15 साल में 45 से 106 हेक्टेयर हुआ अतिक्रमण, अब पूरा कोर क्षेत्र खाली कराया..

USTR में बड़ी कार्रवाई : महिला वनबल ने संभाली कमान, ISRO की तस्वीरों और ड्रोन मैपिंग से हुआ सीमांकन; 166 आरोपियों पर केस, 40 गिरफ्तार..

गरियाबंद,16 सितंबर। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) के सीतानदी कोर क्षेत्र में लंबे समय से फैले अतिक्रमण के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। अभियान के दौरान करीब 106 हेक्टेयर वन क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। खास बात यह रही कि कार्रवाई में चार वन प्रभागों से आई महिला वन अधिकारियों और कर्मचारियों ने अभियान की कमान संभाली। जिला प्रशासन और पुलिस के सहयोग से की गई इस कार्रवाई के बाद अब मुक्त कराई गई जमीन पर जंगल और वन्यजीव आवास को फिर से विकसित करने का काम भी शुरू कर दिया गया है।

वन विभाग के अनुसार यह इलाका करीब 15 साल से अतिक्रमण की समस्या से प्रभावित था। वर्ष 2011-13 के दौरान दर्ज रिकॉर्ड में अतिक्रमण का क्षेत्र करीब 45 हेक्टेयर बताया गया था। समय के साथ अतिक्रमण बढ़ता गया और इसका दायरा करीब 106 हेक्टेयर तक पहुंच गया। अब विभाग ने पूरे क्षेत्र का वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है।

सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला कैसे बढ़ता गया अतिक्रमण..

इस कार्रवाई में केवल पुराने राजस्व और वन रिकॉर्ड पर निर्भर नहीं रहा गया। USTR ने ISRO की सैटेलाइट इमेजरी और DGPS आधारित ड्रोन मैपिंग का इस्तेमाल किया। अलग-अलग वर्षों की सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन कर यह देखा गया कि वन क्षेत्र में अतिक्रमण किस तरह और कितने क्षेत्र तक फैला। इसके बाद ड्रोन से मौके का सर्वे कराया गया और अतिक्रमित क्षेत्र का सटीक सीमांकन किया गया। इससे वर्तमान स्थिति का दस्तावेज तैयार करने के साथ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए वैज्ञानिक आधार मिला।

166 आरोपियों पर कार्रवाई, 40 की गिरफ्तारी..

इस मामले में वन विभाग ने कुल 166 आरोपियों को चिन्हित किया है। विभाग के अनुसार अब तक 40 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। अतिक्रमण से जुड़े मामलों में आरोपियों की ओर से लगाई गई अग्रिम जमानत याचिकाएं निचली अदालत में खारिज होने के बाद हाईकोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दी है। विभाग का कहना है कि आरोपियों को जांच और विवेचना में सहयोग करना होगा।वन विभाग अब मैदानी कार्रवाई के साथ उपलब्ध दस्तावेज, रिकॉर्ड और वैज्ञानिक सर्वेक्षण के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रखेगा।

जमीन खाली कराने के बाद अब जंगल लौटाने की तैयारी..

USTR की कार्रवाई सिर्फ अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है। मुक्त कराई गई जमीन को दोबारा वन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके तहत कंटूर ट्रेंच बनाए जा रहे हैं, जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण के उपाय किए जा रहे हैं तथा करीब 1,500 पौधे लगाए जा रहे हैं। वन विभाग का उद्देश्य है कि अतिक्रमण से मुक्त हुई जमीन पर प्राकृतिक वनस्पति दोबारा विकसित हो और धीरे-धीरे यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास में बदल सके।

हाथियों के कॉरिडोर के लिए भी अहम क्षेत्र..

मुक्त कराया गया वन क्षेत्र वन्यजीवों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह हाथी कॉरिडोर का हिस्सा है और महानदी के उद्गम क्षेत्र के करीब स्थित है। ऐसे क्षेत्र में वन आवास का सुरक्षित रहना हाथियों और दूसरे वन्यजीवों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है। वन क्षेत्र के लगातार बने रहने से वन्यजीवों को प्राकृतिक आवास और आवाजाही के रास्ते मिलते हैं। विभाग का मानना है कि जंगल का पुनर्स्थापन होने से आवास के बिखराव को कम करने और भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थितियों को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।

महिला वनबल ने संभाली अभियान की कमान..

अतिक्रमण हटाने के इस अभियान में धमतरी, गरियाबंद, कांकेर और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से तैनात महिला वन अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष भूमिका रही। संवेदनशील और कठिन भौगोलिक क्षेत्र में महिला वनबल ने मौके पर कार्रवाई का नेतृत्व किया।अभियान के दौरान वन अमले ने अतिक्रमित क्षेत्र को खाली कराने के साथ उसे दोबारा वन प्रबंधन के अधीन लाने की प्रक्रिया भी शुरू की।

ग्रामीणों ने भी दिया सहयोग..

कार्रवाई के दौरान घुरावाड़, बरबंधा और भुरसीडोंगरी गांवों के ग्रामीणों का भी सहयोग मिला। वन विभाग के अनुसार स्थानीय लोगों की भागीदारी वन क्षेत्र की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। विभाग अब मुक्त कराए गए क्षेत्र की नियमित निगरानी के साथ दोबारा अतिक्रमण रोकने पर भी जोर देगा।

चार साल में 1 हजार हेक्टेयर से अधिक वनभूमि मुक्त..

USTR में अतिक्रमण के खिलाफ यह अभियान लंबे समय से चल रहा है। विभाग के अनुसार पिछले चार वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में 1,000 हेक्टेयर से अधिक वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। अब सीतानदी कोर की 106 हेक्टेयर जमीन को मुक्त कराने के बाद यहां संरक्षण और पुनर्स्थापन के काम पर जोर दिया जा रहा है।

अतिक्रमण हटाने के साथ वैज्ञानिक सीमांकन, कानूनी कार्रवाई और वन क्षेत्र की बहाली को एक साथ आगे बढ़ाने की यह प्रक्रिया USTR के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विभाग का लक्ष्य है कि मुक्त कराई गई वनभूमि दोबारा अतिक्रमण की चपेट में न आए और आने वाले समय में इसे सुरक्षित वन्यजीव आवास के रूप में विकसित किया जा सके।