संजीवनी केंद्र और शहद प्रसंस्करण इकाई का निरीक्षण, गुणवत्ता और विपणन व्यवस्था की सराहना..

राज्य लघु वनोपज संघ के उपाध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा ने दिए आवश्यक दिशा-निर्देश, स्व सहायता समूहों के कार्यों की भी ली जानकारी..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के उपाध्यक्ष श्री यज्ञदत्त शर्मा ने शुक्रवार को बिलासपुर स्थित संजीवनी विक्रय केंद्र तथा शहद प्रसंस्करण केंद्र, कानन पेंडारी का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने केंद्रों में संचालित विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन करते हुए उत्पादों की गुणवत्ता, स्टॉक की उपलब्धता, विपणन व्यवस्था तथा विक्रय गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की।

निरीक्षण के दौरान उपाध्यक्ष शर्मा ने संजीवनी विक्रय केंद्र में उपलब्ध वनोपज आधारित उत्पादों की गुणवत्ता और केंद्र की सुव्यवस्थित साज-सज्जा की सराहना की। उन्होंने कहा कि वनोपज उत्पादों के बेहतर प्रदर्शन और प्रभावी विपणन से स्थानीय स्व सहायता समूहों तथा वनवासियों को आर्थिक लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है। उन्होंने विक्रय केंद्र में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी सराहा।

इसके बाद उन्होंने कानन पेंडारी स्थित शहद प्रसंस्करण केंद्र का निरीक्षण किया। यहां शहद के संग्रहण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन से जुड़ी व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने तथा बाजार की मांग के अनुरूप कार्य करने पर विशेष जोर दिया।

भ्रमण के दौरान उपाध्यक्ष शर्मा ने अधिकारियों, कर्मचारियों तथा स्व सहायता समूहों के सदस्यों से चर्चा कर विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों की प्रगति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वनोपज आधारित आजीविका गतिविधियां ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

इस अवसर पर प्रबंध संचालक के मार्गदर्शन में संजय चौबे (सीनियर एग्जीक्यूटिव मार्ट), श्रिया देवांगन (वन धन प्रबंधक, प्रसंस्करण) सहित शहद प्रसंस्करण केंद्र के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। साथ ही एसडीओ कोटा एवं अन्य संबंधित अधिकारियों ने भी निरीक्षण कार्यक्रम में सहभागिता की।

उपाध्यक्ष शर्मा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वनोपज आधारित उत्पादों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को और अधिक प्रभावी बनाते हुए ग्रामीण हितग्राहियों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप वनोपज संग्रहकर्ताओं और स्व सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी विभागीय इकाइयों को समन्वित रूप से कार्य करना होगा।

निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान केंद्रों में संचालित व्यवस्थाओं और कार्यप्रणाली को लेकर संतोष व्यक्त किया गया तथा भविष्य में गतिविधियों के और बेहतर विस्तार पर जोर दिया गया।