सहायक पंजीयक ने कार्यकारिणी का 31 जुलाई का प्रस्ताव किया निरस्त, कहा- पदों में बदलाव संविधान और नियमों के अनुसार ही संभव; वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए धारा-32 का रास्ता खुला..

बिलासपुर। बिलासपुर प्रेस क्लब में पिछले कुछ दिनों से चल रहे पदाधिकारियों के विवाद पर सहायक पंजीयक, फर्म्स एवं संस्थाएं ने बड़ा फैसला सुनाया है। विभाग ने 6 अगस्त को जारी आदेश में स्पष्ट कर दिया कि 31 जुलाई को हुई कार्यकारिणी की बैठक में सचिव और कोषाध्यक्ष के प्रभार में किया गया बदलाव नियमों के अनुरूप नहीं था। इसलिए उस प्रस्ताव को अमान्य घोषित करते हुए निरस्त कर दिया गया है। इसके साथ ही निर्वाचित सचिव संदीप करिहार और कोषाध्यक्ष किशोर कुमार सिंह को उनके मूल पदों पर यथावत बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
यह मामला तब विवादों में आया था जब प्रेस क्लब अध्यक्ष अजित मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित कार्यकारिणी बैठक में सचिव और कोषाध्यक्ष के प्रभार में बदलाव का निर्णय लिया गया। इस फैसले का क्लब के भीतर विरोध हुआ और दोनों पदाधिकारियों ने सहायक पंजीयक के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने पद परिवर्तन को नियम विरुद्ध बताते हुए हस्तक्षेप की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान विभाग ने प्रेस क्लब के पंजीकृत संविधान, उपलब्ध दस्तावेजों और छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के प्रावधानों का परीक्षण किया। इसके बाद सहायक पंजीयक ने माना कि कार्यकारिणी को निर्वाचित पदाधिकारियों के पदों में इस प्रकार परिवर्तन करने का अधिकार नहीं है। संस्था के संविधान में इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है, इसलिए 31 जुलाई का प्रस्ताव प्रभावहीन माना गया।
आदेश के बाद अब प्रेस क्लब में सचिव और कोषाध्यक्ष का प्रभार पूर्ववत रहेगा। साथ ही संस्था के प्रशासनिक और वित्तीय संचालन को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिससे भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।
आदेश में साफ हुई अधिकारों की सीमा..
सहायक पंजीयक ने अपने आदेश में अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष, कार्यकारिणी और सामान्य सभा के अधिकार एवं जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया है। आदेश में कहा गया है कि संस्था का संचालन उसके पंजीकृत संविधान के अनुसार ही होगा। किसी भी पदाधिकारी के अधिकार, दायित्व या पद में परिवर्तन निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकता है। बैठकों की सूचना, प्रस्ताव, मतदान, कार्यवाही और सामान्य सभा की भूमिका भी नियमावली के अनुरूप ही होगी।
संयुक्त हस्ताक्षर से ही होगा बैंक संचालन..
विभाग ने क्लब की वित्तीय व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। आदेश के अनुसार संस्था की पूरी निधि बैंक खाते में सुरक्षित रखी जाएगी और राशि का संचालन अध्यक्ष या सचिव तथा कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से ही किया जाएगा। साथ ही आय-व्यय का पूरा लेखा-जोखा और बैठकों की कार्यवाही नियमित रूप से दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
वित्तीय अनियमितताओं की जांच का रास्ता खुला..
शिकायत में सचिव और कोषाध्यक्ष ने कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच और जिम्मेदार पदाधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग की थी। सहायक पंजीयक ने इस मुद्दे पर तत्काल कोई निर्णय नहीं दिया, लेकिन स्पष्ट किया कि यदि जांच करानी है तो छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम की धारा-32 के तहत पंजीयक, फर्म्स एवं संस्थाएं के समक्ष विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है। ऐसे आवेदन पर नियमानुसार जांच की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इस आदेश के बाद फिलहाल प्रेस क्लब में पदाधिकारियों के अधिकारों को लेकर बनी स्थिति स्पष्ट हो गई है, जबकि वित्तीय मामलों से जुड़े आरोपों की जांच का मुद्दा अभी भी खुला हुआ है। आने वाले दिनों में धारा-32 के तहत आवेदन होने पर विवाद का अगला अध्याय शुरू हो सकता है।







