तखतपुर में 36 लाख की गौरव पथ सड़क एक महीने में ही उखड़ी, भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे अफसर और ठेकेदार.. देखें वीडियो..

बिलासपुर। तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत नेवरा में विकास के बड़े-बड़े दावों की जमीनी हकीकत सामने आ गई है। यहां मुख्यमंत्री गौरव पथ योजना के तहत बनाई गई 36 लाख रुपये की सड़क महज एक महीने के भीतर ही बदहाल हो गई है। वरिष्ठ विधायक धर्मजीत सिंह के इलाके में हुए इस निर्माण कार्य ने सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। सड़क की गिट्टियां उखड़ने लगी हैं और ग्रामीण अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। इस घटिया निर्माण को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उन्होंने कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों ने अपनी शिकायत में साफ तौर पर बताया है कि 450 मीटर लंबी इस सड़क के निर्माण में शुरुआत से ही गुणवत्ता को दरकिनार किया गया। ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण सड़क में बेहद दोयम दर्जे की निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया। आलम यह है कि सड़क पर दुपहिया या चार पहिया वाहन के गुजरते ही उसकी ऊपरी परत टूटकर बिखर रही है। ग्रामीणों को इस बात की गहरी चिंता सता रही है कि आने वाले दिनों में जब मानसून दस्तक देगा, तब इस सड़क का क्या हाल होगा। उन्हें आशंका है कि बारिश के पानी में यह सड़क पूरी तरह से बह जाएगी और वहां सिर्फ बड़े-बड़े गड्ढे बचेंगे, जो राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।

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निर्माण कार्य में पारदर्शिता की भी जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं। सरकारी नियमों के मुताबिक किसी भी निर्माण स्थल पर एक जानकारी बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है जिसमें लागत, कार्य एजेंसी और तकनीकी बातों का पूरा ब्यौरा हो। लेकिन नेवरा में ऐसा कोई बोर्ड नहीं लगाया गया ताकि लोगों को काम की जानकारी न मिल सके। इसके अलावा, सड़क के दोनों किनारों पर पानी निकासी के लिए नाली बननी थी, वह भी नहीं बनाई गई। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर जाकर काम का मुआयना किए बिना ही आंख मूंदकर ठेकेदार का बिल पास कर दिया और उसे भुगतान भी कर दिया गया।

इस भारी धांधली के खिलाफ संकल्प जन कल्याण समाज सेवा संघ छत्तीसगढ़ के कार्यवाहक प्रदेशाध्यक्ष बिहारी सिंह टोडर की अगुवाई में नेवरा के ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में कड़े शब्दों में मांग की है कि इस खराब सड़क को पूरी तरह से उखाड़ा जाए और तय स्टीमेट के अनुसार इसका दोबारा मजबूती से निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों ने यह भी साफ कर दिया है कि मामले की जांच केवल बंद कमरों में कागजों पर नहीं होनी चाहिए बल्कि शिकायतकर्ताओं की मौजूदगी में मौके पर जाकर होनी चाहिए ताकि लीपापोती न हो सके।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जिन अधिकारियों ने बिना गुणवत्ता जांचे काम को स्वीकृति दी है उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। साथ ही निर्माण एजेंसी और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर उनका पंजीयन रद्द किया जाए। इन सभी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की भी पुरजोर मांग उठी है। प्रशासन को जगाने के लिए ग्रामीणों ने अपनी इस शिकायत की कॉपी मुख्यमंत्री, संबंधित विभागीय मंत्री, तखतपुर विधायक और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी भेज दी है।