सात खच्चरों के रेस्क्यू से शुरू हुआ विवाद, अब वायरल ऑडियो ने बढ़ाई सियासी गर्माहट..

मोपका गौठान से खच्चरों को ईंट-भट्ठे ले जाने पर पशु सेवकों ने उठाए सवाल; महापौर पूजा विधानी और उनके पति अशोक विधानी से जुड़ी बातचीत का कथित ऑडियो वायरल, खच्चरों की मौजूदा स्थिति और ऑडियो की सत्यता पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी..

बिलासपुर। शहर में सात खच्चरों के रेस्क्यू और उनके रखरखाव को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कथित वायरल ऑडियो के कारण चर्चा में है। पशु सेवकों ने आरोप लगाया है कि तिफरा और जरहाभाठा से रेस्क्यू किए गए खच्चरों को मोपका गौठान से हटाकर महापौर पूजा विधानी के पति अशोक विधानी के ईंट-भट्ठे ले जाया गया। पशु सेवक निधि तिवारी और सपना क्षत्री ने खच्चरों को वापस गौठान में रखने तथा पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। इस बीच मोबाइल पर हुई बातचीत का एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, ऑडियो की प्रामाणिकता, उसमें सुनाई देने वाली आवाजों की पहचान और बातचीत के पूरे संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि नही हुई है।

रेस्क्यू के बाद गौठान में रखे गए थे खच्चर..

पशु सेवकों के मुताबिक, 20 अगस्त को उन्होंने तिफरा क्षेत्र से छह और जरहाभाठा से एक खच्चर का रेस्क्यू किया था। इसके बाद सातों खच्चरों को मोपका गौठान में रखा गया, जहां उनके भोजन और पानी की व्यवस्था की गई थी। पशु सेवकों का कहना है कि रेस्क्यू के बाद उनकी देखभाल की जिम्मेदारी निभाई जा रही थी और वे खच्चरों की स्थिति पर नजर रख रहे थे।

विवाद तब सामने आया, जब पशु सेवकों ने आरोप लगाया कि 8 अक्टूबर को सातों खच्चरों को उनकी जानकारी के बिना गौठान से हटाकर ईंट-भट्ठे पहुंचा दिया गया। उनका सवाल है कि जिन पशुओं को रेस्क्यू कर सुरक्षित रखने और उनकी देखभाल के उद्देश्य से गौठान में रखा गया था, उन्हें वहां से हटाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया। पशु सेवकों ने खच्चरों की वर्तमान स्थिति की जानकारी सार्वजनिक करने और उन्हें वापस गौठान में रखने की मांग की है।

कथित ऑडियो ने बढ़ाई मामले की चर्चा..

खच्चरों को हटाए जाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच मोबाइल फोन पर हुई बातचीत का एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आरोप लगाया जा रहा है कि इस बातचीत में महापौर पूजा विधानी और उनके पति अशोक विधानी की आवाज है। पशु सेवकों के साथ बातचीत के दौरान कथित तौर पर मेयर पद का हवाला देते हुए धमकी भरे लहजे में बात किए जाने का दावा भी किया जा रहा है।

हालांकि, वायरल ऑडियो को लेकर अभी सावधानी बरतने की जरूरत है। इसकी स्वतंत्र तकनीकी जांच और आवाजों की पुष्टि के बिना यह निष्कर्ष निकालना उचित नही होगा कि रिकॉर्डिंग पूरी तरह वास्तविक है या उसमें कही गई बाते किस परिस्थिति में कही गई थी। ऑडियो का पूरा अंश, बातचीत से पहले और बाद का संदर्भ तथा संबंधित पक्षो का स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही इस पहलू पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

खच्चरों को हटाने का आधार क्या था?

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल सातों खच्चरों को मोपका गौठान से हटाने की वजह और प्रक्रिया को लेकर है। क्या उन्हें किसी अधिक उपयुक्त स्थान पर ले जाया गया, क्या इसके लिए संबंधित जिम्मेदारो की अनुमति ली गई थी और क्या पशुओ के भोजन, पानी तथा देखभाल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है-इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है।

यदि खच्चरों को किसी वैकल्पिक स्थान पर ले जाया गया है, तो उनकी वर्तमान स्थिति, वहां उपलब्ध सुविधाओ और देखभाल की जिम्मेदारी के संबंध में स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। वही, यदि पशुओ को हटाने की प्रक्रिया में नियमो या निर्धारित व्यवस्था का उल्लंघन हुआ है, तो तथ्यों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल इन पहलुओं पर स्वतंत्र रूप से पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

जांच से ही स्पष्ट होगी जिम्मेदारी..

मामले में खच्चरों के रेस्क्यू से लेकर उनके रखरखाव और बाद में स्थान परिवर्तन तक की पूरी प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण है। इसके लिए गौठान के रिकॉर्ड, खच्चरों को ले जाने से संबंधित जानकारी, जिम्मेदार व्यक्तियों के बयान और उनकी वर्तमान स्थिति का सत्यापन किया जा सकता है। इसी तरह वायरल ऑडियो की मूल रिकॉर्डिंग और उसके संदर्भ की जांच से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि बातचीत में वास्तव में क्या कहा गया था।

पशु सेवको की शिकायत और आरोपो पर संबंधित पक्षो का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर फिलहाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नही होगा। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी मामले की जांच कर खच्चरों की स्थिति, उन्हें स्थानांतरित करने के आधार और वायरल ऑडियो से जुड़े सवालों पर क्या तथ्य सामने लाते हैं।