मरवाही में हाथियों के साथ सह-अस्तित्व का संदेश, 8 मृतकों के परिजनों से मिले कलेक्टर-DFO..

विश्व हाथी दिवस पर सिवनी पंचायत में जागरूकता कार्यक्रम, ‘हाथी मित्रों’ का सम्मान ; ग्रामीणों को सुरक्षा और सतर्कता के उपाय बताए..

मरवाही। विश्व हाथी दिवस के अवसर पर मरवाही वनमंडल के सिवनी पंचायत में वन्यजीव संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हाथियों की मौजूदगी वाले वन क्षेत्रों में ग्रामीणों की सुरक्षा, समय पर सूचना और वन विभाग के साथ बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।

मरवाही क्षेत्र के घने जंगलों में हाथियों की लगातार मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर हाथियों के व्यवहार और उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखने के संबंध में जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि हाथियों को लेकर सही जानकारी और समय पर सतर्कता ही मानव-हाथी संघर्ष को कम करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

संघर्ष में जान गंवाने वालों के परिवारों से मिले अधिकारी..

कार्यक्रम का सबसे संवेदनशील पहलू पिछले पांच वर्षों में मानव-हाथी संघर्ष के कारण जान गंवाने वाले 8 लोगों के परिजनों से अधिकारियों की मुलाकात रही। कलेक्टर विजय दयाराम के. और DFO कुमार निशांत ने परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और उनकी समस्याओं तथा क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़े विषयों पर चर्चा की।

अधिकारियों ने ग्रामीणों से कहा कि वन विभाग का उद्देश्य वन्यजीवों का संरक्षण करने के साथ-साथ जंगल के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान और ग्रामीणों के सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

‘हाथी मित्रों’ के योगदान को मिला सम्मान..

कार्यक्रम में हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने और ग्रामीणों को समय रहते सतर्क करने में सक्रिय भूमिका निभाने वाले ‘हाथी मित्रों’ को सम्मानित किया गया। अधिकारियों ने उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि जंगल और गांव के बीच ये स्वयंसेवक एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर रहे हैं। हाथियों की मौजूदगी की सूचना समय पर वन विभाग तक पहुंचाने और ग्रामीणों को सतर्क करने में हाथी मित्रों की भूमिका को कार्यक्रम में विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

सिर्फ हाथियों को भगाना नहीं, सुरक्षित सह-अस्तित्व जरूरी

कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि मानव-हाथी संघर्ष का स्थायी समाधान केवल हाथियों को गांवों से दूर खदेड़ना नहीं है। इसके लिए हाथियों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के साथ ग्रामीणों को जागरूक करना और दोनों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व का वातावरण तैयार करना जरूरी है।

ग्रामीणों को समझाया गया कि हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में अकेले जंगल की ओर जाने से बचें, हाथियों के करीब न जाएं और उनकी गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना दें। किसी भी अफवाह के बजाय वन विभाग से प्राप्त प्रमाणिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील भी की गई।

ग्रामीणों की भागीदारी से मजबूत होगा संरक्षण..

कार्यक्रम में कलेक्टर, DFO सहित वन विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और क्षेत्र में सुरक्षा एवं राहत व्यवस्था को लेकर चर्चा की।

विश्व हाथी दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम इस संदेश के साथ समाप्त हुआ कि हाथियों का संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। वन विभाग और ग्रामीण मिलकर सतर्कता, संवाद और सहयोग की व्यवस्था मजबूत करें तो मानव-हाथी संघर्ष को काफी हद तक कम किया जा सकता है।