झीरम कांड : फैसले पर नहीं, एनआईए की जांच पर कांग्रेस ने उठाए सवाल..

जिला कांग्रेस बोली- अदालत के फैसले का सम्मान, लेकिन साजिश का सच सामने नहीं आया ; पूर्ण न्याय के लिए फिर अदालत का रुख करेंगे..

बिलासपुर। झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बिलासपुर जिला कांग्रेस ने कहा कि पार्टी को अदालत के फैसले पर कोई आपत्ति नहीं है और वह न्यायपालिका का सम्मान करती है, लेकिन एनआईए की जांच से कांग्रेस संतुष्ट नहीं है। पार्टी का कहना है कि अदालत के सामने एनआईए ने जो तथ्य और साक्ष्य रखे, उसी आधार पर फैसला आया है। ऐसे में घटना के पीछे कथित राजनीतिक साजिश और बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका का सच अब भी सामने नहीं आया है। कांग्रेस ने संकेत दिया कि इस मामले में पूर्ण न्याय की मांग को लेकर वह एक बार फिर अदालत का रुख करेगी।

शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा और ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि झीरम घाटी की घटना केवल नक्सली हमला नहीं थी, बल्कि इसके पीछे बड़ी साजिश होने के कई सवाल आज भी अनुत्तरित हैं। उन्होंने कहा कि एनआईए की जांच शुरू से ही दिशाहीन रही और राजनीतिक षड्यंत्र के पहलू की गंभीरता से जांच नहीं की गई।

इतनी बड़ी घटना सिर्फ छोटे नक्सलियों से संभव नहीं..

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि झीरम नरसंहार में एनआईए ने जिन 10 लोगों को गिरफ्तार किया और जिन्हें दोषी ठहराया गया, वे छोटे स्तर के नक्सली थे। उनका सवाल है कि इतनी बड़ी और सुनियोजित घटना केवल छोटे नक्सली कैडरों के स्तर पर कैसे संभव हो सकती है। कांग्रेस का दावा है कि घटना के शुरुआती एफआईआर में बड़े नक्सली नेताओं के नाम शामिल किए गए थे, लेकिन बाद में उन्हें हटा दिया गया। पार्टी ने पूछा कि ऐसा क्यों किया गया और उन नामों को हटाने का आधार क्या था।

कांग्रेस ने उठाए कई बड़े सवाल..

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने झीरम कांड की जांच को लेकर कई सवाल सामने रखे। उन्होंने पूछा कि यदि मामला केवल नक्सली हमले तक सीमित था तो घटना की पूरी साजिश का खुलासा क्यों नहीं हुआ? कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था क्यों हटाई गई थी और यात्रा का मार्ग किसके कहने पर बदला गया? हमले की पूरी योजना किसने बनाई थी और इसकी जानकारी किन लोगों को पहले से थी?

कांग्रेस नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि समय-समय पर जब बड़े नक्सली नेताओं ने आत्मसमर्पण किया, तब एनआईए ने उनसे झीरम कांड के संबंध में पूछताछ क्यों नहीं की। घटना में घायल होकर जीवित बचे लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान कितने लिए गए, इसे लेकर भी पार्टी ने सवाल खड़े किए।

घायलों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान नहीं लेने का आरोप..

सिद्धांशु मिश्रा और महेंद्र गंगोत्री ने आरोप लगाया कि झीरम हमले में घायल हुए और जीवित बचे पीड़ितों के बयान तक ठीक से दर्ज नहीं किए गए। उनका कहना है कि कई प्रभावित लोग शपथ पत्र के साथ जांच एजेंसियों के सामने पहुंचे, लेकिन उनके बयान जांच का हिस्सा नहीं बनाए गए।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी दावा किया कि घटना के कई सप्ताह बाद तक शहीदों और घायलों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज व्यवस्थित नहीं किए गए और कई जरूरी साक्ष्यों को लेकर भी सवाल बने रहे। उन्होंने पूछा कि घटना के दौरान मारे गए और घायल लोगों के मोबाइल फोन समेत अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को जांच में किस तरह शामिल किया गया।

एसआईटी की जांच रोकने पर भी सवाल..

कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से गठित एसआईटी की जांच को लेकर भी सवाल उठाए। नेताओं ने पूछा कि एनआईए ने राज्य पुलिस की एसआईटी को जांच करने से क्यों रोका? उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के दौरान जब राज्य में एसआईटी का गठन किया गया तो एनआईए जांच रोकने के लिए अदालत पहुंच गई। कांग्रेस का दावा है कि बाद में अदालत से एसआईटी की जांच के पक्ष में फैसला आने के बावजूद भाजपा सरकार ने जांच आगे नहीं बढ़ाई।

कांग्रेस नेताओं ने तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी और एडीजी नक्सल सहित उस समय के जिम्मेदार अधिकारियों से पूछताछ को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इतने बड़े हमले में सुरक्षा व्यवस्था, यात्रा के मार्ग में बदलाव और सुरक्षा हटाए जाने जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच किए बिना पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आ सकती।

भाजपा नहीं चाहती कि झीरम का पूरा सच सामने आए..

कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर झीरम कांड की जांच को प्रभावित करने का राजनीतिक आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा नहीं चाहती कि झीरम का पूरा सच जनता के सामने आए। कांग्रेस का आरोप है कि एनआईए की जांच की दिशा और कार्यप्रणाली से भी कई सवाल पैदा हुए हैं।

उन्होंने कहा कि झीरम में कांग्रेस ने अपने कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को खोया था। इसलिए पार्टी की मांग है कि मामले की जांच केवल हमले को अंजाम देने वालों तक सीमित न रहे, बल्कि इसके पीछे की पूरी साजिश, योजना, सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक और कथित राजनीतिक पहलुओं की भी निष्पक्ष जांच हो। कांग्रेस ने कहा कि वह इस मामले को लेकर कानूनी लड़ाई जारी रखेगी।

प्रेस वार्ता में ये रहे मौजूद..

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा, ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री, पूर्व विधायक शैलेश पांडे, पूर्व शहर अध्यक्ष विजय पाण्डेय, पंकज सिंह, गौरव एरी, सुभाष ठाकुर, मो. अयूब, रामेश्वर साहू सहित कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।