350 एकड़ में विकसित होगा मेगा बॉटैनिकल गार्डन, नंदनवन जू का भी होगा कायाकल्प; PPP मॉडल पर निवेशकों को आमंत्रित कर सरकार ने शुरू की तैयारी..

रायपुर/नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख इको-टूरिज्म एवं जैव विविधता केंद्रों में शामिल करने की दिशा में एक बड़ी पहल करने जा रही है। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने नवा रायपुर स्थित जंगल सफारी के समीप लगभग 350 एकड़ क्षेत्र में विश्वस्तरीय बॉटैनिकल गार्डन तथा रायपुर-भिलाई मार्ग स्थित हीरापुर के नंदनवन जू के पुनर्विकास की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। दोनों परियोजनाओं को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा।

नवा रायपुर का प्रस्तावित बॉटैनिकल गार्डन करीब 550 करोड़ रुपये की संभावित लागत से विकसित किया जाएगा। वहीं नंदनवन के उन्नयन और पुनर्विकास पर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। अंतिम लागत विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) और अंतिम डिजाइन के आधार पर तय होगी।

इन परियोजनाओं को लेकर सोमवार को अरण्य भवन, सेक्टर-19 नवा रायपुर में संभावित निवेशकों और उद्योग समूहों के साथ प्री-टेंडर एवं स्टेकहोल्डर बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (PCCF एवं HoFF) अरुण कुमार पांडे ने की। इससे पहले निवेशकों को जंगल सफारी, प्रस्तावित बॉटैनिकल गार्डन स्थल और नंदनवन का भ्रमण भी कराया गया।

बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रमुख उद्योग समूहों और रियल एस्टेट कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें नोएडा का भूटानी ग्रुप, लखनऊ की शालीमार कॉर्प, अनोपचंद-तिलोकचंद ग्रुप, अविनाश ग्रुप, सिंघानिया बिल्डकॉन, बेबीलोन ग्रुप, मायरा ग्रुप, वी-नेट, मनोज गोयल तथा एसडीएफ इंफ्रा सहित कई निवेशक शामिल रहे।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित बॉटैनिकल गार्डन केवल पौधों और वृक्षों का संग्रहालय नहीं होगा, बल्कि इसे जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा, अनुसंधान, प्रकृति व्याख्या केंद्र (नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर), स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक विरासत को प्रदर्शित करने वाले केंद्र तथा विभिन्न इको-टूरिज्म गतिविधियों के समग्र परिसर के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे प्रदेश में पर्यटन को नया आयाम मिलने के साथ रोजगार और निवेश के अवसर भी बढ़ेंगे।
विशेष बात यह है कि प्रस्तावित 350 एकड़ का बॉटैनिकल गार्डन आकार के लिहाज से दुनिया के कई प्रसिद्ध बॉटैनिकल गार्डनों से बड़ा होगा। वर्तमान में इंग्लैंड के लंदन स्थित प्रसिद्ध रॉयल बॉटैनिक गार्डन, क्यू लगभग 326 एकड़ क्षेत्र में फैला है, जबकि कोलकाता का आचार्य जगदीश चंद्र बोस इंडियन बॉटैनिकल गार्डन लगभग 273 एकड़ में विकसित है। ऐसे में योजना पूरी होने पर नवा रायपुर का बॉटैनिकल गार्डन देश के सबसे बड़े और दुनिया के प्रमुख बॉटैनिकल गार्डनों में शामिल हो सकता है।
बैठक में निवेशकों से परियोजना को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और दीर्घकालिक रूप से सफल बनाने के लिए सुझाव भी मांगे गए। वन विभाग का कहना है कि प्राप्त सुझावों और तकनीकी इनपुट के आधार पर परियोजना दस्तावेज तैयार किए जाएंगे तथा इसके बाद निविदा प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पांडे ने कहा कि यह परियोजना मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पर्यावरणीय दृष्टि और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में तैयार की जा रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से आधुनिक पर्यावरणीय अधोसंरचना विकसित करना, जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देना और छत्तीसगढ़ को इको-टूरिज्म के राष्ट्रीय मानचित्र पर नई पहचान दिलाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना न केवल पर्यटन के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति शिक्षा, अनुसंधान और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी। आने वाले वर्षों में यह स्थल छत्तीसगढ़ की पहचान बनने के साथ देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकता है।







