

बिलासपुर। शिक्षा विभाग में लगभग 29.62 लाख रुपये के कथित गबन का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में कोटा थाना पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य आरोपी अभी भी फरार है। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद भी कई बड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिन पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।


यह मामला कांग्रेस नेता अंकित गौरहा की शिकायत के बाद उजागर हुआ। उन्होंने मुख्य सचिव, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से इस संबंध में शिकायत की थी। शिकायत के आधार पर नरेंद्र प्रसाद मिश्रा की रिपोर्ट पर अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।
एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरा फरार..
पुलिस के अनुसार, थाना कोटा में अपराध क्रमांक 171/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया है।इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। जांच में सामने आया कि शासकीय कर्मचारी रहते हुए आरोपियों ने वेतन और अन्य भत्तों में हेराफेरी कर सितंबर 2024 से नवंबर 2025 के बीच 29 लाख 62 हजार 222 रुपये का गबन किया।

इस मामले में आरोपी देवेंद्र कुमार पालके (38 वर्ष), निवासी धरमपुरा, करगी रोड कोटा को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। वहीं, सहायक ग्रेड-02 के पद पर कार्यरत नवल सिंह पैकरा अभी भी फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
बड़े अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल..
कार्रवाई के बावजूद मामला कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शिकायत में तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी कोटा और वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए गए थे। आरोप है कि यह पूरा वित्तीय अनियमितताओं का मामला उनके कार्यकाल में हुआ, लेकिन अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि संबंधित अधिकारी को पदोन्नति मिलने की जानकारी सामने आई है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
फर्जी नियुक्तियों का मामला भी ठंडे बस्ते में..
इस पूरे प्रकरण में तीन फर्जी अनुकंपा नियुक्तियों का मामला भी शामिल है। इसमें जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और बाबू सुनील यादव पर गंभीर आरोप लगे हैं। बावजूद इसके, इस दिशा में अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई है।
इससे यह आशंका जताई जा रही है कि जांच को सीमित दायरे में रखकर बड़े जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
‘पूरी सच्चाई सामने आने तक संघर्ष जारी रहेगा’
कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने कहा कि यह मामला सिर्फ शुरुआत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल पर आरोपियों को बचाने के प्रयास के आरोप लग रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक इस घोटाले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
शिक्षा विभाग में हुए इस कथित घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक गिरफ्तारी जरूर हुई है, लेकिन असली परीक्षा अब यह है कि क्या जांच बड़े अधिकारियों तक पहुंचेगी या मामला सीमित दायरे में ही सिमट कर रह जाएगा।



