
खजुरी नवागांव में एक ही खसरे पर दो गतिविधियों के आरोप ; ग्रामीण बोले – शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नही, खनिज विभाग की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल..अब कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू..

बिलासपुर। सकरी थाना क्षेत्र के ग्राम खजुरी नवागांव में शासकीय भूमि के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पंचायत की शासकीय भूमि खसरा नंबर 823/1 पर कथित रूप से मुरूम और चिल्फी पत्थर की खुदाई के बाद अब इसी जमीन पर ईंट भट्ठा संचालित होने की जानकारी सामने आई है। एक ही खसरे में उत्खनन और व्यावसायिक गतिविधि के आरोपों ने संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों के अनुसार राजस्व रिकॉर्ड में उक्त भूमि छोटे-बड़े झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज है। ऐसे में वहां मुरूम-पत्थर की खुदाई और ईंट भट्ठे का संचालन किस अनुमति के आधार पर हुआ, यह जांच का प्रमुख बिंदु है। मुरूम जैसे लघु खनिज के उत्खनन के लिए लागू नियमों के तहत संबंधित अनुमति आवश्यक होती है। इसी तरह ईंट भट्ठे के लिए मिट्टी के उपयोग और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रावधानों का पालन भी जरूरी है।
जांच टीम पहुंची तो नही मिली मशीन..
कथित अवैध उत्खनन की शिकायत और मीडिया में मामला सामने आने के बाद खनिज विभाग, तखतपुर एसडीएम, तहसीलदार, सकरी नायब तहसीलदार, आरआई, पटवारी और टास्क फोर्स की टीम ने मौके का निरीक्षण किया। टीम को वहां उत्खनन करती मशीन या वाहन नही मिला। मौके पर 15 फीट से अधिक गहरी खुदाई और बड़े गड्ढे होने की बात सामने आई है। ऐसे में अब यह पता लगाना जरूरी है कि कितनी मात्रा में मुरूम-पत्थर निकाला गया और उसके लिए कोई वैध अनुमति थी या नही।
ईंट भट्ठे से बढ़ा जांच का दायरा..
उसी खसरे पर कथित ईंट भट्ठा संचालित होने की जानकारी सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। प्रशासन को यह भी जांचना होगा कि भट्ठा कब से चल रहा है, इसे कौन संचालित कर रहा है और भूमि उपयोग, मिट्टी की खुदाई तथा भट्ठे के संचालन के लिए आवश्यक स्वीकृतियां ली गई थी या नही। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो भूमि उपयोग, खनिज नियमों, पर्यावरणीय प्रावधानों और शासन को संभावित राजस्व नुकसान के आधार पर कार्रवाई की स्थिति भी स्पष्ट करनी होगी।
ग्रामीणों ने उठाए कार्रवाई पर सवाल..
ग्रामीणों का दावा है कि क्षेत्र में लंबे समय से मशीनों और भारी वाहनों की आवाजाही होती रही है। उत्खनन और ईंट भट्ठे को लेकर कई बार शिकायत किए जाने तथा गांव में विरोध की बात भी कही गई है। शिकायत करने वालों को कथित धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नही हुई है।
मिलीभगत के आरोप, जांच से खुलेगा सच..
ग्रामीणों के बीच विभागीय मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है, लेकिन फिलहाल इसका कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। ऐसे में जांच का अहम सवाल यह है कि यदि गतिविधियां लंबे समय से चल रही थी तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी कब हुई और शिकायतों के बाद क्या कार्रवाई की गई। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जा सकती है। वहीं मिलीभगत के ठोस प्रमाण मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई का आधार बनेगा।
कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश..
मामले की जानकारी मिलने पर जिला कलेक्टर ने खनिज विभाग के उप संचालक को जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब शासकीय भूमि के खसरा नंबर के राजस्व रिकॉर्ड, भूमि की प्रकृति, कथित उत्खनन की मात्रा, ईंट भट्ठे के संचालन की अवधि और संबंधित अनुमतियों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल मामला जांच के अधीन है। जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि शासकीय भूमि का उपयोग किस आधार पर किया गया और नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं। इस प्रकरण ने शासकीय जमीन की निगरानी और शिकायतों पर समय पर कार्रवाई को लेकर जरूर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डिस्क्लेमर : खबर में शासकीय भूमि पर कथित उत्खनन और ईंट भट्ठे के संचालन से जुड़े आरोप ग्रामीणों की शिकायत और उपलब्ध जानकारी के आधार पर हैं। विभागीय मिलीभगत, धमकी अथवा नियमों के उल्लंघन के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नही हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही स्पष्ट होगी।







