यवस्था मजबूत करने जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल हैं।

अब इन प्रस्तावों का वास्तविक असर उनके क्रियान्वयन, संबंधित विभागों की मंजूरी और समयबद्ध कार्रवाई पर निर्भर करेगा। अंबिकापुर में उपचार केंद्र की स्थापना, सड़क उन्नयन के प्रस्तावों की स्वीकृति और हाथी प्रभावित गांवों के लिए आवास संबंधी पहल जैसे फैसले जमीन पर उतरते हैं, तो वन्यजीव संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।