
छत्तीसगढ़ के 20 विद्यार्थियों का राष्ट्रीय स्तर के लिए चयन, बिलासपुर से 4209 बच्चों ने इंस्पायर अवार्ड के लिए दर्ज कराए विचार ; बिल्हा प्रदेश में पहले स्थान पर..

बिलासपुर/रायपुर। वैज्ञानिक बनने के लिए बड़े शहरों या महंगे संसाधनों की ही जरूरत नहीं होती, बल्कि समाज की समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने की सोच भी जरूरी है। इसी सोच के साथ बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड की दो छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। कुमारी तृषा कमलेश और कुमारी रेणुका धनुआर ने ऐसे नवाचारी मॉडल तैयार किए हैं, जिनका उद्देश्य रोजमर्रा की समस्याओं को तकनीक के माध्यम से हल करना है। इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के सत्र 2024-25 के तहत दोनों छात्राओं का चयन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए हुआ है। छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय स्तर के लिए चयनित 20 विद्यार्थियों में शामिल इन छात्राओं की उपलब्धि ने बिलासपुर का मान बढ़ाया है।
खास बात यह है कि बिलासपुर में नवाचार की यह प्रतिभा केवल दो विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है। जिले के चार विकासखंडों से सत्र 2026-27 के लिए 4209 विद्यार्थियों ने अपने मौलिक विचारों का ऑनलाइन पंजीयन कराया है। इनमें बिल्हा विकासखंड के 1839 विद्यार्थी शामिल हैं। पंजीयन के आंकड़ों के आधार पर बिलासपुर जिला प्रदेश में सबसे आगे है, जबकि बिल्हा विकासखंड ने भी प्रदेश के सभी विकासखंडों में पहला स्थान हासिल किया है। ये आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण और शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के बीच भी वैज्ञानिक सोच और नए प्रयोगों को लेकर रुचि बढ़ रही है।
किसी ने थूकने की समस्या का हल खोजा, तो किसी ने बारिश से बचने का तरीका..
बिल्हा विकासखंड की छात्रा रेणुका धनुआर ने सार्वजनिक स्थानों पर थूकने की समस्या को ध्यान में रखते हुए ‘वॉल माउंट स्पिट डिटेक्शन एंड अलार्म सिस्टम’ मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल की परिकल्पना सार्वजनिक स्थान पर थूकने की स्थिति का पता लगाकर अलार्म के माध्यम से लोगों को सचेत करने की है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखने और लोगों को जिम्मेदार व्यवहार के लिए प्रेरित करना है।
वहीं, तृषा कमलेश ने ‘वेदर गार्ड स्मार्ट बैग’ नाम से सेंसर आधारित मॉडल तैयार किया है। इसमें बारिश या नमी का संकेत मिलने पर बैग से जुड़े छाते को अपने आप खोलने की व्यवस्था की परिकल्पना की गई है। इस तरह का मॉडल अचानक बारिश होने पर विद्यार्थियों और दूसरे लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
दोनों छात्राओं के मॉडल अलग-अलग समस्याओं पर आधारित हैं, लेकिन इनकी सोच एक जैसी है। अपने आसपास की परेशानियों को पहचानना और उनका व्यावहारिक समाधान खोजने का प्रयास करना। यही इंस्पायर अवार्ड मानक योजना का मूल उद्देश्य भी है। राष्ट्रीय स्तर पर दोनों छात्राओं को अपने विचार प्रस्तुत करने और उनकी उपयोगिता समझाने का अवसर मिलेगा।
रायपुर में स्कूल शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानित..
राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए चयनित विद्यार्थियों को राजधानी रायपुर में सम्मानित किया गया। बीटीआई ग्राउंड परिसर स्थित एससीईआरटी भवन के सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने विद्यार्थियों को बधाई दी और उन्हें वैज्ञानिक सोच तथा रचनात्मकता के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।


मंत्री यादव ने कहा कि इंस्पायर अवार्ड योजना बच्चों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। हर बच्चे में कोई न कोई मौलिक प्रतिभा होती है। जरूरत इस बात की है कि उस प्रतिभा को पहचाना जाए और उसे आगे बढ़ने के लिए उचित अवसर दिया जाए। उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के साथ अपने आविष्कारों को समाज के लिए उपयोगी बनाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ से लगभग 80 हजार नवाचारी विचार सामने आए हैं। यह संख्या बताती है कि प्रदेश के विद्यार्थियों में नए विचारों और प्रयोगों को लेकर अच्छी संभावनाएं हैं। ऐसे विचारों को प्रोत्साहित कर उन्हें उपयोगी मॉडल में बदलना जरूरी है।
गलतियों से सीखकर आगे बढ़ें विद्यार्थी..
कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने कहा कि नवाचार का अर्थ केवल किसी नई वस्तु का आविष्कार करना नहीं है। पुराने कामों को नए और बेहतर तरीके से करना भी नवाचार है। विद्यार्थियों को प्रयोग करने, गलतियों से सीखने और आत्मविश्वास के साथ अपने विचार प्रस्तुत करने की आदत विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी ग्रामीण, आदिवासी या किसी भी सामाजिक परिवेश से आते हों, उनकी सफलता उनकी क्षमता, मेहनत और सोच पर निर्भर करती है। भाषा की तुलना में विषय की समझ, ज्ञान और काम करने की योग्यता अधिक महत्वपूर्ण है। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे बड़े मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता से पहले मॉडलों का किया गया अभ्यास..
राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता की तैयारी के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बिल्हा में तृषा और रेणुका के मॉडलों की मॉक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई थी। इसमें अधिकारियों, शिक्षाविदों, विज्ञान शिक्षकों और प्रशिक्षकों ने दोनों छात्राओं के मॉडलों को देखा।
इस दौरान मॉडलों की कार्यप्रणाली, उनकी उपयोगिता और प्रस्तुति के तरीके पर मार्गदर्शन दिया गया। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में केवल मॉडल बनाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसके पीछे की सोच, समस्या का समाधान और तकनीक के उपयोग को स्पष्ट रूप से समझाना भी महत्वपूर्ण होता है। मॉक प्रदर्शनी से छात्राओं को अपनी प्रस्तुति बेहतर बनाने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक ऋतुराज रघुवंशी, उप संचालक हिमांशु भारती और सहायक संचालक एवं इंस्पायर अवार्ड के प्रभारी सतीश महेश्वरी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
छात्राओं की इस उपलब्धि पर जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल, जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडे, शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र कौशिक, जिला नोडल अधिकारी मुकेश अग्रवाल, विकासखंड नोडल अधिकारी सुनीता ध्रुव, प्राचार्य सी.के. धृतलहरे और साधना प्रधान ने शुभकामनाएं दीं। प्रशिक्षक एम. गायत्री और मधु जायसवाल के साथ अभिभावकों ने भी छात्राओं की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की।
चार विकासखंडों के 869 स्कूलों से 4209 विद्यार्थियों ने कराया पंजीयन..
बिलासपुर जिले में सत्र 2026-27 के लिए इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के तहत विद्यार्थियों की भागीदारी के आंकड़े उत्साहजनक हैं। जिले के चार विकासखंडों के 869 शासकीय और अशासकीय विद्यालयों से कुल 4209 विद्यार्थियों ने अपने विचारों का ऑनलाइन पंजीयन कराया है। ये विद्यार्थी जिला स्तर की प्रतियोगिता के लिए अपने नवाचारी विचार प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं।
विकासखंडवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बिल्हा सबसे आगे है। यहां 383 विद्यालयों के 1839 विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया है। कोटा विकासखंड के 158 विद्यालयों से 764, मस्तूरी के 157 विद्यालयों से 771 और तखतपुर के 172 विद्यालयों से 835 विद्यार्थियों ने अपने विचार दर्ज कराए हैं।
विकासखंडवार पंजीयन की स्थिति..
विकासखंड विद्यालयों की संख्या विद्यार्थियों की संख्या
बिल्हा 383 1839
कोटा 158 764
मस्तूरी 157 771
तखतपुर 172 835
कुल 869 4209
पंजीयन के इन आंकड़ों में बिल्हा की भागीदारी सबसे अधिक है। यहां के 1839 विद्यार्थियों ने अपने विचारों को प्रतियोगिता तक पहुंचाने के लिए पंजीयन कराया है। इससे विकासखंड में नवाचार को लेकर विद्यालय स्तर पर हो रहे प्रयासों का पता चलता है।
क्या है इंस्पायर अवार्ड मानक योजना?
इंस्पायर अवार्ड मानक योजना भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के सहयोग से संचालित की जाती है। इसका उद्देश्य कक्षा छठवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के मौलिक विचारों को पहचानना और उन्हें वैज्ञानिक मॉडल के रूप में विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों को मॉडल विकसित करने के लिए 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। जिला और राज्य स्तर की चयन प्रक्रिया से गुजरने के बाद विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं।
तृषा और रेणुका का चयन इस बात का उदाहरण है कि विद्यार्थियों को यदि अपनी सोच सामने रखने का अवसर मिले, तो वे अपने आसपास की समस्याओं से भी नए समाधान खोज सकते हैं। अब दोनों छात्राओं के सामने राष्ट्रीय मंच पर अपने मॉडल की उपयोगिता और मौलिकता प्रस्तुत करने की चुनौती होगी। उनकी उपलब्धि जिले के दूसरे विद्यार्थियों को भी केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रहने के बजाय सवाल पूछने, प्रयोग करने और नए विचार विकसित करने के लिए प्रेरित कर सकती है।







