23 टन खैर से खुला 120 करोड़ के कथित तस्करी नेटवर्क का राज, ओडिशा से दो गिरफ्तार..

फर्जी बिलों के सहारे 120 करोड़ की खैर का कथित कारोबार, ओडिशा से दो गिरफ्तार..

दो साल में ओडिशा से हिमाचल तक खैर लकड़ी पहुंचाने का पुलिस का दावा, 8 शेल कंपनियां और 10 से ज्यादा म्यूल खातों की जांच..

रायपुर,महासमुंद। पिथौरा में पकड़ी गई खैर लकड़ी की खेप की जांच अब एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क तक पहुंच गई है। महासमुंद पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल से जुड़े कथित सिंडिकेट ने पिछले करीब दो वर्षों में ओडिशा से हिमाचल प्रदेश तक 120 करोड़ रुपए से अधिक कीमत की खैर लकड़ी का अवैध कारोबार किया। इस कारोबार को कागजों में वैध दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी इनवॉयस तैयार किए जाते थे।

पुलिस की तकनीकी और दस्तावेजी जांच में 8 शेल कंपनियों के जरिए इनवॉयस तैयार किए जाने तथा लेनदेन की रकम को अलग-अलग खातों में भेजने के लिए 10 से ज्यादा म्यूल बैंक खातों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। अब पुलिस लकड़ी की सप्लाई से लेकर फर्जी बिल तैयार करने और पैसों के लेनदेन तक की पूरी कड़ी खंगाल रही है।

फर्जी इनवॉयस देने वाले दो फर्म संचालक गिरफ्तार..

पुलिस ने मामले में ओडिशा से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें पारितोष मिश्रा (47), संचालक पीयूष इंटरप्राइजेज, निवासी बलांगीर और अखिलेश सिंघल (52), संचालक सिंघल इंटरप्राइजेज, निवासी बड़ाबाजार, संबलपुर शामिल हैं। दोनों को 14 सितंबर 2026 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया।

पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आया कि दोनों फर्मों से कथित तौर पर ऐसे इनवॉयस उपलब्ध कराए जाते थे, जिनका इस्तेमाल खैर लकड़ी के अवैध परिवहन को कागजों में वैध कारोबार दिखाने के लिए किया जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन फर्मों के जरिए कितने लेनदेन किए गए और नेटवर्क में इनकी भूमिका कितनी थी।

23,350 किलो खैर की खेप से खुली कड़ियां..

मामले की जांच उस समय शुरू हुई जब पिथौरा क्षेत्र में 23,350 किलो खैर लकड़ी के अवैध परिवहन का मामला सामने आया। वन विभाग की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने लकड़ी के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की। इसी दौरान एनटीपीएस एनओसी में कथित कूटरचना किए जाने की जानकारी सामने आई। दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल आगे बढ़ी तो जांच की कड़ियां दूसरे राज्यों तक पहुंचीं। पुलिस के मुताबिक, इसी जांच में फर्जी इनवॉयस, कथित शेल कंपनियों और बैंक खातों के बीच संबंधों की जानकारी सामने आई।

7 सितंबर को 81 लाख रुपए नकद मिले..

पुलिस ने इससे पहले 7 सितंबर को मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल के ठिकाने पर दबिश देकर 81 लाख रुपए नकद जब्त किए थे। इसके बाद पुलिस ने बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेनदेन की जांच तेज की।जांच में कथित तौर पर सामने आया कि तस्करी से जुड़ी रकम को सीधे एक खाते में रखने के बजाय अलग-अलग बैंक खातों में भेजा जाता था। पुलिस इन खातों के जरिए हुए लेनदेन की कड़ियां जोड़ रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रकम किन लोगों या संस्थाओं तक पहुंची।

ओडिशा से हिमाचल तक फैले नेटवर्क की जांच..

पुलिस के अनुसार, अब जांच का दायरा खैर लकड़ी की एक खेप से बढ़कर पूरे नेटवर्क तक पहुंच गया है। पुलिस यह पता लगा रही है कि खैर की लकड़ी कहां से जुटाई जाती थी, उसे किन रास्तों से छत्तीसगढ़ और दूसरे राज्यों तक भेजा जाता था तथा इस प्रक्रिया में किन लोगों और फर्मों की भूमिका थी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कथित फर्जी दस्तावेज कहां तैयार किए जाते थे और उनके आधार पर लकड़ी को किस तरह वैध कारोबार का स्वरूप दिया जाता था।

कथित अवैध कमाई से बनाई संपत्तियों की भी जांच..

मामले में सामने आए वित्तीय लेनदेन के आधार पर पुलिस अब कथित अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों की जानकारी भी जुटा रही है। पुलिस के मुताबिक, महासमुंद पुलिस, वन विभाग और संबंधित वित्तीय एजेंसियों के समन्वय से ऐसी संपत्तियों की पहचान की जा रही है। इनके संबंध में कानून के तहत कुर्की और राजसात की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।

अन्य आरोपियों तक पहुंचने में जुटी पुलिस..

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही है। पुलिस का कहना है कि फर्जी इनवॉयस उपलब्ध कराने, लकड़ी की सप्लाई और रकम के लेनदेन में शामिल अन्य लोगों की पहचान के लिए तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों को जोड़ा जा रहा है।

पिथौरा थाने में वन परिक्षेत्र अधिकारी की रिपोर्ट पर दर्ज इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट और भारतीय वन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ही कथित 120 करोड़ रुपए के कारोबार और पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।