सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देकर रिजर्व प्रबंधन ने स्पष्ट की स्थिति..

गरियाबंद-धमतरी। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (यूएसटीआर) प्रशासन ने रिजर्व क्षेत्र को लेकर फैलाए जा रहे कथित भ्रामक प्रचार और आरोपों पर विस्तृत तथ्यात्मक जानकारी जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि टाइगर रिजर्व में न तो आदिवासी अधिकारों का हनन किया जा रहा है और न ही विकास कार्यों को जानबूझकर रोका जा रहा है। प्रबंधन ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण, आदिवासी अधिकारों और स्थानीय विकास के बीच संतुलन बनाना ही उनका मुख्य उद्देश्य है।रिजर्व प्रबंधन ने ‘वन और जन साथ-साथ’ के संदेश के साथ कहा कि सभी कार्य सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किए जा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला..
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने विभिन्न न्यायालयीन आदेशों का उल्लेख करते हुए बताया कि देश के टाइगर रिजर्व और वन्यजीव कॉरिडोर अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर न्यायालयों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

प्रबंधन के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी 2012 को दिए गए आदेश में वन्यजीव कॉरिडोर की सुरक्षा को अनिवार्य बताया था। साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए अवैध कब्जे हटाने और नियमों के विरुद्ध दिए गए पट्टों को निरस्त करने के निर्देश भी दिए गए थे। इसके अलावा बिलासपुर हाईकोर्ट ने भी टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी गैर-वन गतिविधियों के विस्तार पर प्रतिबंध संबंधी निर्देश जारी किए थे।
कोर क्षेत्र में सड़कों पर रात्रिकालीन यातायात प्रतिबंध..
रिजर्व प्रबंधन ने बताया कि 17 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के टाइगर रिजर्व और अभयारण्यों के कोर क्षेत्रों से गुजरने वाली सड़कों पर शाम से सुबह तक यातायात बंद रखने के निर्देश दिए थे। केवल एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को ही छूट प्रदान की गई है।इसी तरह 29 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के एक टाइगर रिजर्व से जुड़े मामले में वन भूमि पर बिना अनुमति सरकारी निर्माण कार्यों पर सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने वन संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई के भी निर्देश दिए थे।
आदिवासी अधिकारों का हनन नहीं हो रहा..
टाइगर रिजर्व प्रशासन ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा आदिवासी अधिकारों के हनन का आरोप लगाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। यूएसटीआर के अनुसार अब तक 42 ग्राम सभाओं को सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) प्रदान किए जा चुके हैं। इन ग्राम सभाओं को कुल 59 हजार 615 हेक्टेयर क्षेत्र में अधिकार दिए गए हैं, जिससे स्थानीय समुदायों को वन संरक्षण, प्रबंधन और आजीविका संवर्धन में भागीदारी मिली है। प्रबंधन ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय को हटाना नहीं, बल्कि साझेदारी के साथ संरक्षण को मजबूत करना है।
कानून के तहत ही संभव हैं विकास कार्य..
रिजर्व प्रशासन ने स्पष्ट किया कि टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्रों में किसी भी गैर-वन कार्य के लिए वन एवं वन्यजीव स्वीकृति आवश्यक होती है। NTCA के दिशा-निर्देशों के अनुसार कोर क्षेत्रों में पक्की सड़क निर्माण जैसी गतिविधियां प्रतिबंधित हैं। अधिकारियों ने कहा कि सड़क, बिजली और अन्य जरूरी सुविधाओं से जुड़े कार्य पूरी कानूनी प्रक्रिया और न्यायालयीन नियमों के तहत ही किए जा सकते हैं। इसे विकास विरोधी कदम बताना गलत है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी का दावा..
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने दावा किया कि पिछले चार वर्षों में क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। प्रबंधन के अनुसार सीतानदी क्षेत्र में इस दौरान केवल तीन मानव जनहानि के मामले सामने आए, जो राज्य के औसत की तुलना में काफी कम हैं। वन विभाग ने इसके लिए हाथी ट्रैकिंग और अलर्ट सिस्टम, एंटी-पोचिंग अभियान, अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई और सोलर पंप वितरण जैसी पहलों को प्रमुख कारण बताया।
जंगल और वन्यजीवों के लिए संवेदनशील क्षेत्र..
प्रबंधन के अनुसार उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व जैव विविधता की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह क्षेत्र बाघ, हाथी, गौर, भालू, चीतल, जंगली कुत्तों और अनेक दुर्लभ पक्षियों का प्राकृतिक आवास है। साथ ही महानदी के उद्गम क्षेत्र के कारण यह पूरे इलाके के लिए पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वन अधिकारियों ने कहा कि कोर और कॉरिडोर क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का अनियंत्रित हस्तक्षेप पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
भ्रामक प्रचार से बचें..
रिजर्व प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि राजनीतिक या व्यक्तिगत स्वार्थ से प्रेरित भ्रामक प्रचार से बचें। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे तथ्यहीन आरोप न केवल पर्यावरण बल्कि स्थानीय समुदायों के हितों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। प्रबंधन ने कहा कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व केवल एक जंगल नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की प्राकृतिक धरोहर है, जिसकी सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है।
‘वन बचेंगे तो जीवन बचेगा’..
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने अपने संदेश में कहा कि स्वस्थ पर्यावरण, सुरक्षित भविष्य और सतत विकास के लिए वन संरक्षण जरूरी है। प्रशासन ने लोगों से तथ्य जानने, संरक्षण कार्यों में सहयोग करने और जंगलों की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व
छत्तीसगढ़ वन विभाग







