रायपुर। राजधानी में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है। छोटे बच्चे स्कूल पहुंचने लगे हैं, लेकिन इन प्ले स्कूलों की निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में है। छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग ने 19 नवंबर 2025 को गैर-अनुदान प्राप्त निजी प्ले स्कूलों और पूर्व-प्राथमिक विद्यालयों के लिए नई गाइडलाइन जारी की थी। छह माह का समय बीतने के बाद भी किसी भी संस्थान का भौतिक सत्यापन या निरीक्षण शुरू नहीं हो सका है।

आवासीय भवनों में चल रही कक्षाएं, सुविधाओं का अता-पता नहीं..
जानकारी के अनुसार, जिले में 300 से अधिक प्ले स्कूल और पूर्व-प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई स्कूल सामान्य मकानों और आवासीय भवनों में लग रहे हैं। नई गाइडलाइन के तहत स्कूलों में सुरक्षा मानकों, अग्निशमन व्यवस्था, स्वच्छता, खेल आधारित शिक्षण और शिक्षक योग्यता का पालन अनिवार्य किया गया है।
विभाग को करीब 80 प्ले स्कूलों के पंजीयन आवेदन मिल चुके हैं, लेकिन इन व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अब तक कोई निरीक्षण नहीं हुआ है। इससे बच्चों की सुरक्षा, आधारभूत सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
तीन वर्ष से कम उम्र में प्रवेश पर रोक..
नई व्यवस्था के मुताबिक स्कूलों को इन नियमों का पालन करना होगा :
तीन वर्ष से कम आयु के बच्चों को नर्सरी अथवा किसी भी पूर्व-प्राथमिक कक्षा में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
प्रवेश की आयु सीमा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के दिशा-निर्देशों के अनुसार तय की जाएगी।
बच्चों को शारीरिक दंड और मानसिक प्रताड़ना देने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
स्कूलों में सुरक्षित, स्वच्छ और खेल-आधारित शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
छुट्टियों का समय बीता, अब शासन के निर्देशों का इंतजार..
शिक्षा विभाग ने गर्मी की छुट्टियों के दौरान स्कूल खुलने से पहले निरीक्षण अभियान चलाने की तैयारी की थी। लेकिन यह काम अमल में नहीं आ सका और नया सत्र बिना जांच के ही शुरू हो गया। इस देरी पर विभागीय अधिकारियों का कहना है कि लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) और राज्य शासन की तरफ से निरीक्षण एवं सत्यापन की विस्तृत प्रक्रिया को लेकर निर्देश अभी तक प्राप्त नहीं हुए हैं। इसी कारण से भौतिक सत्यापन लंबित है।
कुल मिलाकर, जब तक शासन से निर्देश नहीं आते, तब तक इन मकानों में चल रहे स्कूलों की मनमानी और अव्यवस्था पर लगाम लगना मुश्किल है। छोटे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बिना देरी किए निरीक्षण अभियान शुरू होना जरूरी है, ताकि नए सत्र में अभिभावक भी निश्चिंत रह सकें।







