टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारण्यों में सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्ती ; रेंज और बीट स्तर तक अधिकारियों को अधिकार देने के निर्देश..


रायपुर। छत्तीसगढ़ के जंगल,टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारण्यों को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने के लिए वन विभाग ने अब कार्रवाई का दायरा जमीनी स्तर तक बढ़ाने की तैयारी की है। संरक्षित क्षेत्रों में प्रतिबंधित प्लास्टिक मिलने पर केवल समझाइश देने के बजाय तलाशी, जब्ती, प्लास्टिक हटाने और नियमों के तहत प्रशमन राशि वसूलने की कार्रवाई की जा सकेगी। इसके लिए सर्किल फॉरेस्ट ऑफिसर और बीट फॉरेस्ट ऑफिसर स्तर तक अधिकारियों को अधिकार देने के निर्देश जारी किए गए हैं।


प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव प्रबंधन एवं जैव विविधता संरक्षण) एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन कार्यालय की ओर से 19 अगस्त 2026 को जारी निर्देश में कहा गया है कि संरक्षित क्षेत्रों में प्लास्टिक के उपयोग पर पहले भी रोक के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्लास्टिक के इस्तेमाल और कचरे पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। इसे देखते हुए अब छत्तीसगढ़ प्लास्टिक एवं अन्य जैव-अनाशित सामग्री (उपयोग एवं निस्तारण का विनियमन) नियम, 2023 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने को कहा गया है।
जंगल में ये प्लास्टिक सामान प्रतिबंधित..


राज्य के नियमों के तहत प्लास्टिक कैरी बैग, नॉन-वूवन पॉलीप्रोपलीन बैग, प्लास्टिक और थर्मोकोल से बने डिस्पोजेबल कप, प्लेट, गिलास, कटोरे, चम्मच और स्ट्रॉ समेत कई वस्तुओं पर प्रतिबंध है। इसके अलावा तरल पदार्थ रखने वाले प्रतिबंधित प्लास्टिक कप-पाउच, खाद्य एवं अनाज की प्रतिबंधित प्लास्टिक पैकेजिंग, प्लास्टिक और थर्मोकोल की सजावटी सामग्री, प्लास्टिक झंडे, गुटखा-तंबाकू-पान मसाला के प्लास्टिक सैशे तथा शॉर्ट लाइफ पीवीसी के फ्लेक्स, बैनर और होर्डिंग भी प्रतिबंधित श्रेणी में हैं। 200 मिलीलीटर से कम क्षमता वाली पीईटी/पीईटीई पानी की बोतलों पर भी रोक है।
वन अधिकारी कर सकेंगे तलाशी और जब्ती..
नियमों में वन रेंज ऑफिसर अथवा उप वन संरक्षक द्वारा अधिकृत अधिकारी को प्लास्टिक नियमों के प्रवर्तन के लिए सक्षम बनाया गया है। इसी प्रावधान के आधार पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) ने वनमंडलाधिकारियों और उप वन संरक्षकों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्र के सर्किल और बीट फॉरेस्ट अधिकारियों को भी आवश्यक शक्तियों से अधिकृत करें।


इसका मतलब यह होगा कि अधिकृत वन अधिकारी अपने क्षेत्र में प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग या भंडारण की शिकायत मिलने पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई कर सकेंगे। जहां प्रतिबंधित प्लास्टिक या जैव-अनाशित कचरे का अनधिकृत ढेर मिला, वहां उसे हटाने की कार्रवाई भी की जा सकेगी।
नियमों में अपराध की प्रकृति और संबंधित व्यक्ति के आधार पर प्रशमन राशि निर्धारित है। पहली बार उल्लंघन करने पर व्यक्ति या स्ट्रीट वेंडर से 500 रुपये, दुकान या प्रतिष्ठान से 25 हजार रुपये और निर्माता से एक लाख रुपये तक की राशि ली जा सकती है। दूसरी बार अपराध पर यह राशि क्रमशः 1 हजार, 50 हजार और 2 लाख रुपये है। इसके बाद के अपराधों को अशमनीय रखा गया है।
टाइगर रिजर्वों में भी लागू होंगे सख्त प्रावधान..
निर्देश उदंती-सीतानदी, अचानकमार, इंद्रावती और गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व समेत प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारण्यों के लिए जारी किए गए हैं। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान तथा भोरमदेव, बारनवापारा और गोमर्डा अभ्यारण्य को भी नियमों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।


उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और बारनवापारा अभ्यारण्य के लिए जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित क्षेत्र के सर्किल और बीट फॉरेस्ट अधिकारियों को नियमों के तहत कार्रवाई के लिए अधिकृत एवं सशक्त किया जा सकता है।
पर्यटन स्थलों पर भी नजर..


प्लास्टिक नियमों की पहुंच केवल जंगल के अंदर तक सीमित नहीं है। नियमों में पर्यटन स्थल, इको-सेंसिटिव क्षेत्र, वन एवं आरक्षित वन, धार्मिक स्थल, होटल, ढाबे, बाजार, दुकानें और अन्य सार्वजनिक स्थान भी शामिल हैं। ऐसे में संरक्षित क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों, दुकानदारों, होटल-ढाबा संचालकों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर भी वन विभाग की निगरानी बढ़ सकती है।
शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे आम लोग..
नियमों के तहत कोई भी व्यक्ति, लोगों का समूह, स्थानीय निकाय, कल्याणकारी संगठन या औद्योगिक संगठन प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग की जानकारी संबंधित सक्षम अधिकारी को दे सकता है। ऐसे लोगों और संगठनों को अधिकारियों की कार्रवाई में सहयोग करने का भी प्रावधान है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए इस्तेमाल होगी जुर्माने की राशि..
नियमों के तहत वसूला गया जुर्माना और अपराध के प्रशमन के रूप में प्राप्त राशि राज्य सरकार के संबंधित खाते में जमा की जाएगी। इस राशि का उपयोग पर्यावरण संरक्षण और पर्यावरण से जुड़ी विभिन्न कार्ययोजनाओं में किया जाना है।


वन विभाग का उद्देश्य संरक्षित क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के बढ़ते खतरे को रोकना है, ताकि वन्यजीवों के साथ-साथ जंगल के प्राकृतिक पर्यावरण को भी प्लास्टिक प्रदूषण से बचाया जा सके।







