ओडिशा में लकड़ी तस्करी पर USTR का बड़ा शिकंजा, 3 परिसरों से 3-4 घनमीटर लकड़ी जब्त..

थर्मल ड्रोन और डॉग स्क्वाड की मदद से दासपुर में कार्रवाई, रायघर वन परिक्षेत्र के पुराने जब्ती रिकॉर्ड भी जांच के घेरे में..

गरियाबंद, 28 अगस्त। छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर वन संपदा की तस्करी के खिलाफ उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) ने बड़ी कार्रवाई की है। विशेष सूचना के आधार पर USTR की टीम ने ओडिशा के नबरंगपुर जिले के रायघर वन परिक्षेत्र अंतर्गत दासपुर गांव में 24 अगस्त को ओडिशा पुलिस और वन विभाग के सहयोग से तीन संदिग्ध परिसरों की तलाशी ली। कार्रवाई में करीब 3 से 4 घनमीटर लकड़ी जब्त की गई है। जब्त लकड़ी में सागौन सहित अन्य प्रजातियों की लकड़ी शामिल है। फिलहाल इसकी मात्रा की विस्तृत गणना और स्रोत की जांच की जा रही है।

ड्रोन से निगरानी, फिर चिन्हित ठिकानों पर तलाशी..

USTR को सीमा क्षेत्र में अवैध सागौन की लकड़ी के परिवहन और भंडारण की सूचना मिली थी। इसके बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की। करीब सुबह 10 बजे टीम दासपुर पहुंची। ओडिशा वन विभाग की ओर से आवश्यक तलाशी वारंट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोपहर करीब 12.30 बजे तलाशी शुरू की गई।

कार्रवाई से पहले क्षेत्र की थर्मल इमेजिंग ड्रोन से हवाई निगरानी की गई। ड्रोन से संदिग्ध परिसरों और लकड़ी के संभावित भंडारण स्थलों की पहचान की गई। इसके बाद टीम ने लक्षित तरीके से तलाशी ली। छिपाकर रखी गई लकड़ी और अन्य सामग्री की तलाश के लिए USTR के प्रशिक्षित डॉग स्क्वाड की ‘टीना’ को भी अभियान में शामिल किया गया।

तीन संदिग्ध परिसरों पर पहुंची टीम..

जांच के दौरान USTR टीम ने दासपुर निवासी तीन लोगों के परिसरों को चिह्नित कर तलाशी ली। इनमें कृष्ण कांत हलदर उर्फ किश्नो हलदर, अखिल सरकार और नगेन तालुकदार शामिल हैं।

बताया गया है कि कृष्ण कांत हलदर और अखिल सरकार कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद नहीं थे। कृष्ण कांत हलदर के परिसर पर BNSS की धारा 35(3) के तहत नोटिस चस्पा किया गया, जबकि संबंधित प्रक्रिया अन्य मामलों में भी अपनाई गई।

प्रथम दो परिसरों की तलाशी में बड़ी मात्रा में लकड़ी मिली। हालांकि, बरामद लकड़ी का पूरा हिस्सा अवैध है या नहीं, यह अभी जांच का विषय है।

साल की लकड़ी को लेकर अलग जांच..

अखिल सरकार के परिसर से मिली साल की लकड़ी को लेकर प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह लकड़ी ओडिशा क्षेत्र में विद्युत लाइन के कार्य के दौरान पेड़ों की कटाई से प्राप्त हुई हो सकती है। अखिल सरकार के विद्युत विभाग में लाइनमैन होने की जानकारी भी सामने आई है। वन विभाग अब यह सत्यापित कर रहा है कि लकड़ी वास्तव में सरकारी कार्य के दौरान काटे गए पेड़ों से ही प्राप्त हुई थी या नहीं और उसके परिवहन व भंडारण की अनुमति वैध थी या नहीं।

सागौन की लकड़ी ने बढ़ाई जांच की गंभीरता..

सबसे महत्वपूर्ण जांच कृष्ण कांत हलदर के परिसर से मिली सागौन की लकड़ी को लेकर चल रही है। USTR को प्रारंभिक स्तर पर ऐसी जानकारी मिली है कि यह लकड़ी रायघर वन परिक्षेत्र से वहां तक पहुंचाई गई हो सकती है। हालांकि, इसकी पुष्टि अभी दस्तावेजी जांच के बाद ही होगी।

इसी वजह से नबरंगपुर के DFO को रायघर रेंज कार्यालय के रिकॉर्ड और पहले जब्त की गई सागौन लकड़ी से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन और ऑडिट कराने के लिए सूचित किया गया है।

पुराने जब्ती मामलों के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में..

