वन कर्मचारी संघ का आंदोलन विवादों में : बिना अनुमति धरना की तैयारी, विभागीय कामकाज, फायर सीजन और तेंदूपत्ता कार्य प्रभावित होने की आशंका..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ संभाग बिलासपुर द्वारा विभागीय समस्याओं और कथित नियम विरुद्ध स्थानांतरण के विरोध में आंदोलन की चेतावनी दिए जाने के बाद वन विभाग में हलचल तेज हो गई है। संघ ने मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर वृत्त को ज्ञापन सौंपकर 7 दिनों के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन और आगे अनिश्चितकालीन आंदोलन करने की बात कही है।

संघ के अध्यक्ष प्रीतम कुमार पुराईन द्वारा जारी पत्र में आरोप लगाया गया है कि विभाग में कार्य आबंटन, संलग्नीकरण और पदस्थापना के नाम पर नियमों के विपरीत कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जा रहा है। संघ ने ऐसे सभी आदेशों को तत्काल निरस्त करने की मांग करते हुए कहा है कि पूर्व में हुई परामर्शदात्री बैठकों और चर्चाओं के बावजूद समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

इधर, प्रस्तावित आंदोलन को लेकर विभागीय स्तर पर गंभीर आपत्तियां सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार संघ ने धरना प्रदर्शन के लिए अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) बिलासपुर से आवश्यक अनुमति नहीं ली है। ऐसे में बिना अनुमति आंदोलन की तैयारी प्रशासनिक नियमों के विपरीत मानी जा रही है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान समय में प्रदेशभर में ‘सुशासन तिहार’ और ‘सुराज अभियान’ के तहत विभिन्न सरकारी कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं। ऐसे संवेदनशील समय में आंदोलन और शक्ति प्रदर्शन से प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

इसके साथ ही वन विभाग में इन दिनों तेन्दूपत्ता संग्रहण का महत्वपूर्ण कार्य भी जारी है। गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं और पूरा विभाग फायर सीजन की चुनौती से जूझ रहा है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसी स्थिति में वन कर्मचारियों द्वारा धरना-प्रदर्शन करना विभागीय जिम्मेदारियों के विपरीत माना जा सकता है।

वन विभाग के अधिकारियों का यह भी कहना है कि गर्मी बढ़ने के कारण जंगली जानवर पानी की तलाश में जंगलों से निकलकर ग्रामीण इलाकों की ओर पहुंच रहे हैं। ऐसे समय में यदि वन कर्मचारी अपने मुख्यालय छोड़कर आंदोलन में शामिल होते हैं तो वन्य प्रबंधन और ग्रामीण सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

सूत्रों के मुताबिक विभाग के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि आंदोलन के पीछे कर्मचारियों की वास्तविक समस्याओं से ज्यादा कुछ पदाधिकारियों की व्यक्तिगत छवि निर्माण की राजनीति काम कर रही है। कुछ अधिकारियों का यह भी दावा है कि संघ के कुछ नेता अपने ही कर्मचारियों से जुड़े मामलों और चल रही जांचों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से आंदोलन का माहौल तैयार कर रहे हैं।

फिलहाल वन विभाग और कर्मचारी संघ के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। अब सभी की नजर प्रशासनिक फैसले पर टिकी है कि क्या बातचीत के जरिए मामला सुलझेगा या फिर यह विवाद बड़े आंदोलन का रूप लेगा।