ED ने कोर्ट में WhatsApp बातचीत का हवाला दिया, छह दिन की रिमांड मंजूर..

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने ED को पूछताछ के लिए उनकी छह दिन की रिमांड दे दी।


ED ने अदालत में बताया कि जांच के दौरान चेतन बोरघारिया और मामले में पहले से न्यायिक हिरासत में चल रहे उत्कर्ष चंद्राकर के बीच WhatsApp पर बातचीत की जानकारी सामने आई है। एजेंसी ने इस बातचीत और दोनों के बीच संपर्क के बारे में पूछताछ के लिए रिमांड मांगी थी। कोर्ट ने ED की मांग स्वीकार कर ली।
बातचीत के बारे में पूछताछ..
रिमांड के दौरान ED चेतन बोरघारिया से उत्कर्ष चंद्राकर के साथ उनके संपर्क और WhatsApp पर हुई बातचीत के बारे में जानकारी लेगी। एजेंसी यह भी जानने का प्रयास करेगी कि इस संपर्क का CGPSC मामले की जांच से कोई संबंध है या नहीं।अभी तक सामने आई जानकारी के आधार पर चेतन बोरघारिया की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है। उनकी गिरफ्तारी के बाद ED की पूछताछ और आगे की जांच में ही इससे जुड़े तथ्य स्पष्ट होंगे।
उत्कर्ष चंद्राकर से जुड़े पहलुओं की भी जांच..
ED के वकील सौरभ पांडेय ने अदालत में बताया कि जांच के दौरान उत्कर्ष चंद्राकर से संबंधित कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनमें अभ्यर्थियों तक परीक्षा के पेपर पहुंचने से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर रकम लिए जाने की बात भी जांच के दौरान सामने आने की जानकारी अदालत को दी गई है।हालांकि, इन बातों को लेकर अंतिम रूप से कोई निष्कर्ष अदालत की ओर से नहीं दिया गया है। ED इन्हीं पहलुओं की जांच कर रही है और इसी सिलसिले में चेतन बोरघारिया से भी पूछताछ की जाएगी।
उत्कर्ष को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था..
करीब छह दिन पहले ED ने उत्कर्ष चंद्राकर को अदालत में पेश किया था। उस समय ED ने उसकी रिमांड बढ़ाने की मांग नहीं की थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने उत्कर्ष चंद्राकर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
अब चेतन बोरघारिया की गिरफ्तारी के बाद ED की जांच में उनके और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच हुई WhatsApp बातचीत भी जांच का एक महत्वपूर्ण बिंदु बन गई है। छह दिन की रिमांड में एजेंसी इसी संपर्क और उससे जुड़े तथ्यों के बारे में पूछताछ करेगी।
मामले में किसी व्यक्ति की भूमिका या जिम्मेदारी के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।







