स्थायी सेवा देने की दिशा में आगे बढ़ी प्रक्रिया, नियम तैयार करने चार सदस्यीय समिति गठित..

नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ वन विभाग में लंबे समय से दैनिक वेतन पर काम कर रहे कर्मचारियों के लिए राहत और उम्मीद की खबर सामने आई है। 10 साल या उससे अधिक समय से विभाग में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को स्थायी सेवा देने की दिशा में प्रक्रिया अब आगे बढ़ गई है। इसके लिए सेवा की शर्तें और नए नियम तैयार करने चार सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति को 15 दिन के भीतर नियमों का प्रारूप तैयार कर सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।


वन विभाग ने ऐसे कर्मचारियों के लिए कुल 3630 पद मंजूर करने का प्रस्ताव भेजा था। इनमें 966 पद तीसरे स्तर के कर्मचारियों और 2664 पद चौथे स्तर के कर्मचारियों के लिए रखे गए हैं। इन पदों पर लंबे समय से दैनिक वेतन या अस्थायी व्यवस्था के तहत काम कर रहे कर्मचारियों को शामिल किए जाने का प्रस्ताव है।
42 करोड़ से अधिक का आएगा खर्च..
वन विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में इन पदों पर कर्मचारियों को रखने के लिए सालाना करीब 42.11 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। वित्त विभाग ने प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि इतनी बड़ी अतिरिक्त राशि के लिए इसे नए खर्च के रूप में बजट में शामिल करना होगा। साथ ही कर्मचारियों को स्थायी करने से जुड़े मामले में सामान्य प्रशासन विभाग की राय लेने की बात कही गई थी।
इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने वन विभाग के प्रस्ताव पर सहमति दे दी। 20 मई 2026 को वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने वन विभाग के प्रमुख अधिकारियों को पत्र भेजकर आगे की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
अब नियम बनाने की तैयारी..
सरकार से मिले निर्देश के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय ने चार सदस्यीय समिति बनाई है। समिति लंबे समय से काम कर रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवा और उनकी पात्रता का परीक्षण करेगी। इसके बाद उन्हें स्थायी सेवा में शामिल करने के लिए जरूरी नियम और सेवा की शर्तों का प्रारूप तैयार किया जाएगा।


समिति में छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव अमिताभ बाजपेयी को अध्यक्ष बनाया गया है। मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत्त मणिवासगन एस और वनमंडलाधिकारी गरियाबंद मयंक पाण्डेय को सदस्य बनाया गया है। उप वन संरक्षक (प्रशासन/अराजपत्रित) रौनक गोयल को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है।
15 दिन में सौंपना होगा प्रारूप..
समिति को पूरे मामले की जांच-पड़ताल कर सेवा की शर्तों और नियमों का प्रारूप तैयार करना है। इसके लिए 15 दिन की समय सीमा तय की गई है। समिति द्वारा तैयार प्रारूप प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख को सौंपा जाएगा। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
बजट में शामिल कराने की भी तैयारी..
3630 पदों के प्रस्ताव को नए खर्च और प्रथम अनुपूरक बजट में शामिल कराने के लिए वित्त विभाग की मंजूरी लेने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। यानी कर्मचारियों को स्थायी सेवा देने की प्रक्रिया अब केवल प्रस्ताव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए नियम तैयार करने और बजट की व्यवस्था करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।
अंतिम फैसला अभी बाकी..
लंबे समय से वन विभाग में दैनिक वेतन पर काम कर रहे कर्मचारियों के लिए यह पहल बड़ी उम्मीद लेकर आई है। हालांकि अभी इन पदों को अंतिम मंजूरी मिलना, बजट की स्वीकृति और सेवा के नए नियम जारी होना बाकी है। इसलिए कर्मचारियों को स्थायी सेवा मिलने का अंतिम फैसला इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही होगा। फिलहाल नियम बनाने के लिए समिति का गठन होने से वर्षों से इंतजार कर रहे कर्मचारियों की उम्मीद जरूर बढ़ गई है।







