
बारनवापारा अभ्यारण्य में वन विभाग की पहल, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर और ब्यूटी पार्लर का पांच दिवसीय प्रशिक्षण; ग्रामीणों को अतिरिक्त आय का मिलेगा अवसर..

बलौदाबाजार। वन्यजीव संरक्षण को केवल जंगल और वन्यप्राणियों की सुरक्षा तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने की दिशा में वन विभाग ने पहल शुरू की है। वन्यजीव संरक्षण सप्ताह एवं सेवा संकल्प अभियान के तहत बारनवापारा अभ्यारण्य से जुड़े 18 गांवों के 60 युवक-युवतियों को रोजगारमूलक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वन विभाग बारनवापारा अभ्यारण्य, बलौदाबाजार वनमंडल की ओर से यह प्रशिक्षण निशुल्क कराया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर काम के लिए आवश्यक हुनर उपलब्ध कराना है, ताकि वे प्रशिक्षण के बाद रोजगार या स्वरोजगार के माध्यम से अपनी आय बढ़ा सकें। इससे एक ओर युवाओं की कार्यक्षमता और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का साधन भी तैयार हो सकेगा।
तीन क्षेत्रों में दिया जा रहा प्रशिक्षण..
पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में युवाओं को मुख्य रूप से तीन रोजगारमूलक क्षेत्रों की जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर और ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण शामिल है। चयनित युवक-युवतियों को संबंधित कार्यों की बुनियादी जानकारी के साथ उन्हें काम के स्तर पर उपयोगी कौशल सिखाया जा रहा है।
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वन विभाग का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे कामों की लगातार जरूरत रहती है। यदि स्थानीय युवाओं को इन कार्यों का प्रशिक्षण मिल जाए तो उन्हें छोटे-छोटे कामों के लिए बाहर जाने की जरूरत कम होगी और गांव में ही सेवा देकर आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।
संरक्षण से जुड़े गांवों में आजीविका पर जोर..
बारनवापारा अभ्यारण्य के आसपास रहने वाले ग्रामीणों का जंगल और वन्यजीवों से सीधा जुड़ाव है। ऐसे में संरक्षण के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी सोच के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम को वन्यजीव संरक्षण सप्ताह और सेवा संकल्प अभियान से जोड़ा गया है।
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वन विभाग की यह पहल युवाओं को हुनर देने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक कदम है। प्रशिक्षण के बाद युवक-युवतियां अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में सेवाएं देकर आय का नया जरिया विकसित कर सकेंगे। इससे ग्रामीण युवाओं में कौशल विकास के साथ स्वावलंबन की भावना को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
संरक्षण और आजीविका को साथ लेकर चलने की कोशिश..
वन्यजीव संरक्षण तभी अधिक प्रभावी हो सकता है, जब जंगल से जुड़े स्थानीय समुदाय भी इस प्रयास में सहभागी बनें। रोजगारमूलक प्रशिक्षण जैसी पहल इसी भागीदारी को मजबूत करने का माध्यम बन सकती है। बारनवापारा क्षेत्र में शुरू किया गया यह कार्यक्रम युवाओं के कौशल विकास के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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