इस कार्रवाई ने रायघर वन परिक्षेत्र में पहले हुई वन अपराध संबंधी कार्रवाइयों के रिकॉर्ड को भी महत्वपूर्ण बना दिया है। USTR अधिकारियों और RCCF, कोरापुट की ओर से रायघर रेंज कार्यालय से पूर्व की कार्रवाई और जब्ती के दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए पहले भी पत्राचार किया गया है।

विशेष रूप से POR No. 170/16 दिनांक 22 जनवरी 2025 और POR No. 01/17 दिनांक 6 अक्टूबर 2024 से जुड़े मामलों में पिकअप वाहन और बड़ी मात्रा में सागौन जब्त किए जाने की जानकारी है। USTR के अनुसार इन मामलों से संबंधित जब्ती मेमो और अन्य जरूरी दस्तावेज अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

अब जांच इस दिशा में भी आगे बढ़ सकती है कि पूर्व में जब्त लकड़ी कहां से आई थी, वर्तमान में वह किस स्थिति में है और उसका निस्तारण अथवा हस्तांतरण किस प्रक्रिया से हुआ। हालांकि, किसी अधिकारी या व्यक्ति की संलिप्तता के संबंध में फिलहाल कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। इसके लिए दस्तावेजों और जब्त माल का विस्तृत सत्यापन जरूरी होगा।

पहले भी सामने आ चुका है इसी इलाके में तस्करी का पैटर्न..

दासपुर-सोनपुर-रायघर क्षेत्र में लकड़ी तस्करी को लेकर USTR पहले भी कार्रवाई कर चुका है। दिसंबर 2023 में छत्तीसगढ़ से अवैध रूप से प्राप्त सागौन की लकड़ी को ओडिशा के सोनपुर क्षेत्र में ले जाने की सूचना पर USTR ने ओडिशा वन अधिकारियों के साथ संयुक्त कार्रवाई की थी।

उस समय संदिग्ध परिसरों की तलाशी ली गई थी। मीडिया रिपोर्टों में चामेंडा गांव के आसपास सागौन के अवैध कटान और उसे स्लीपर के रूप में तैयार कर दूसरे क्षेत्र में ले जाने की जानकारी भी सामने आई थी। इस कार्रवाई में 30 से अधिक लोगों के पकड़े जाने की जानकारी सामने आई थी।

ऐसे में मौजूदा कार्रवाई को केवल एक स्थान से लकड़ी बरामद होने की घटना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। बार-बार सामने आ रही सूचनाओं के आधार पर अब लकड़ी के स्रोत से लेकर परिवहन, भंडारण, प्रसंस्करण और अंतिम खरीदार तक पूरी सप्लाई चेन की जांच पर जोर दिया जा रहा है।

नेटवर्क की तलाश में छह बिंदुओं पर जांच..

USTR द्वारा जब्त लकड़ी के संबंध में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच की जा रही है। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि लकड़ी वास्तव में कहां से काटी गई, इसे किसने खरीदा या परिवहन किया, इसे दासपुर तक कैसे पहुंचाया गया और इसका अंतिम उपयोग कहां होना था।

जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या इस पूरे मामले के पीछे कोई संगठित अंतरराज्यीय लकड़ी तस्करी नेटवर्क काम कर रहा है। इसके अलावा लकड़ी के परिवहन और भंडारण के लिए आर्थिक मदद या अन्य किसी तरह की सुविधा उपलब्ध कराने वालों की भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी।

एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि बरामद लकड़ी का कोई हिस्सा पहले किसी वन अपराध में जब्त किए गए माल से जुड़ा है या नहीं। इसके लिए पुराने जब्ती रिकॉर्ड और वर्तमान में मिले लकड़ी के स्टॉक का मिलान किया जा सकता है।

वन अपराध के खिलाफ दर्ज हुआ मामला..

कार्रवाई के बाद USTR ने विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत POR No. 96/13 दिनांक 24 अगस्त 2026 दर्ज किया है। मामले में संबंधित वन एवं वन्यजीव कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है। जब्त लकड़ी की मात्रा की अंतिम गणना और उसकी वैधता से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण जारी है।

तलाशी ओडिशा के सक्षम वन अधिकारियों द्वारा जारी तलाशी वारंट के आधार पर की गई। इससे USTR की टीम को स्थानीय पुलिस और वन विभाग के समन्वय से ओडिशा क्षेत्र में तलाशी और जब्ती की कार्रवाई करने का कानूनी आधार मिला।

सीमा पार अपराध पर संयुक्त कार्रवाई पर जोर..

USTR का मानना है कि छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा जैसे क्षेत्रों में वन अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल एक राज्य की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। तस्कर प्रशासनिक सीमाओं का फायदा उठाकर लकड़ी को एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुंचा सकते हैं। ऐसे में दोनों राज्यों के वन और पुलिस विभागों के बीच लगातार सूचना साझा करना, संयुक्त गश्त और कार्रवाई जरूरी है।

मौजूदा अभियान में खुफिया सूचना, थर्मल ड्रोन, प्रशिक्षित कैनाइन स्क्वाड, लक्षित तलाशी और अंतरराज्यीय समन्वय का इस्तेमाल किया गया। USTR अब जब्त लकड़ी के स्रोत और गंतव्य का पता लगाने के साथ इस बात की भी जांच कर रहा है कि इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।

अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई का उद्देश्य सिर्फ अवैध लकड़ी बरामद करना नहीं, बल्कि यदि कोई संगठित तस्करी तंत्र सक्रिय है तो उसके पूरे नेटवर्क तक पहुंचना है। सीमा क्षेत्र में वन एवं वन्यजीव अपराधों की रोकथाम के लिए पड़ोसी राज्यों की एजेंसियों के साथ समन्वय और संयुक्त प्रवर्तन को आगे भी मजबूत किया जाएगा।